'कामचोर हैं पाकिस्तानी, अल्लाह के नाम पर फंसाया', ईशनिंदा के आरोप में गिरफ्तार चीनी इंजीनियर की सफाई
डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में आजादी के बाद से ईशनिंदा के 1,415 मामले सामने आए हैं जिसमें 89 नागरिकों की मौत हुई है। वहीं, 1947 से 2021 तक ईशनिंदा के आरोप में 18 महिलाओं और 71 पुरुषों की हत्या कर दी गई।

Pakistan News: पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में गिरफ्तार किए गये चीनी इंजीनियर ने जांच टीम को बताया है, कि उसे ईशनिंदा के आरोप में कामचोर मजदूरों ने फंसाया है। चीनी इंजीनियर ने पाकिस्तान सरकार की बनाई ज्वाइंट इन्वेस्टिगेशन टीम (JIT) को बताया है, कि उसे कामचोरों ने फंसाया है।
आपको बता दें, कि पाकिस्तान में 17 अप्रैल को एक चीनी इंजीनियर पर ईशनिंदा का आरोप लगा था और उसके बाद सैकड़ों की भीड़ उसकी मॉब लिंचिंग के लिए पहुंच गई थी। जिसके बाद किसी तरह से पुलिस ने उसे भीड़ के हाथों बचाया और हेलीकॉप्टर से उसका रेस्क्यू किया। जिससे फिलहाल, पाकिस्तान की पुलिस पूछताछ कर रही है।
चीनी नागरिक ने जेआईटी को बताया, कि "उसने कभी भी ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की, जिससे मुसलमानों या यहां तक कि छिपे हुए कोहिस्तानियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे"। उसने कहा, कि प्रोजेक्ट का काम काफी धीमे चल रहा है, इसीलिए वो मजदूरों से जल्दी काम करने के लिए कह रहा था और इसी बात को लेकर मजदूरों ने उसके ऊपर ईशनिंदा का आरोप लगा दिया।
चीनी नागरिग को कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच एबटाबाद में पुलिस लाइंस में रखा गया है और जिला प्रशासन ने पुलिस परिसर को ही उप-जेल घोषित कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सैकड़ों की संख्या में पुलिस के जवानों को चीनी नागरिक की सुरक्षा में तैनात किया गया है। बताया जा रहा है, कि हजारों की संख्या में भीड़ उस चीनी इंजीनियर का मॉब लिचिंग करने के लिए मंडरा रही थी, जिसे काबू में करने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी है।
चीनी इंजीनियर ने आरोपों को बताया झूठा
चीनी इंजीनियर ने जेआईटी के सामने हुई पूछताछ के दौरान बताया, कि "मैं पाकिस्तानियों और मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के बारे में सोच भी नहीं सकता, लेकिन मैं यहां जो कुछ भी झेल रहा हूं, वह झूठ के अलावा कुछ नहीं है।" आपको बता दें, कि पिछले कुछ समय में दसू जलविद्युत परियोजना में तीसरी बार तोड़फोड़ की कोशिश की गई है। इस प्रोजेक्ट में चीन ने करोड़ों रुपये लगाए हैं, जिससे 3420 मेगावाट बिजली का उत्पादन होना है।
डॉन न्यूज के मुताबिक, इस पूछताछ से जुड़े सूत्रों ने कहा, कि ईशनिंदा के आरोप में पकड़े गए चीनी इंजीनियर को संभवत: (गुरुवार) को एबटाबाद में एक आतंकवाद विरोधी अदालत में पेश किया जाएगा।
वहीं, मामले की जांच कर रही पुलिस टीम ने दुभाषिया मोहम्मद यासिर से भी पूछताछ की है, जिसकी गवाही पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। दुभाषिए ने ही पुलिस टीम को बताया, कि चीनी व्यक्ति ने वास्तव में अल्लाह का अपमान किया है, उसे ऐसा नहीं लगता है। मोहम्मद यासिर ने पुलिस को ये भी बताया है, कि उस घटना के दौरान जमा हुए मजदूर, जिन्होंने ईशनिंदा का आरोप लगाया है, वो यासिर को अपने पिछले रुख पर अडिग रहने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

चीनी नागरिक को लेकर फंसी सरकार
वहीं, पाकिस्तान की पुलिस ने किसी तरह से भीड़ को इस बात के लिए राजी कर रखा है, कि कथित तौर पर अल्लाह का अपमान करने वाले चीनी इंजीनियर को सख्त सजा दिलवाई जाएगी, लेकिन क्या पाकिस्तान ऐसा कर पाएगा, ये असंभव लगता है। पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोपियों के मौत की सजा का प्रावधान है, और क्या चीनी नागरिकों को पाकिस्तान में मौत की सजा दी जाएगी? ये बहुत बड़ा सवाल है।
वहीं, चीन ने कहा है, कि वो पूरे मामले में काफी करीब से नजर बनाए हुआ है। चीनी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा, कि इस्लामाबाद में उसका मिशन अपने नागरिक के बारे में स्थिति की पुष्टि कर रहा है। मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने मंगलवार की समाचार ब्रीफिंग में कहा, "चीनी सरकार ने हमेशा प्रवासी चीनी नागरिकों को मेजबान देश के कानूनों और नियमों का पालन करने और स्थानीय रीति-रिवाजों का सम्मान करने की आवश्यकता पर बल दिया है।"
चीनी विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, कि "अगर इस मामले में एक चीनी नागरिक शामिल है, तो दूतावास अपने कर्तव्यों के दायरे में कांसुलर सुरक्षा और सहायता प्रदान करेगा।"
आपको बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान में किसी विदेशी नागरिक पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया है। दिसंबर 2021 में, सियालकोट की एक फैक्ट्री में मैनेजर के पद पर काम करने वाले श्रीलंकाई नागरिक प्रियांथा दियावदाना को ईशनिंदा के आरोप में पीटपीट कर मार डाला गया था।
48 वर्षीय प्रियांथा की हत्या के बाद कारखाने के श्रमिकों की भीड़ ने उनके शव को आग के हवाले कर दिया था। इस घटना से पाकिस्तान और श्रीलंका के रिश्तों में तनाव पैदा हो गया था। श्रीलंका के तत्कालीन प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने तत्कालीन पीएम इमरान खान से नाराजगी भी जताई थी।












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