भारत में आयोजित जी-20 समिट पर पहली बार चीन ने तोड़ी चुप्पी, कही ये बात
भारत की जी-20 की मेजबानी को लेकर आखिरकार चीन ने पहली प्रतिक्रिया दी है। चीन की ओर से कहा गया है कि जी-20 में जो घोषणा पत्र अपनाया गया है वह सकारात्मक संकेत भेजता है कि यह प्रभावी ग्रुप साथ मिलकर काम कर रहा है और वैश्विक चिंताओं को सुलझाना चाहता है, साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को बेहतर करना चाहता है।
बता दें कि इस बार जी-20 की मेजबानी भारत ने की थी। 9-20 सितंबर को दिल्ली में इस समिट को सफलतापूर्वक आयोजित किया गया है। इस समिट को लेकर पहली बार चीन की ओर से प्रतिक्रिया आई है।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, शिखर सम्मेलन में नेताओं ने घोषणा पत्र को अपनाया, जोकि चीन के रूख को भी दर्शाता है कि जी-20 मजबूत तरीकों पर काम करेगा, वैश्विक चुनौतियों से निपटने, आर्थिक सुधार और वैश्विक विकास को साथ मिलकर आगे बढ़ाने की वकालत करता है।
माओ ने कहा कि दिल्ली में समिट की तैयारी में चीन रचनात्मक सहयोग दिया। जिस तरह से जी-20 समिट के दौरान चीन की सीधे तौर पर आलोचन नहीं की गई, क्या चीन उसका समर्थन करता है इसपर माओ ने कहा कि चीन पर हमारा रुख शुरुआत से स्पष्ट है और साफ है।
बता दें कि जी-20 में शामिल देश दुनिया की 85 फीसदी जीडीपी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि 75 फीसदी ग्लोबल ट्रेड और दुनिया की दो तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस गुट में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चीन, फ्रास, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रिपब्लिक ऑफ कोरिया, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूके, अमेरिका, यूरोपियन यूनियन शामिल हैं।












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