चीन ने ऑस्ट्रेलिया के राजदूत को तलब कर फटकारा, क्या इस टकराव का फायदा उठा पाएगा भारत?
बीजिंग। बीते कुछ समय में वैश्विक स्तर पर दो खास देशों की मित्रता में दूरी आई है। ये दो देश हैं चीन और ऑस्ट्रेलिया हैं। गौरतलब है कि चीन के वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट को भी ऑस्ट्रेलिया ने ज्यादा तरजीह नहीं दी थी। इन सब के बीच चीन ने कथित तौर पर ऑस्ट्रेलियाई राजदूत को तलब किया है। इससे पहले 2016 के बाद से बीजिंग में ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि, पूर्व व्यापारी अधिकारी जॉन एडम्स को विदेशी हस्तक्षेप से निपटने के लिए डिजाइन किए गए नए कानूनों की शुरूआत के बाद शुक्रवार को विदेश मंत्रालय में बुलाया गया था। शनिवार को ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल ने भी कहा था कि यह वो समय है जब ऑस्ट्रेलियाई लोगों को ऐसे अनुचित हस्तक्षेप के खिलाफ खड़ा होना चाहिए। एक ऑस्ट्रेलियाई अखबार के अनुसार ऑस्ट्रेलिया में चीन के राजदूत चेंग जिंगये ने सोमवार को ऑस्ट्रेलियाई विदेशी मामलों और व्यापार के कार्यवाहक सचिव, पेनी विलियम्स के समक्ष विरोध दर्ज कराया। जिसके बाद कम्युनिस्ट पार्टी के अखबार ने एक जोरदार शब्दों में, चीनी दखल के आरोप को 'शर्मनाक' और 'बेतुका' बताया। चीन के ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि- चीन पश्चिम मूल्यों और विचारधाराओं के भारी दबाव में तब आया जब उसने 40 साल पहले सुधार की राहें खोली लेकिन इसकी जांच कभी नहीं कराई की यहां विदेशियों के रूप में संभावित जासूस भी हो सकते हैं।

चीन ने दिया था इनाम का लालच
अप्रैल में बीजिंग के अधिकारियों ने नागरिकों के लिए 500,000 युआन (लगभग 56,000 डॉलर या ऑस्ट्रेलियई डॉलर में 100,000) के नकद पुरस्कार की पेशकश की, जो विदेशी जासूसों को उजागर करने में मदद कर सकते हैं। जो चीन की राजनीतिक व्यवस्था को अस्थिर करने का प्रयास करते हैं। पिछले साल अधिकारियों ने विदेशी पुरुषों के साथ "खतरनाक प्रेम" में ना पड़ने के लिए चीनी महिलाओं को चेतावनी देने के लिए पोस्टर अभियान का इस्तेमाल किया था।

यह भी है संभावित वजह
हालांकि चीन की ओर से ऑस्ट्रिेलिया के राजदूत को इस तरह से तलब करने के पीछे एक और संभावित वजह बताई जा रही है। वो वजह है बीते दिनों जापान-ऑस्ट्रेलिया-भारत की बैठक। इतना ही नहीं बीते दिनों ऑस्ट्रेलिया की ओर से विदेश नीति पर 14 साल में पहला श्वेत पत्र जारी किया गा था जिसमें यह स्पष्ट था कि उसकी भारत से करीबी बढ़ी और चीन से कम हुई है।

भारत, अमेरिका,जापान और ऑस्ट्रेलिया
इतना ही नहीं श्वेत पत्र में यह भी सामने आया था कि चीन के मुकाबले भारत, अमेरिका,जापान के साथ ऑस्ट्रेलिया भी होगा। बता दें कि भारत ने बुधवार को जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ त्रिकोणीय मीटिंग का चौथा संस्करण आयोजित किया, जो विदेश नीति की दृष्टिकोण में सामरिक स्वायत्तता का प्रदर्शन और स्वतंत्र और खुले हिन्द-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक समान स्थिति को मजबूत करने के लिए था।

पीओके में एकतरफा OBOR
भारत-ऑस्ट्रेलिा-जापान की त्रिपक्षीय बैठक के अलावा में दिल्ली-टोकियो-कैनबरा और अमेरिका के बीच उभरती साझेदारी चीन के वन बेल्ट वन रोड (बीआरआई) पहल की पृष्ठभूमि में है, जो उसकी दृष्टिकोण (पीओके में संप्रभुता का उल्लंघन सहित) में एकतरफा है।

ये भी कारक है जिम्मेदार
भारत की सुरक्षा के लिए मद्देनजर, दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में बीजिंग की एकतरफा कार्रवाई और हिंद महासागर क्षेत्र में फिलीपींस और उसके सैन्य एजेंडे के मामले में UNCLOS फैसले की उपेक्षा को भी जिम्मेदार माना जा रहा है।












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