जो बाइडेन और शी जिनपिंग के बीच ऐतिहासिक बैठक आज, क्या चीन के सामने झुक गया है अमेरिका? जानें एजेंडे
Xi Jinping-Joe Biden: अमेरिका के कैलिफोर्निया में जो बाइडेन और शी जिनपिंग के बीच होने वाली मुलाकात को लेकर सबसे पहली प्रतिक्रिया यही हो सकती है, कि अगर अमेरिका झुकेगा नहीं, तो दोनों नेताओं के बीच होने वाली इस बैठक के कुछ भी नतीजे नहीं निकलने वाले हैं।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ एक बहुप्रतीक्षित शिखर सम्मेलन के लिए जब अमेरिका के कैलिफोर्निया के सैन-फ्रांसिस्को पहुंचे है, तो उनका मकसद अपने देश की परेशान अर्थव्यवस्था को कम करने के लिए अमेरिका के साथ चल रहे ट्रेड वार को कम करने का दबाव बनाना होगा।

शी जिनपिंग छह सालों में अपनी पहली अमेरिका यात्रा पर हैं और इस दौरे के दौरान चार दिवसीय यात्रा में वो एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग अंतर्राष्ट्रीय मंच (APEC) में शामिल हो रहे हैं और इसी शिखिर सम्मेलन से इतर दोनों नेताओं की मुलाकात होने वाली है। इससे पहले, दुनिया की शीर्ष दो अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं ने नवंबर 2022 में इंडोनेशिया के बाली में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की थी।
रिपोर्ट्स बताती हैं, कि इस बैठक की व्यवस्था करने के लिए, उनकी सरकारों को कई विवादास्पद मुद्दों से निपटना पड़ा है, जिसमें अमेरिका के ऊपर बार बार मंडराने वाले चीनी सर्विलांस गुब्बारे से लेकर दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण हो चुके व्यापारिक संबंध भी शामिल हैं।
चीन के सामने झुकेगा अमेरिका?
जो बाइडेन और शी जिनपिंग के बीच होने वाली इस मुलाकात के कुछ नतीजे निकलेंगे, इस बात की संभावना नगन्य है।
शी जिनपिंग इस मुलाकात के लिए सिर्फ इसलिए तैयार हुए हैं, क्योंकि कोविड महामारी के बीच ढह रही चीन की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए उन्हें अमेरिकी उद्योगपतियों और बाइडेन प्रशासन से व्यापार में छूट चाहिए। चीन का रियल एस्टेट सेक्टर संकट में है और देश में बेरोजगारी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
लेकिन, इसके बदले में अमेरिका चाहेगा, कि यूक्रेन युद्ध में चीन रूस का समर्थन करना बंद करे। साथ ही, इजराइल युद्ध में चीन ईरान के कंधे से अपना हाथ हटाए। लेकिन, दुनिया में नया ग्लोबल ऑर्डर बना रहा चीन, शायद ही ऐसा करेगा।
पहले विदेश मंत्री और फिर रक्षा मंत्री को बगैर किसी कारण बताए बर्खास्त कर शी जिनपिंग ने अपने शासन को और भी ज्यादा संदिग्ध बना लिया है और शी जिनपिंग ने अपनी छवि एक तानाशाह के तौर पर और भी ज्यादा मजबूत बना ली है, जबकि अफगानिस्तान से सैनिकों की वापसी, यूक्रेन युद्ध में मिली बुरी तरह से नाकामी और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर मिली नाकामियों ने जो बाइडेन की अमेरिका में अप्रूवल रेटिंग को और भी ज्यादा कम कर दिया है।
यूक्रेन के बाद इजराइल युद्ध ने अमेरिका को चुनौतियों में फंसा रखा है और अमेरिका नहीं चाहेगा, कि इस वक्त ताइवान में नया बखेड़ा शुरू हो, लिहाजा शी जिनपिंग से मुलाकात के वक्त जो बाइडेन, ताइवान पर चीनी राष्ट्रपति से आश्वासन चाहेंगे, लेकिन चीन के लिए ताइवान पर प्रेशर बनाने का अभी सबसे ज्यादा उपयुक्त समय है, लिहाजा उम्मीद काफी कम है, कि चीन ताइवान पर नरम होगा।
शी जिनपिंग के एजेंडे में क्या होगा?
घरेलू स्तर पर चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, चीनी नेता खुद को बाइडेन के मुकाबले मजबूत स्थिति में देख सकते हैं। बीजिंग, अमेरिका को गहरे राजनीतिक ध्रुवीकरण से ग्रस्त और वैश्विक स्तर पर गिरावट की तरफ जाने वाला देश मान रहा है।
डेनवर विश्वविद्यालय में चीन-अमेरिका सहयोग केंद्र के निदेशक सुइशेंग झाओ ने हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों की बीजिंग यात्राओं का जिक्र करते हुए कहा, कि "शी जिनपिंग को लगता है, कि वो अमेरिका है, जो चीन के साथ संबंध सुधारना चाहता है। और ये सच भी है, क्योंकि अमेरिका ने ही बार बार अपने प्रतिनिधिमंडलों को बीजिंग भेजा। अमेरिका के वित्त मंत्री जेनेट येलेन और विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन चीन गये थे और शी जिनपिंग का मानना है, कि वो अमेरिका पर प्रेशन बनाने में कामयाब रहे हैं।"
बीजिंग का मानना है, कि अमेरिका को ही चीन के प्रति अपने रवैये में "सुधार करना चाहिए"। इसकी नजर में, यदि "आप हमारे पास आ रहे हैं और हमसे बात कर रहे हैं, तो आपको हमारी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।"












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