चीन ने इस अफ्रीकी देश को कर्ज के जाल में फंसाया, एकमात्र अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हड़पने की कोशिश
नई दिल्ली, 28 नवंबर: चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की मंशा को लेकर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। पाकिस्तान में तो इसको लेकर विरोध भी होता रहा है, लेकिन इमरान सरकार ड्रैगन के सामने घुटनों के बल बैठ चुकी है। गरीब देशों को लोन के जाल में उलझाने का चीन का सबसे खतरनाक इरादा अफ्रीकी देश युगांडा में जाहिर हो रहा है। इस छोटे से देश के पास एक ही अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है और उसे भी चीन ने इस तरह से फंसाया है कि एयरपोर्ट युगांडा के हाथों से निकलने की स्थिति में आ गया है। हालांकि, फिलहाल आधिकारिक तौर पर युगांडा और चीन दोनों एयरपोर्ट पर चीन का कब्जा होने की खबरों का खंडन कर रहे हैं, लेकिन इससे ड्रैगन के शातिर दिमाग की मंशा फिर से जाहिर हो गई है।

युगांडा के एकमात्र इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रैगन का कब्जा !
अफ्रीकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक युगांडा की सरकार अपने एकमात्र अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट कर्ज ना चुका पाने की वजह से चीन के हाथों गंवाने की कगार पर पहुंच गई है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन के ऋणदाता ने जो लोन के लिए शर्तें लगा रखी हैं, उसमें कर्ज वापसी नहीं कर पाने की स्थिति में एयरपोर्ट पर कब्जे की शर्त भी लगाई गई है। युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी ने इस शर्त को बदलने की कोशिश के तहत एक प्रतिनिधिमंडल को बीजिंग भी भेजा था, लेकिन चीन ने सौदे के मूल मसौदे में किसी भी तरह के बदलाव से साफ मना कर दिया है। युगांडा की सरकार ने अपने वित्त मंत्रालय और सिविल एविएशन अथॉरिटी के जरिए 17 नवंबर, 2015 को चीन के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक (एग्जिम बैंक) से 2% पर 20 करोड़ 70 लाख अमेरिकी डॉलर का कर्ज लिया था। इसकी मैच्युरिटी की अवधि सात साल ग्रेस पीरियड मिलाकर 20 साल है। रिपोर्ट के मुताबिक डील की शर्तों के अनुसार युगांडा एक तरह से अपना प्रमुख एयरपोर्ट चीन के हाथों गंवा चुका है।(पहली तस्वीर सौजन्य: एंटेबे एयरपोर्ट डॉट कॉम)

युगांडा सरकार संसद में देश से मांग चुकी है माफी
युगांडा के सिविल एविएशन अथॉरिटी ने कहा है कि वित्तीय समझौते के कुछ प्रावधानों के अनुसार एंटेबे एयरपोर्ट के अलावा युगांडा की कुछ और संपत्तिया चाइनीज ऋणदाताओं के हाथों कब्जाई जा सकती हैं। इस बीच डेली मॉनिटर अखबार के मुताबिक युगांडा सरकार अभी भी इन कोशिशों में लगी हुई है कि एकमात्र अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा उसके हाथ से न निकल जाए। हालांकि, इस अखबार ने यह भी कहा है कि करार में यह बात भी शामिल है कि दोनों पार्टियों के बीच किसी तरह के विवाद होने पर उसका समाधान चाइना इंटरनेशनल इकोनॉमिक एंड ट्रेड आर्बिट्रेशन कमीशन करेगा। पिछले हफ्ते ही युगांडा के वित्त मंत्री मातिया कसैजा ने संसद में इस बात के लिए माफी मांगी थी कि एयरपोर्ट के विस्तार के लिए चीन के बैंक से जो '20 करोड़ 70 लाख अमेरिकी डॉलर (का लोन लिया गया उसे) ठीक से नहीं संभाला गया।'

चीन ने जहां निवेश किए, वहां हो रहे हैं विवाद
बहरहाल युगांडा के एविएशन रेगुलेटर और चीन के अफ्रीकी मामलों के डायरेक्टर जनरल ने अलग-अलग ट्वीट में चीनी ऋणदाता के एयरपोर्ट पर कब्जे की खबरों से इनकार किया है। चीन के अफ्रीकी मामलों के डीजी वू पेंग ने मीडिया की खबरों को खारिज करते हुए इसे 'इलॉजिकल प्रोपेगेंडा' बताया है। वैसे चीन के बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट को लेकर दुनिया भर में विवाद हो चुके हैं। 2019 श्रीलंका सरकार एक बंदरगाह चाइना मर्चेंट्स पोर्ट होल्डिंग्स कंपनी को 110 करोड़ डॉलर के बदले 99 साल की लीज पर देने को तैयार हो गई थी। पाकिस्तान में भी चीन इस तरह के विशाल प्रोजेक्ट को लेकर काम कर रहा है, जिसको लेकर वहां आए दिन विरोध सामने आ रहे हैं।












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