कंबोडिया में चीन का नेवल बेस बनकर तैयार, अंडमान से सिर्फ 1200 किलोमीटर दूर पहुंचा ड्रैगन, कितना बड़ा खतरा?
China Military Base In Cambodia: पूरी आशंका है, कि चीन ने शायद अपनी दूसरी विदेशी सैन्य सुविधा रीम नेवल बेस का विस्तार कर लिया है और चीन का ये नेवल बेस, कंबोडिया में बनकर करीब करीब तैयार हो गया है। कंबोडिया में चीन ने जिस नेवल बेस घाट का निर्माण किया है, वहां चीन अपने एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती कर सकता है और अपनी शक्ति का परीक्षण कर सकता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है, कि मलक्का स्ट्रेट, जो चीन के लिए किसी बुरे सपने की तरह है, कंबोडिया में नेवल बेस बनाकर चीन मलक्का नाम के समस्या से पीछा छुड़ाना चाहता है। आपको बता दें, कि प्रशांत महासागर और हिंद महासागर के बीच के जल-मार्ग में स्थित होने के मलक्का स्ट्रेट का काफी महत्व है और इस क्षेत्र को काफी हद तक भारत नियंत्रित करता है।

कंबोडिया में चीन का नेवल बेस तैयार
निक्केई एशिया की रिपोर्ट में बताया गया है, कि चीन ने कंबोडिया में एक नौसैनिक अड्डा बनाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है और वह एक घाट पूरा करने के करीब पहुंच गया है, जहां एक विमानवाहक पोत खड़ा किया जा सकता है।
उस रिपोर्ट में कहा गया है, कि कंबोडिया के रीम नेवल बेस पर निर्माण की निगरानी करने वाली अमेरिकी वाणिज्यिक इमेजरी कंपनी ब्लैकस्काई द्वारा ली गई सैटेलाइट तस्वीरों से लगभग पूरा घाट दिखाई दे रहा है, और इस घाट की जो डिजाइन है, वो चीन के एक और विदेशी धरती पर बने नेवस बेस, जिबूती बेस में चीनी डिजाइन से काफी मिलती जुलती है।
इसी साल अप्रैल में, एशिया टाइम्स ने चीन द्वारा रीम नेवल बेस के पास एक एयर डिफेंस सेंटर और विस्तारित रडार प्रणाली के निर्माण की रिपोर्ट दी थी। कंबोडियाई प्रधान मंत्री हुन सेन ने सितंबर 2022 में इस प्रोजेक्ट के लिए 157 हेक्टेयर भूमि आवंटित की थी, और अतिरिक्त 30 हेक्टेयर नौसेना रडार प्रणाली के लिए निर्धारित की गई थी।
आपको बता दें, कि कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन, चीन के पिट्ठू हैं, जो तानाशाही तरीके से पिछले 40 सालों से देश के प्रधानमंत्री बने हैं और पिछले रविवार को कंबोडिया में चुनाव हुए हैं, जिसके बाद प्रधानमंत्री हुन सेन ने अपने बेटे को अगवा प्रधानमंत्री बनाने का ऐलान किया है।
हालांकि, कंबोडियन रत्रा मंत्रालय ने रीम नेवस बेस में चीनी निवेश, चीनी फंडिंग या फिर चीनी समर्थन से इनकार किया, लेकिन कंबोडिया के इस झूठ के बारे में हर कोई इसलिए जानता है, क्योंकि देश के पास इतना पैसा ही नहीं है, कि वो नेवल बेस का निर्माण कर सके।
आपको बता दें, कि रीम नेवल बेस को अमेरिका ने तैयार किया था, लेकिन साल 2019 में चीन ने इसे कर्ज के बदले चीन को सौंप दिया था, और यहां से चीन का मकसद दक्षिण चीन सागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर नजर रखना है।

