Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

धोती पहनकर श्रीलंका के तमिल मंदिर में चीनी राजदूत की पूजा-अर्चना, ये शी जिनपिंग की कौन सी चाल है?

श्रीलंका का जाफना प्रांत देश के उत्तरी हिस्से में स्थिति है और तमिल बहुल इलाका होने की वजह से ये पूरा क्षेत्र भारत के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है। यहां श्रीलंकन सेना और तमिल टाइगर्स के बीच भारी लड़ाई हो चुकी है।

जाफना, दिसंबर 18: वैसे तो कम्युनिस्ट पार्टी के संविधान में धर्म को अफीम बताया गया है और चीन में धर्म को मानने का मतलब वामपंथियों के सीधे निशाने पर आना होता है, लेकिन श्रीलंका में चीन के राजदूत हिंदू बन गये और सफेद धोती पहनकर मंदिर में पूजा करने पहुंच गये। चीनी राजदूत ने धोती पहना है और मंदिर में बकायदा हिंदू रीति-रिवाज के साथ पूजा की है, ये निश्चित तौर पर चीन का 'धर्म परिवर्तन' नहीं है, बल्कि एक्सपर्ट्स इसके पीछे शी जिनपिंग की बहुत बड़ी चाल की बात कह रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि, जाफना प्रांत में स्थानीय तमिलों से रिश्ते को लेकर जहां भारत आराम की मुद्रा में है, वहीं चीन काफी तेजी से काम कर रहा है।

तमिल मंदिर में पूजा अर्चना

तमिल मंदिर में पूजा अर्चना

अपनी शर्ट उतारकर और पारंपरिक सफेद वेशती (एक तरह की धोती) पहनकर, नंगे छाती वाले एक पुरूष का, हाथों में फल और पूजा के प्रसाद की थाली लेकर मंदिर में प्रवेश करना, कुछ भी नया और असमान्य नहीं है, क्योंकि श्रीलंका के जाफना के पास नल्लूर कंदस्वामी कोविल मंदिर में यह प्रथा सैकड़ों सालों से चली आ रही है। लेकिन जिस व्यक्ति ने भक्त के रूप में कपड़ा पहना है और जो शख्स हाथों में पूजा की थाल लेकर मंदिर जा रहा है, उसे देखकर हर कोई चौंक रहा था। ये शख्स श्रीलंका में चीन के राजदूत क्यूई जेनहोंग हैं, जो मंदिर में पूजा करने के लिए पहुंचे हैं। चीनी दूतावास ने अपने राजदूत के हिंदू मंदिर में पूजा अर्चना की ये तस्वीर जैसे ही ट्वीट की, सभी के कान खड़े हो गये, कि भला अब शी जिनपिंग कौन सी नई चाल चल रहे हैं?

जाफना को लेकर चीन की नई चाल?

जाफना को लेकर चीन की नई चाल?

कुछ दिन पहले पहले ही चीन की तरफ से ट्वीटर पर कहा गया कि, चीन की सोलर कंपनी को मालदीव में एक नया ग्राहक मिला है, उसके बाद इस बात की संभावना है कि, चीन के राजदूत सुरक्षा चिंताओं को तलाशने के लिए श्रीलंका के उस तमिल बहुल क्षेत्र का दौरा किया है, जो शुरू से ही अशांत रहा है और जहां एक वक्त भारी लड़ाई लड़ी गई है। श्रीलंका के उत्तर में स्थिति जाफना प्रांत तमिल बहुल इलाका है, जो अभी चीन को लुभा रहा है, क्योंकि चीन इस द्वीप पर सोलर पॉवर प्लांट खोलना चाहता है, जो परंपरागत रूप से भारत के पक्ष में रहा है। श्रीलंका में चीनी राजदूत ने जाफना प्रांत का दौरा उस 'जातीय युद्ध' की समाप्ति के 12 सालों के बाद किया है, जिनकी अभी भी श्रीलंका की मुख्य सिंहली आबादी के साथ 'खराब' रिश्ता है, वहीं दूसरी तरफ श्रीलंका और चीन भी जहरीले जैविक उर्वरक की आपूर्ति के बाद खराब संबंधों से गुजर रहे हैं।

मछुआरों को दिए मछली पकड़ने वाले मशीन

मछुआरों को दिए मछली पकड़ने वाले मशीन

चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया ट्वीटर पर कहा कि, राजदूत झेनहोंग ने धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का सम्मान करते हुए मंदिर का दौरा किया था। उन्होंने मंदिर के लिए दान भी दिया है। इसके साथ ही चीनी राजदूत ने सजाफना पब्लिक लाइब्रेरी को किताबें दान कीं हैं और उत्तरी प्रांत के गवर्नर जीवन त्यागराज से मुलाकात कर आपसी सहयोग को बढ़ाने और तमिल समुदाय की आय बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की है। चीनी अधिकारियों ने जाफना और मन्नार में मछुआरों को फिशिंग टैकल और फेस मास्क भेंट किए हैं।

भारत के साथ रिश्ते पर बात

भारत के साथ रिश्ते पर बात

जाफना में स्थानीय सिविल सोसाइटी के लोगों ने चीनी राजदूत से श्रीलंका में भारत और चीन की प्रतिद्वंदिता को लेकर सवाल पूछा, जिसपर जवाब देते हुए राजदूत क्यूई ने कहा कि, भारत और श्रीलंका के मुकाबले भारत और चीन की भौगोलिक दूरी काफी करीब है और भारत और चीन सीमा को साझा करते हैं। वहीं, चीनी राजदूत ने भारत के साथ चीन की प्रतिद्वंदिता को खारिज कर दिया और कहा कि, दोनों देश अपनी समस्याओं को सुलझाने में लगातार लगे हुए हैं। उन्होंने यहां तक ​​कहा कि, जाफना से तीन द्वीपों पर सौर फार्म को रद्द करने के लिए श्रीलंका पर "तीसरे पक्ष" के दबाव की बात "फर्जी खबर" थी। हालांकि, ये पहली बार नहीं है, जब किसी चीनी डिप्लोमेट ने जाफना प्रांत का दौरा किया हो, लेकिन हां, ये पहली बार ही है, जब चीनी डिप्लोमेट जाफना में रात भर रूका हो और स्थानीय लोगों के साथ कूटनीतिक रिश्ता बनाने की कोशिश की हो।

भारत के लिए कितना है महत्वपूर्ण?

