विकासशील देशों के 5,000 सैनिकों को ट्रेनिंग देगा चीन, जानें शी जिनपिंग सरकार ने क्यों किया ये ऐलान ?
चीन ने विकासशील देशों के पांच हजार सैनिकों को विशेष कार्यों के लिए प्रशिक्षत करने की घोषणा की है। चीन पहले से इस तरह के कार्य में जुटा भी हुआ है, लेकिन अगले पांच वर्षों के लिए विशेष योजना बना रहा है।

चीन की सेना आने वाले पांच वर्षों में विकासशील देशों के पांच हजार सैनिकों को ट्रेनिंग देने की तैयारी कर रहा है। इसकी घोषणा शी जिनपिंग की सरकार ने की है और इसका मकसद इन देशों की साझा आवश्यकताएं बताई जा रही हैं, जिसमें साइबर सिक्योरिटी और आतंकवाद-विरोधी अभियान शामिल हैं। लेकिन, जब मामला चीन का आ जाता है तो अक्सर उनका सामने से दिख रहा उद्देश्य और असल वजह में बहुत अंतर होने की आशंका रहती है। इसलिए, चीन के इस रवैए को लेकर कुछ और भी इरादा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।

5,000 विदेशी सैनिकों को ट्रेनिंग देगा चीन
चीन ने विकासशील देशों के 5,000 सैनिकों को ट्रेनिंग देने का ऐलान किया है। यह ट्रेनिंग अगले पांच वर्षों में दी जाएगी। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक शी जिनपिंग की सरकार आतंकवाद, साइबर घोटाले जैसी समस्याओं से निपटना चाहती है और उसी को नजर में रखते हुए चीन ने ऐसी घोषणा की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, 'बीजिंग गैर-पारंपरिक सुरक्षा क्षेत्र में शासन क्षमता में सुधार के लिए आतंकवाद, साइबर सिक्योरिटी, जैव सुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आदान-प्रदान और सहयोग के लिए ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मंच बनाने की योजना बना रहा है।'

पश्चिम को टक्कर देने की जिनपिंग की योजना ?
इसके अलावा इस पहल को पश्चिम की अगुवाई वाले सुरक्षा ढांचा का विकल्प तैयार करने के तौर पर भी देखा जा रहा है। इस तरह के विचार का पहला प्रस्ताव चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पिछले साल अप्रैल में ही बोआओ फोरम फॉर एशिया एनुअल कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया था। नई रिपोर्ट के मुताबिक चीन यूनिवर्सिटी-स्तर की मिलिट्री और पुलिस एकैडमी स्तर पर भी ज्यादा आदान-प्रदान और सहयोग को प्रोत्साहित करने की योजना पर भी काम कर रहा है।

बड़ी योजना के साथ आगे बढ़ रहा है ड्रैगन ?
पिछले साल चीन ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) से जुड़े देशों के 2,000 सैनिकों को प्रशिक्षत करने की घोषणा की थी। तब भी इसके लिए पांच साल की मियाद रखी गई थी और आतंकवाद-विरोधी फोर्स पर फोकस करते हुए एक ट्रेनिंग बेस तैयार करने का ऐलान किया था। अक्टूबर 2022 में चीन ने पश्चिमी देशों के युद्धक विमानों और हेलीकॉप्टरों को मार गिराने के लिए आएएफ के 30 पूर्व पायलटों की भी भर्ती की थी। चीन की ओर से हाल के वर्षों में बहुपक्षीय और द्विपक्षीय ट्रेनिंग कार्यक्रमों की कोशिशें बढ़ गई है और उसकी नजरें मध्य-पूर्व, प्रशांत द्वीप समूह से लेकर सेंट्रल एशिया तक में फैली हैं।

सोलोमन आइलैंड की पुलिस को कर रहा मदद
पिछले साल दिसंबर में ही चीन ने अरब देशों के 1,500 पुलिस और साइबर सुरक्षा अधिकारियों को प्रशिक्षण देने का ऑफर दिया था। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार इस साल 22 जनवरी से चीन ने सोलोमन आइलैंड की पुलिस को 'दंगा-विरोधी क्षमता' विकसित करने का प्रशिक्षण देने में मदद की है। प्रशिक्षण के नाम पर छोटे-छोटे देशों की सेना और वहां की आंतरिक्ष सुरक्षा एजेंसियों में घुसपैठ करने के पीछे चीन का कुछ अलग एजेंडा भी है, इससे फिलहाल इनकार नहीं किया जा सकता है। क्योंकि, चीन के शासक दूरगामी प्रभाव वाले फैसले लेने में धुरंधर रहे हैं।
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रूस- यूक्रेन युद्ध पर चीन का संदेश
वैसे इसी के साथ चीन ने यूक्रेन पर रूस के हमले के एक साल पूरे होने पर दोनों ही देशों से धीरे-धीरे सैनिकों को पीछे करने की सहमति बनाने का आह्वान किया है। हालांकि, इसने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल करने के खिलाफ चेताया भी है और कहा है कि संघर्ष से किसी का फायदा नहीं होने वाला। लेकिन, चीन इस बात पर सचेत है कि वह रूस को हमलावर न कहे। चीन ने कहा है, 'सभी पक्षों को तर्कसंगत रवैया अपनाना और संयम बरतना चाहिए, आग को हवा देने और तनाव को बढ़ने देने से बचना चाहिए। साथ ही संकट को और बिगड़ने या नियंत्रण से बाहर होने देने से रोकना चाहिए।' (तस्वीरें- प्रतीकात्मक)












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