J-35: चीन ने एयरक्राफ्ट कैरियर पर उड़ाया स्टील्थ फाइटर जेट, हिंद महासागर में एंट्री की आशंका, भारत को टेंशन!
J-35 Fighter Jet: चीन ने नेक्स्ट जेनरेशन एयरक्राफ्ट कैरियर पर उड़ाने के लिए डिजाइन किए गये स्टील्थ लड़ाकू विमान J-35 ने सीएनएस लियाओनिंग (CNS Liaoning) पर टेस्ट ऑपरेशन शुरू कर दिया है। जिसको लेकर भारतीय डिफेंस एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है, कि इसकी संभावित तैनाती भारत की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा पैदा करेगी।
18 सितंबर को चीनी राज्य मीडिया ने एयरक्राफ्ट कैरियर लियाओनिंग से जे-35 की सफल लैंडिंग और टेकऑफ की घोषणा की है, जिसने चीन को अपने एयरक्राफ्ट कैरियर पर फिफ्थ जेनरेशन लड़ाकू विमानों का संचालन करने वाला देश बना दिया है। पिछले हफ्ते चाइना सेंट्रल टेलीविज़न (CCTV) की रिपोर्ट में जारी फुटेज में सीएनएस लियाओनिंग पर प्रमुख परीक्षणों की सूचना दी गई थी, हालांकि वीडियो में जे-35 को उड़ान भरते या उतरते नहीं दिखाया गया था।

चीन की हवाई ताकत में खतरनाक इजाफा
सीएनएस लियाओनिंग एयरक्राफ्ट कैरियर पर जे-35 पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान का परीक्षण संचालन शुरू करना चीन की नौसेना की हवाई ताकत को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
FC-31 स्टील्थ फाइटर का नेवी वेरिएंट जे-35 का लक्ष्य चीन के अभी तक के एकमात्र ऑपरेशनल एयरक्राफ्ट कैरियर-आधारित फाइटर जेट जे-15 के अलावा एक और ऑप्शन तैयार करना है। हल्के वजन पर केंद्रित डिजाइन के साथ, J-35 से बेहतर चपलता, एक्सटेंडेट ऑपरेशनल सीमा और ज्यादा पेलोड लेकर उड़ान भरने की क्षमता की पेशकश करने की उम्मीद है।
ज्यादा सोफिस्टिकेडेट विमानों में यह परिवर्तन चीन की अपनी नौसेना को आधुनिक बनाने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को बढ़ाने की रणनीति का खुलासा करता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा के व्यापक संदर्भ में, J-35 के कामयाब टेस्टिंग ने कई आशंकाओं को जन्म दिया है, खासकर भारतीय डिफेंस सेक्टर के लिए इसने खतरे की घंटी बजा दी है। भारतीय डिफेंस एक्सपर्ट विजयेंद्र के ठाकुर ने J-35 के ऑपरेशनल पावर हासिल करने के बाद चिंता जताई है, और इसे "सर्वदिशात्मक गुप्त खतरा" करार दिया है, जो संभावित रूप से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती दे सकता है।
ठाकुर का विश्लेषण लिओनिंग के स्की-जंप रैंप लॉन्च सिस्टम की तरफ इशारा करता है, जो J-35 के लिए एक लाभप्रद शक्ति-से-भार अनुपात का सुझाव देता है जो चीन की नौसैनिक विमानन क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकता है, खासकर अगर विमान को लिओनिंग और शेडोंग, दोनों एयरक्राफ्ट कैरियर से तैनात किया जाए।
इसके अलावा, ठाकुर भारत के लिए रणनीतिक प्रभावों का भी जिक्र करते हैं, जिसमें पाकिस्तान की तरफ से J-35 के भूमि-आधारित वेरिएंट को तैनात करने की संभावना शामिल है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा सेटिंग की जटिलता बढ़ जाती है। जिसकी वजह से वो भारत के लिए अपनी रक्षा पहलों में तेजी लाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर देते हैं, खासकर लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) एमके-1ए के घरेलू उत्पादन को तत्काल बढ़ाने की बात वो कर रहे हैं।

पाकिस्तान भी कर रहा है अपनी ताकत में इजाफा
पाकिस्तान ने चीनी पांचवीं पीढ़ी के FC-31 गिरफाल्कन स्टील्थ लड़ाकू विमानों का अधिग्रहण किया है, जिसने भारत के लिए रणनीतिक चिंताओं को बढ़ा दिया है, जो अपनी स्टील्थ विमान क्षमताओं को विकसित करने में अभी तक काफी धीमा रहा है। जबकि भारत अपने नौसैनिक विमानन को एडवांस करने के लिए राफेल मरीन (Rafale-M) लड़ाकू विमानों के अधिग्रहण के लिए फ्रांस के साथ बातचीत कर रहा है, लेकिन सौदे को सील करने में देरी भारत के तेजी से आधुनिकीकरण प्रयासों में बाधा बन रही है।
भारत की वायु सेना पुराने विमानों को धीरे धीरे रिटायर करने और नए विमानों को हासिल करने की धीमी गति से काफी परेशान रही है, लेकिन चीन को लेकर रिपोर्ट है, कि वो लगातार J-20 फाइटर जेट का निर्माण कर रहा है और उसकी कोशिश एक हजार जे-20 लड़ाकू विमानों के निर्माण की है। चीन पहले ही 200 जे-20 फाइटर जेट को अपने बेड़े में शामिल कर चुका है, जिससे इंडो-पैसिफिक में भारत की सुरक्षा गंभीर तौर पर प्रभावित होती है।
लिहाजा, चीन की नौसेना में जे-35 स्टील्थ फाइटर जेट की शुरूआत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के भीतर सैन्य क्षमताओं के संतुलन में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है। यह भारत और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के लिए उभरते खतरों के बीच एक स्थिर सुरक्षा वातावरण बनाए रखने के लिए अपनी रक्षा रणनीतियों पर फिर से ध्यान देने और उसमें तेजी लाने की जरूरत को दर्शाता है।












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