जैक मा के हाथों से छिना Ant Group का कंट्रोल, शी जिनपिंग के खिलाफ बोलना बना बर्बादी की वजह
जैक मा की कंपनी अलीबाबा चीन में इतनी बड़ी हो गई थी कि उन्हें चीन के सबसे शक्तिशाली लोगों में से एक माना जाने लगा था। उसके बाद से ही वो शी जिनपिंग की आंखों में खटक रहे थे।

Jack Ma to give up Ant Group: चीन के सबसे अमीर और प्रतिष्ठित कारोबारियों में शुमार जैक मा के हाथों से उनकी सबसे बड़ी कंपनी छिन गई है और दो साल पहले शी जिनपिंग के खिलाफ एक लाइन बोलना उनकी बर्बादी की वजह बन गई है। दो साल पहले जैक मा ने शंघाई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शी जिनपिंग सरकार की एक पॉलिसी पर सवाल उठाया था, और उसके बाद उन्हें अपनी पूरी कंपनी गंवाकर शी जिनपिंग के गुस्से को झेलना पड़ा है।

जैक मा के हाथ से छीन ली गई कंपनी!
चीन की सबसे प्रतिष्टित कंपनियों में शुमार Ant Group ने अपने एक बयान में कहा है, कि कंपनी के ऊपर अब जैक मा का कोई कंट्रोल नहीं रहा है। Ant Group ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा है, कि कतंपनी के शेयरहोल्डर्स एक एडजस्टमेंट को अंजाम तक पहुंचाने के लिए तैयार हो गये हैं, जिसके तहत उन्हें कंपनी के फैसलों में जैक मा से उनके ज्यादातर वोट देने का अधिकार ले लिया गया है। इसके साथ ही कंपनी ने आगे कहा कि, "इस समायोजन के बाद किसी भी शेयरधारक, अकेले या अन्य पार्टियों के साथ संयुक्त रूप से एंट ग्रुप पर नियंत्रण नहीं होगा।" आपको बता दें कि, Ant Group की स्थापना जैक मा ने ही की थी और वो इस कंपनी के मालिक रहे हैं, लेकिन शी जिनपिंग की आलोचना के बाद से ही वो कम्युनिस्ट सरकार के गुस्से का सामना कर रहे थे।

Ant Group पर सरकारी कार्रवाई
जैक के हाथों से कंपनी के तमाम अधिकार उस वक्त ले लिए गये हैं, जब कंपनी की स्थिति काफी खराब होने लगी थी और ये स्थिति उस वत्त बनी, जब साल 2020 में Ant Group के 37 अरब डॉलर के IPO जारी करने पर रोक लगा दी गई थी। जिसके बाद से ही कंपनी की आर्थिक स्थिति कमजोर पड़ने लगी थी। इसके साथ ही कंपनी को ऐसे हर फैसले लेने से रोक दिया गया, जिसके जरिए वो अपनी आर्थिक स्थिति सही कर सकती थी। अक्टूबर 2020 में पहली बार अरबपति कारोबारी जैक मा ने चीनी सकरकार के फाइनेंशियल रेग्यूलटर और चीनी सरकार के स्वामित्व वाली बैंकों की आलोचना की थी और उसके ठीक बाद एंट ग्रुप के आईपीओ रिलीज को रोक दिया गया था।

शी जिनपिंग की आलोचना पड़ी भारी
कार्यक्रम में बोलते हुए जैक मा ने चीन सरकार की "नवाचार का दम घोंटने" के लिए बनाए गये रेग्यूलेचर नियमों की आलोचना की थी और वैश्विक बैंकिंग नियमों से चीनी बैंकों की तुलना करते हुए उसे "बूढ़ों के क्लब" कहा था। जैक मा ने एक ठोस वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र की कमी के लिए भी चीन की आलोचना की थी और कहा था, कि चीनी बैंक "पॉन की दुकानों" की तरह हैं। उसी के बाद से ही जैक मा को चीनी अधिकारियों की आलोचना की वजह से उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी। तब से चीनी अधिकारियों ने उनके खिलाफ सख्ती को काफी ज्यादा बढ़ा दिया था और उन्हें कई महीनों तक नजरबंद रखा गया और बाद में वो किसी तरह से चीन से निकलने में कामयाब रहे और फिलहाल जापान में रह रहे हैं।

जापान में रह रहे हैं जैक मा
पिछले साल नवंबर में फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया था कि, चीन के दिग्गज अरबपति कारोबारी जैक मा पिछले 6 महीने से जापान की राजधानी टोक्यो के बाहरी इलाके में अपने पूरे परिवार के साथ रह रहे हैं और यहीं से वो इजरायल और अमेरिका की नियमित यात्राएं करते हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में इस मामले से परिचित कुछ लोगों के हवाले से इसकी जानकारी दी थी। 58 साल के जैक मा साल 2020 से पहले तक लगातार सुर्खियों में रहते थे, लेकिन राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आलोचना के बाद से उनके बुरे दिन शुरू हो गये थे और चीन में उनकी प्रतिष्ठित कंपनी अलीबाबा के खिलाफ कई एक्शन लिए गये, जिनमें अरबों डॉलर का जुर्माना भी शामिल है। इसके साथ ही कहा जाता है, कि जैक मा चीन में शी जिनपिंग के विरोधी गुट रहे 'शंघाई गैंग' का हिस्सा रहे हैं, जिसके तमाम नेताओं को तीसरी बार राष्ट्रपति बनने से पहले शी जिनपिंग ने खामोश कर दिया था।

भटक रहे हैं अलीबाबा के मालिक
शी जिनपिंग की सिर्फ एक बार आलोचना करने के बाद से ही जैक मा की जिंदगी में तूफान मच गया। जैक मा का घर चीन के औद्योगिक शहर शंघाई के पास हांग्जो में है, जहां अलीबाबा का हेडक्वार्टर भी है। वहीं, चीनी अधिकारियों के साथ मामला बिगड़ने के बाद से जैक मा को स्पेन और नीदरलैंड के साथ साथ कई और देशों में भी देखा जा चुका है। जैक मा का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था और बाद में वो अपनी मेहनत की बदौलत चीन की सबसे बड़ी कंपनियों अलीबाबा और एंट ग्रुप के मालिक बने। वहीं, चीन का सबसे अमीर कारोबारी बनने का सम्मान भी जैक मा के नाम हासिल है। साल 2019 में जैक मा ने अचानक रिटायर होने की घोषणा कर कारोबार जगत को हैरान कर दिया, और उस वक्त उन्होंने कहा था, कि वो एक समुद्र के किनारे बीच पर मरना पसंद करेंगा, ना कि अपने दफ्तर में काम करते हुए। इसी के बाद से अनुमान लगाए जा रहे थे, कि चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ उनके संबंध खराब चल रहे हैं।
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