मुंबई पावर ग्रिड साइबर अटैक, चीन पर अमेरिकी सांसद का फूटा गुस्सा, बाइडेन से की भारत का साथ देने की मांग
मुंबई पावर ग्रिड पर चीन द्वारा किए गये साइबर हमले के खिलाफ अमेरिकी सांसद ने राष्ट्रपति जो बाइडेन से भारत का साथ देने की मांग की है।
वाशिंगटन/नई दिल्ली: अंतर्राष्ट्रीय इंटेलीजेंस की चोरी और सीनाजोरी के लिए कुख्यात चीन द्वारा भारतीय पावर ग्रिड पर किए गये साइबर अटैक के खिलाफ अमेरिकी सांसद ने जमकर गुस्सा दिखाया है। अमेरिकी सांसद ने राष्ट्रपति जो बाइडेन से चीन के खिलाफ भारत का साथ देने की मांग की है।

चीन पर अमेरिकी सांसद का गुस्सा
अमेरिका के वरिष्ठ सांसद ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से अपील की है कि वो चीन द्वारा भारतीय पावर ग्रिड पर किए गये हमले के खिलाफ भारत का साथ दें। दरअसल, पिछले साल मुंबई में बिजली व्यवस्था कुछ दिनों तक पूरी तरह ठप हो गई थी, कई इलाकों में ब्लैकआउट हो गया था। जिसके पीछे की वजह खराब बिजली विफलता को बताई गई थी। अब एक रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि साल 2020 में मुंबई में बिजली गुल होने का संबंध भारत और चीन के बीच लद्दाख में उस वक्त जारी सीमा तनाव था। रिपोर्ट में कहा गया है कि मुंबई का ब्लैकआउट होने के पीछे चीन का साइबर क्राइम है। अमेरिकी मीडिया न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है लद्दाख में जारी सीमा विवाद के बीच चीन अपने हैकर्स की मदद से भारत में ब्लैकआउट कराने की कोशिश में था और साइबर अटैक किया था।
अमेरिकी सांसद फ्रेंक पेलोन ने ट्वीट करते हुए कहा है कि 'अमेरिका को निश्चित तौर पर अपने रणनीतिक साझेदार भारत के साथ खड़ा होकर चीन की निंदा करनी चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति को चीन द्वारा भारतीय पावर ग्रिड पर किए गये साइबर हमले के खिलाफ बयान जारी करना चाहिए। चीन ने महामारी के दौरान मुंबई में पॉवर ग्रिड पर साइबर हमला किया था यह काफी निंदनीय है'। अमेरिकी सांसद फ्रेंक पेलोन ने अपने ट्वीट में कहा कि 'हम चीन को किसी दूसरे देश को धमकाने या किसी दूसरे देश के खिलाफ अपनी ताकत दिखाने की इजाजत नहीं दे सकते हैं'।
वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने मुंबई में पावर ग्रिड पर हुए साइबर हमले के खिलाफ बयान दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि उसे मुंबई पावर ग्रिड पर हुए हमले की जानकारी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने PTI को दिए अपने बयान में कहा है कि 'मुंबई पावर ग्रिड पर हुए साइबर हमले की जानकारी उसे है और उसके बारे में संबंधित अमेरिकन कंपनी अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। अमेरिकन विदेश मंत्रालय अपने सहगोयी देशों के साथ किसी भी साइबर हमले से निपटने की योजना बना रहा है'

पावर ग्रिड पर चीन का साइबर अटैक
अमेरिकी मीडिया न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अक्टूबर में पांच दिनों के अंदर भारत के पॉवर ग्रिड, आईटी कंपनियों और बैंकिंग सेक्टर्स पर 40500 बार साइबर अटैक चीन की ओर से किया गया था। इस स्टडी में ये भी दावा किया गया है कि जून 2020 में गलवान घाटी झड़प के बाद 12 अक्टूबर को मुंबई में हुए ब्लैकआउट के पीछे बीजिंग द्वारा किया गया साइबर अटैक ही कारण था। चीनी साइबर अटैक से भारत को कड़ा संदेश देना चाहता था कि अगर उसके खिलाफ सीमा पर कार्रवाई की गई तो भारत के अलग-अलग इलाकों में बिजली जा सकती है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि चीनी मलवेयर भारत में बिजली आपूर्ति के कंट्रोल सिस्टम में घुस चुके थे। जिसमें हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन सबस्टेशन और थर्मल पावर प्लांट भी शामिल थे। अमेरिका की साइबर सिक्योरिटी कंपनी रिकॉर्डेड फ्यूचर ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत के पावर (बिजली) सिस्टम में चीन द्वारा घुसपैठ करने की कोशिश की गई थी। कपंनी ने ये भी कहा है कि अधिकतर चीनी मलवेयर कभी एक्टिवेट नहीं किए गए थे। हालांकि कंपनी ने कहा है कि वो भारत के पावर सिस्टम के अंदर नहीं पहुंच सकता इसलिए इसकी जांच अभी नहीं की जा सकी है। बता दें कि अमेरिका की साइबर सिक्योरिटी कंपनी रिकॉर्डेड फ्यूचर सरकारी एजेंसियों के साथ इंटरनेट के उपयोग की स्टडी करती है।
रिकॉर्डेड फ्यूचर के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर स्टुअर्ट सोलोमन बताया है कि चीन के सरकारी हैकर्स की रेड इको नाम की फर्म ने चोरी-चुपके तरीके से भारत के लगभग एक दर्जन से अधिक पावर जनरेशन और ट्रांसमिशन लाइन में घुसपैठ की तैयारी में थे। इसके लिए चीन ने एडवांड साइबर हैकिंग के तकनीकों का व्यवस्थित रूप से उपयोग किया था। हालांकि इस रिपोर्ट पर किसी भारतीय अधिकारी की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। रिपोर्ट में यह कहा गया है कि भारत उस साइबर हमले की कोड की तलाश कर रहा है।












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