भारत के लिए कितना है महत्वपूर्ण?

श्रीलंका का जाफना प्रांत देश के उत्तरी हिस्से में स्थिति है और तमिल बहुल इलाका होने की वजह से ये पूरा क्षेत्र भारत के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है। लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम यानी लिट्टे ने श्रीलंका से अलग देश की मांग को लेकर यहां कई सालों तक हिंसक आंदोलन चलाया था, जिसे शांत करने के लिए भारत की तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने इंडियन आर्मी को जाफना भेजा था और उसी का बदला लेने के लिए लिट्टे ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या तक करवा दी थी। वहीं, श्रीलंका के सिंहली बहुल इलाके में चीन ने काफी मजबूत पैठ बना ली है, लेकिन तमिल बहुल इलाके में चीन अब तक अपने इरादे में कामयाब नहीं हो पाया है। हाल ही में भारत ने चीन की कंपनी की इस क्षेत्र में हाइब्रिड पावर प्लांट लगाने की योजना को ठप कर दिया था, और इलके पीछे भारत का स्थानीय तमिल लोगों के बीच अच्छी पकड़ है, जिसमें चीन घुसपैठ करना चाहता है।

भारत के लिए क्यों है चिंता की बात?

भारत के लिए क्यों है चिंता की बात?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि, इतिहास, भाषा और संस्कृति की वजह से भारत जाफना के तमिल इलाकों में अपनी कूटनीति को काफी हल्के में ले रहा है, जबकि चीन काफी सीरियस होकर आगे कदम बढ़ा रहा है। वहीं, जानकारों का मानना है कि चीन इस इलाके में घुसपैठ कर भारत के हितों को गहरा नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा जाफना प्रांत अपनी इलाकाई पहचान को लेकर भी काफी संवेदनशील रहा है। अगर चीन इस इलाके में अपनी जगह बनाता है तो वह भारत की समुद्री सीमा के काफी करीब पहुंच जाएगा। दक्षिण एशिया में पैठ बनाने के लिए चीन लंबे समय से अलग अलग रणनीति अपनाता रहा है और चीन और पाकिस्तान की दोस्ती जगजाहिर भी है। अब उसकी नजर भारत के अन्य पड़ोसी देशों श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार पर भी है।

भारत के साथ झगड़ा भड़काना है मकसद?

भारत के साथ झगड़ा भड़काना है मकसद?

जाफना प्रांत में लोगों की मुख्य आजीविका मछली पकड़ना है और दुर्लभ समुद्री संसाधनों के लिए तमिलनाडु के मछुआरों के साथ उनकी प्रतिद्वंद्विता का समाधान अब तक नहीं निकला है। बुधवार को चीनी दूत के आउटरीच में फिशरमेन को-ऑपरेटिव सोसाइटी यूनियन फेडरेशन के सदस्यों को मछली पकड़ने के जाल और एक लाख डॉलर की मदद देने का मतलब क्या स्थानीय तमिल मछुआरों और भारत के तमिलनाडु के मछुआरों के बीच 'लड़ाई' को और भड़काना है। श्रीलंका के मत्स्य पालन और जलीय संसाधन मंत्री डगलस देवानंद, जो जाफना के एक संसदीय सीट से सांसद भी हैं, वो भी चायनीज राजदूत के साथ इस यात्रा के दौरान साथ थे। वहीं, इस दौरे को लेकर जापना से संसद सदस्य और पूर्व 'आतंकवादी संगटन' पीएलओटीई के नेता धर्मलिंगम सिथानन ने कहा कि, 'अब तक तमिल लोगों का चीनियों के साथ ज्यादा संबंध नहीं रहा है। यह यात्रा तमिलों के साथ संबंध सुधारने के लिए हो सकती है''।

तमिल को मित्र बनाने की चीन की साजिश

तमिल को मित्र बनाने की चीन की साजिश

हाल के महीनों में, जाफना प्रांत में रहने वाले तमिलों ने श्रीलंका में साइनेज पर सवाल उठाया है जिसमें मंदारिन शामिल है, लेकिन तमिल को छोड़ दिया है, भले ही इसे आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि, चीन श्रीलंका के इस कानून में संशोधन चाहता है, ताकि वो तमिलों को संदेश दे सके, कि चीन को वो एक दोस्त माने और चीन उनकी भलाई चाहता है। वहीं, कुछ लोग इस यात्रा को श्रीलंकाई नेतृत्व के लिए एक संकेत के रूप में भी देखते हैं, जब कोलंबो द्वारा एक जैविक उर्वरक के आयात को रद्द करने के बाद संबंधों में गिरावट आई है, जो स्थानीय परीक्षण में पास नहीं हुआ था। प्रतिशोध में चीन ने श्रीलंका सरकार की बैंक को ही ब्लैकलिस्ट कर दिया है, जिसे चीनी दूतावास ने एक ट्वीट में "शातिर" बताया। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि लेटर ऑफ क्रेडिट में चूक से चीनी कंपनियों को भारी नुकसान हुआ है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+