अफगानिस्तान में चीनी नागरिकों के लिए एडवाइजरी, सख्ती से माने तालिबानी कानून, उनके जैसे कपड़े पहने
चीन ने कहा है कि अफगानिस्तान में रहने वाले चीन के नागरिक सख्ती के साथ वैसा करें, जैसा तालिबान ने कानून बनाया है।
काबुल/बीजिंग, अगस्त 22: तालिबान राज स्थापित होने के साथ ही अलग अलग देश अफगानिस्तान से अपने नागरिकों को निकाल रहे हैं, लेकिन चीन ने अफगानिस्तान में रहने वाले अपने नागरिकों के लिए बेहद सख्त एडवाइजरी जारी की है। चीनी भोंपू अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक ट्वीट करते हुए कहा है कि जो भी चीन के नागरिक अफगानिस्तान में रहते हैं, उनके लिए तालिबानी कानून मानना अनिवार्य है।

चीनी नागरिकों के लिए एडवाइजरी
ग्लोबल टाइम्स ने एक ट्वीट करते हुए अफगानिस्तान में रहने वाले चीनी नागरिकों के लिए सख्त हिदायत जारी की है। ट्वीट में हर चीनी नागरिकों को सावधान करते हुए कहा गया है कि 'अफगानिस्तान स्थिति चायनीज दूतावास ने अफगानिस्तान में रहने वाले चीनी नागरिकों को सख्त हिदायत देते हुए कहा है कि वो इस्लामिक रीति-रिवाज को सख्ती के साथ पालन करें, तालिबान के कहे अनुसार ड्रेस कोड का पालन करें और जैसा अफगानिस्तान के लोग खाना-पीना करते हैं, वैसा ही करें। दूतावास चीनी नागरिकों को सावधान करता है कि वो काबुल एयरपोर्ट वाले इलाके में और दूसरे भीड़-भाड़ वाले इलाके में ना जाएं'। चीन की तरफ से अपने नागरिकों के लिए जो गाइडलाइंस जारी की गई है, वैसा गाइडलाइंस अभी तक अफगानिस्तान में किसी भी देश ने जारी नहीं किया है।
तालिबान से डरा या है कोई चाल ?
चीन के इस गाइडलाइंस के बाद सवाल उठ रहे हैं कि चीन तालिबान के आक्रामक इरादों से डर गया है, या फिर ये चीन की कोई चाल है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जो चीन शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों को नमाज तक नहीं पढ़ने देता है, उस चीन ने अपने नागरिकों को इस्लामिक कानून और इस्लामिक रीति-रिवाज सख्ती के साथ मानने को क्यों कहा है? कुछ लोगों का कहना है कि जब तालिबान पहले ही आश्वासन दे चुका है कि वो किसी भी दूसरे देश के नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचाएगा, ऐसे में चीन के लिए इस्लामिक कानून को मानने वाली गाइडलाइंस क्यों जारी करनी पड़ी है? वहीं, जानकारों का मानना है कि चीन एक तरह से कट्टरपंथी तालिबान को संदेश देना चाहता है कि वो तालिबान के साथ है और तालिबान की धार्मिक आस्था का सम्मान करता है।

अफगानिस्तान में चीन की शातिर चाल
जानकारों का कहना है कि चीन ने अफगानिस्तान में रहने वाले अपने नागरिकों को इस्लामी कपड़े पहनने, इस्लामी कानून का सख्ती से पालन करने को इसलिए कहा है, ताकि वो तालिबान को वो संदेश दे सके, कि उसकी विचारधार से चीन को कोई दिक्कत नहीं है और चीन को फर्क नहीं पड़ता है कि तालिबान अपने देश में किस तरह की शासन चला रहा है। इसके साथ ही चीन ने तालिबान को यह संदेश देने की भी कोशिश की है, कि तालिबान जिस तरह का कानून अफगानिस्तान में लागू करना चाहता है, उससे चीन को कोई दिक्कत नहीं है। इसके साथ ही चीन ने दुनिया के देशों को भी एक मैसेज देने की कोशिश की है, ''जैसा देश-वैसा भेष'' बनाकर दूसरे देशों को भी रखना चाहिए। सौ बात की एक बात देखा जाए तो चीन ने तालिबान की विचारधारा का पूर्ण समर्थन कर उसे और मजबूत कर दिया है।

तालिबान की तरफ नरम चीन
चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी की मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने चीन के लोगों को कहा है कि तालिबान एक असलियत और उसे स्वीकार करने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि ''चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी को इस्लामिक चरमपंथी संगठन को मान्यता देने में हिचकिचाना नहीं चाहिए''। चीन की सरकारी मीडिया ने पिछले दिनों एक के बाद एक कई आर्टिकिल अफगानिस्तान को लेकर प्रकाशित की है, जिसमें कहा गया है कि तालिबान को मान्यता नहीं देना चीन की विदेश नीति के लिए अच्छा नहीं होगा। इसके साथ ही ग्लोबल टाइम्स में चीन के विदेश मंत्री वांग यी को तालिबान के साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़ा दिखाया गया था। वहीं, तालिबान ने भी चीन को अफगानिस्तान के पुननिर्माण में योगदान देने का न्योता दिया है, ऐसे में माना जा रहा है कि चीन जल्द ही तालिबान शासन को मान्यता दे सकता है।












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