भारत के लिए कितना बड़ा खतरा
रीम नेवल बेस, बंगाल की खाड़ी में मौजूद भारत के अंडमान-निकोबार सैन्य अड्डे से सिर्फ 1200 किलोमीटर की दूरी पर है और रीम नेवल बेस को विकसित कर, चीन बंगाल की खाड़ी में भारत के लिए मुसीबत पैदा करना चाहता है। वही, रीम नेवल बेस के पूरी तरह से विकसित होने का मतलब है, कि चीन हिन्द महासागर में भी सर्विलांस कर पाएगा, जिससे भारत की सुरक्षा को खतरा पैदा होगा।
निक्केई की नई रिपोर्ट में कहा गया है, कि रीम पियर निर्माण के पहले संकेत जुलाई 2022 में सामने आए थे, जिसमें चीन ने तेजी से प्रगति की थी। सूत्र का कहना है, कि रीम और जिबूती दोनों घाटों का 335 मीटर का खंड एक विमान वाहक पोत को खड़ा करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
निक्केई का कहना है, कि टकराव की स्थिति में, अमेरिका दक्षिण चीन सागर में चीनी सैन्य सुविधाओं पर बमबारी कर सकता है, लेकिन रीम पर हमला करने का मतलब, कंबोडिया पर बमबारी करना होगा। इसके बावजूद, सूत्र ने अमेरिका में चीनी दूतावास के एक अधिकारी का हवाला देते हुए कहा, कि कंबोडिया का संविधान अपने क्षेत्र में विदेशी सैन्य अड्डों पर प्रतिबंध लगाता है, और रीम नेवल बेस में निर्माण, कंबोडिया की क्षमता को मजबूत करता है।

म्यांमार में भी एक्टिव है चीन
म्यांमार में भी चीन, इसी तरह की परियोजनाओं के पीछे है, जिससे उसे लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक उलझन को दूर करने के लिए, अंडमान सागर में पैर जमाने में मदद मिल पाएगी।
फिलहाल, मलक्का स्ट्रेट चीन के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती है और युद्ध की स्थिति में अमेरिका या भारत, मलक्का को ब्लॉक कर, चीन को घुटनों पर ला सकता है, क्योंकि इससे चीन में होने वाली सामानों की आपूर्ति बंद हो जाएगी, लिहाजा चीन मलक्का का विकप्ल छान रहा है।
अप्रैल में, एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट में म्यांमार के ग्रेट कोको द्वीप पर नए सिरे से निर्माण गतिविधियों पर रिपोर्ट दी गई थी और दावा किया गया था, कि भारत की नाक के नीचे, कोको आइलैंड पर म्यांमार की मर्जी से चीन, एक नेवल बेस का निर्माण कर रहा है।
सैटेलाइट तस्वीरों में कुकु आइलैंड पर 2300 मीटर का एक नया रनवे देखा गया है, जिसमें लगाकार गतिविधियां होती दिखाई दे रही हैं।
अंडमान में घुसने की कोशिश करता चीन
2014 के बाद से, अंडमान सागर में चीनी सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) फैसिलिटीज की रिपोर्टें आई हैं, जिनमें मनौंग, हिंग्गी, ज़ेडेटकी और कोको द्वीप समूह शामिल हैं, जबकि चीनी तकनीशियनों ने यांगून, मौलमीन और मेरगुई के पास रडार स्टेशनों और नौसैनिक अड्डों पर काम किया है।
कंबोडिया के रीम नेवल बेस से, चीन मलक्का स्ट्रेट चोकपॉइंट में अमेरिकी नौसैनिक उपस्थिति का मुकाबला कर सकता है, वहीं थाईलैंड की खाड़ी में अपने उभरते हितों को सुरक्षित कर सकता है, और दक्षिण चीन सागर में एक दक्षिणी किनारा स्थापित कर सकता है।
इसके विपरीत, कंबोडिया अपने बड़े और सैन्य रूप से मजबूत पड़ोसियों, थाईलैंड और वियतनाम के खिलाफ आर्थिक जीवन रेखा और संभावित सुरक्षा बीमा के रूप में चीन पर निर्भर करता है।
इसके अलावा, म्यांमार के ग्रेट कोको द्वीप पर चीन की SIGINT सुविधा चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारे (CMEC) के समुद्री टर्मिनस, क्यौकप्यू पोर्ट के लिए एक आगे की रक्षात्मक स्थिति के रूप में काम कर सकती है, जो चीन के युन्नान प्रांत के दक्षिण में समाप्त होती है।
इससे चीन को भारतीय नौसेना के खिलाफ फायदा भी मिल सकता है, क्योंकि म्यांमार, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से भारतीय अभियानों की निगरानी के लिए ग्रेट कोको द्वीप से निगरानी उड़ानें संचालित कर सकता है। हालांकि, भारत भी चीन को काउंटर करने की तैयारी कर रहा है होगा, भले ही उसकी जानकारी फिलहाल हमारे पास नहीं सकती है।
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