J-20: चीन बनाएगा 1000 5th जेनरेशन लड़ाकू विमान, भारत के कब पूरे होंगे अरमान, कितना पीछे इंडियन एयरफोर्स?
J-20 Fighters Jet: भारत की सीमा पर चल रहे विवाद के बीच ड्रैगन लगातार अपनी एयरफोर्स को मजबूत कर रहा है। खासकर चीन लगातार अपने लड़ाकू विमानों की संख्या में इजाफा कर रहा है, जिसका मकसद साफ है, भारत पर बढ़त हासिल करना।
भारत के पास भी स्वदेशी लड़ाकू विमानों को बनाने में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए कई प्रोजेक्ट्स हैं, ताकि चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके। ऐसी रिपोर्ट है, कि चीन ने तय किया है, कि वो साल 2035 तक 100 पांचवीं पीढ़ी के विमान जे-20 का निर्माण करेगा, लेकिन भारत के पास प्लान क्या है? आज हम इसके बारे में जानने की कोशिश करेंगे।

इंडियन डिफेंस इंडस्ट्री को फिफ्थ जेनरेशन एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) लड़ाकू विमान बनाने के लिए भारत सरकार की तरफ से मंजूरी मिल गई है, लेकिन हकीकत ये है, कि जब तक AMCA लड़ाकू विमान बनेगा और इंडियन एयरफोर्स में शामिल होगा, तब तक चीन 1000 से ज्यादा J-20 माइटी ड्रैगन, जो 5वीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, उसे सरहदों पर तैनात कर चुका होगा।
लेकिन, दिक्कत बस इतनी भर नहीं है, दिक्कत ये भी है, कि सिर्फ पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने तक की चीन रूकने वाला नहीं है, बल्कि वो 6वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की टेक्नोलॉजी बनाने की दिशा में भी वो आगे बढ़ चुका है।
J-20 माइटी ड्रैगन की ताकत कितनी है?
J-20 एक ट्विनजेट ऑल-वेदर स्टील्थ 5वीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जिसे चीन के चेंगदू एयरोस्पेस कॉरपोरेशन ऑफ द पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) ने डिजाइन किया है। जे-20 फाइटर जेट ने सबसे पहली बार 11 जनवरी 2011 को उड़ान भरी थी और आधिकारिक तौर पर इसे चीन की सेना में साल 2016 में शामिल किया गया था।
हालांकि, चीन अभी भी अपने लड़ाकू विमानों के इंजन बनाने के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन वो इंजन बनाने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन जे-20 लड़ाकू विमान बनाने के बाद चीन एशिया का पहला ऐसा देश बन गया है, जबकि AMCA को इंडियन एयरफोर्स में आने और अपनी क्षमता को पूर्ण स्तर पर लाने में कम से कम 15 सालों से ज्यादा का वक्त लगेगा। लेकिन तब तक चीन काफी बढ़त हासिल कर चुका होगा।
इंडियन एयरफोर्स के रिटायर्ड एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने यूरोटाइम्स में लिखा है, कि "भारत अभी भी अपने पांचवीं पीढ़ी के विमान, AMCA लड़ाकू विमान की टेक्नोलॉजी विकसित कर रहा है। भारत अभी भी एयरो-इंजन, एईएसए रडार, ईडब्ल्यू सिस्टम, आधुनिक हथियार, एक्शनेबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अन्य एडवांस एवियोनिक्स की टेक्नोलॉजी विकसित करने के लिए काम कर रहा है।"
लिहाजा भारत के डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है, कि भारत को AMCA लड़ाकू विमान बनाने में तेजी लाने की जरूरत है।

AMCA प्रोजेक्ट के लिए बजट कितनी है?
सुरक्षा मामलों पर भारत की कैबिनेट समिति (CCS) ने मार्च 2024 में AMCA के डिजाइन और डेवलपमेंट के लिए 15,000 करोड़ रुपये यानि करीब 1.9 अरब डॉलर का फंड मंजूर किया है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के अधीन एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA), इस विमान के विकास के लिए नोडल एजेंसी होगी। वहीं, इस फाइटर जेट का निर्माण, सरकारी स्वामित्व वाली हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) करने वाला है।
इंडियन एयरफोर्स ने HAL को पहले ही LCA Mk1A तेजस फाइटर जेट बनाने का ऑर्डर दे रखा है और इंडियन एयरफोर्स की डिमांड पूरा करने के लिए HAL पहले से ही अपनी क्षमता का विकास करने पर काम कर रहा है। और एक बार ये डिमांड पूरी होने के बाद LCA MK 2 का निर्माण शुरू होगा और फिर AMCA प्रोजेक्ट का नंबर आएगा।
हालांकि, ADA ने दावा किया है, कि जब AMCA विमान बनेगा, तो उसका वजन 25 टन होगा और वो डबल इंजन फाइटर जेट होगा और दावा किया गया है, कि जब ये विमान बनकर तैयार होगा, तो ये दुनिया के ज्यादातर पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों से बेहतर होगा।

एयर मार्शल चोपड़ा ने कहा है, कि "पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने के लिए जो टेक्नोलॉजी चाहिए, भारत उनका विकास अकेले नहीं कर सकता है, लिहाजा इस प्रोजेक्ट पर भारत के लिए अकेले बढ़ना व्यावहारिक विकल्प नहीं होगा। लेकिन, उस वक्त तक भारत को LCA Mk1A और LCA MK 2 के डेवलपमेंट की तरफ ध्यान देना चाहिए।"
उन्होंने कहा, कि "भारत के पास इस प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ने के लिए कुछ सहयोगी मिल सकते हैं। लेकिन, क्या भारत को जीसीएपी या फ्रांस के नेतृत्व वाले एफसीएएस कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए? ये फैसला लेना मुश्किल है। सहयोग का मतलब ये होगा, कि इस फाइटर जेट की लागत में और प्रोजेक्ट में जो जोखिम होंगे, उसे भी शेयर करना होगा।"
भारत ने नेक्स्ट जेनरेशन फाइटर जेट बनाने की तलाश करीब 15 साल पहले शुरू हुई थी, जब उसने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान (FGFA) को विकसित करने के लिए रूस के साथ हाथ मिलाया था। लेकिन, रूस के साथ कई मुद्दों पर मतभेद होने के बाद भारत इस प्रोजेक्ट से बाहर निकल गया।
DRDO के जो प्रोजेक्ट होते हैं, वो अकसर समयसीमा को चूक कर जाते हैं, जिसके लिए उनकी आलोचना भी की जाती है। AMCA प्रोजेक्ट के डायरेक्टर डॉ. ए.के. घोष ने डेफएक्सपो-2022 के दौरान कहा था, कि "एक बार प्रोजेक्ट की मंजूरी मिल जाने के बाद, प्रोटोटाइप के निर्माण में कम से कम 3 सालों का वक्त लगता है और फिर पहले विमान के निर्माण में डेढ़ साल का वक्त और लग जाता है।"
यानि, AMCA प्रोजेक्ट के निर्माण में अभी भी कम से कम 15 सालों का वक्त लगेगा और इस वक्त तक चीन अपनी क्षमता का विकास करता रहेगा। लेकिन, उस वक्त तक अपनी क्षमता को बढ़ाने के लिए भारत को किसी और विकल्प की तरफ ध्यान देना चाहिए।
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