दक्षिण कोरिया-अमेरिका परमाणु पनडुब्बी संधि से बौखलाया चीन, उत्तर कोरिया को लेकर ड्रैगन ने दी चेतावनी

उत्तर कोरिया ने इसी साल दावा किया है, कि उसने सॉलिड फ्यूल इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है, जिसके बाद दक्षिण कोरिया और जापान ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।

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China warns US South Korea: दक्षिण कोरिया में परमाणु हथियारों के साथ अमेरिकी पनडुब्बियों की तैनाती को लेकर चीन बुरी तरह से भड़क गया है।

चीन ने वाशिंगटन और सियोल को गुरुवार को उत्तर कोरिया के साथ "उत्तेजक टकराव" के खिलाफ चेतावनी दी है। चीन ने कहा है, कि अमेरिका का दक्षिण कोरिया में परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियों की तैनाती उत्तर कोरिया को 'उकसाने' वाली हरकत है।

आपको बता दें, कि राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनके दक्षिण कोरियाई समकक्ष ने कहा है, कि प्योंगयांग अपने नेतृत्व के "अंत" का सामना करेगा, यदि वह अपने परमाणु शस्त्रागार का उपयोग करता है।

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, कि "सभी पक्षों को (कोरियाई) प्रायद्वीप से मुद्दे की जड़ में जाकर सामना करना चाहिए और इस मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने में रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।"

उन्होंने अमेरिका और दक्षिण कोरिया पर "जानबूझकर तनाव बढ़ाने, टकराव भड़काने और धमकियां देने" का आरोप लगाया है।

अमेरिका-दक्षिण कोरिया में हुआ है समझौता

आपको बता दें, कि वाशिंगटन में एक शिखर सम्मेलन में, बाइडेन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक-योल ने स्पष्ट किया है, कि यदि उत्तर कोरिया में तानाशाही शासन ने दक्षिण कोरिया या संयुक्त राज्य अमेरिका पर हमला किया, तो इसकी प्रतिक्रिया विनाशकारी होगी।

दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए हैं, कि दक्षिण कोरिया के लिए अमेरिकी सुरक्षा कवच को परमाणु-सशस्त्र उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षणों के सामने मजबूत किया जाएगा। जिसकी चीन ने निंदा की है।

बीजिंग ने गुरुवार को दोनों देशों के फैसले की निंदा करते हुए कहा, कि वाशिंगटन "क्षेत्रीय सुरक्षा की अनदेखी करता है और तनाव पैदा करने के लिए प्रायद्वीप के मुद्दे का फायदा उठाने पर जोर देता है"। प्रवक्ता माओ ने कहा, कि "अमेरिका क्या कर रहा है... शिविरों के बीच टकराव को भड़काता है, परमाणु अप्रसार व्यवस्था और अन्य देशों के रणनीतिक हितों को कमजोर करता है।"

उन्होंने कहा, अमेरिका का ये कदम "कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव को बढ़ाती हैं, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को कमजोर करती हैं, और प्रायद्वीप पर परमाणुकरण के लक्ष्य के खिलाफ हैं"।

आपको बता दें, कि उत्तर कोरिया ने पिछले दो सालों में दर्जनों मिसाइलों का परीक्षण किया है और उसने यहां तक दावा किया है, कि उत्तर कोरिया के पास अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइल क्षमता हासिल हो गई है। उत्तर कोरिया ने दावा किया है, कि वो अमेरिका पर अब आसानी से हमला कर सकता है। हालांकि, दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों को लेकर हुए समझौते पर अभी तक उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आपको बता दें, कि अमेरिकी परमाणु-सशस्त्र बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों ने शीत युद्ध के दौरान 1970 के दशक के अंत में दक्षिण कोरिया में लगातार बंदरगाहों का दौरा किया था और वो एक ऐसी अवधि थी, जब अमेरिका के पास दक्षिण कोरिया में सैकड़ों परमाणु हथियार तैनात थे।

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    1991 में, अमेरिका ने कोरियाई प्रायद्वीप से अपने सभी परमाणु हथियार वापस ले लिए। वहीं, 1992 में सियोल और प्योंगयांग ने एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें कहा गया था, कि दोनों देश "परमाणु हथियारों का परीक्षण, निर्माण, उत्पादन, प्राप्त, अधिकार, भंडारण, तैनाती या उपयोग" नहीं करेंगे, जिसे बाद में उत्तर कोरिया ने तोड़ दिया।

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