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भारत के मिसाइल टेस्ट से पहले चीन ने फिर भेजा जासूसी जहाज, हिंद महासागर में ड्रैगन बना सिरदर्द

पिछले 6 महीने में ये तीसरी बार है, जब चीन ने अपने जासूसी जहाज को हिंद महासागर में भेजा है। नवंबर में चीनी जासूसी जहाज की वजह से भारत को अग्नि-3 मिसाइल की लांचिंग टालनी पड़ी थी।
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Chinese Ship in Indian Ocean: हिंद महासागर में चीन अब लगातार भारत के लिए खतरा बनता जा रहा है और बार बार भारत की जासूसी करने के लिए पहुंच रहा है। पिछले महीने भी चीनी जासूसी जहाज की वजह से भारत को अपना मिसाइल लॉन्च टालना पड़ा था और एक बार फिर जब भारत बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च करने वाला है, तो रिपोर्ट आ रही है, कि एक बार फिर से हिंद महासागर में चीन का जासूसी जहाज पहुंच गया है।

भारत की जासूसी करता चीनी जहाज

भारत की जासूसी करता चीनी जहाज

नॉर्वेजियन कंपनी मैरीटाइम ऑप्टिमा ने हिंद महासाहर में चीनी जहाज की गतिविधियों को लेकर जो डेटा जमा किए हैं, उसमें बताया गया है कि, चीन का रिसर्च जहाज युआन वांग-5 सोमवार को एक बार फिर से हिंद महासागर में पहुंच गया है। मैरीटाइम ऑप्टिमा ने जिस वक्त चीनी जहाज की गतिविधियों को दर्ज किया था, उस वक्त चीनी जासूसी जहाज युआन वांग-5 इंडोनेशिया में जावा द्वीप के तट से हिंद महासागर में दक्षिण की तरफ बढ़ रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का जासूसी जहाज उस वक्त हिंद महासागर में फिर से दाखिल हुआ है, जब भारत ने मिसाइल परीक्षण को लेकर अलर्ट जारी किया है। भारत ने अंडमान और निकोबार क्षेत्र में मिसाइल परीक्षण के लिए NOTAM (नोटिस टू एयरमेन / नोटिस टू एयर मिशन) जारी किया है और भारत के नोटम जारी करने के ठीक एक हफ्ते बाद चीन ने अपने रिसर्च जहाज को हिंद महासागर में भेज दिया है। बताया जा रहा है, कि चीनी जहाज कहीं और जा रहा था और भारत के नोटम जारी करने के फौरन बाद चीनी जहाज ने अपनी दिशा बदलकर हिंद महासागर की तरफ कर दी।

हिंद महासागर में चीन बना सिरदर्द

हिंद महासागर में चीन बना सिरदर्द

इससे पहले भारत नवंबर महीने के पहले हफ्ते में भी बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण की योजना बना रहा था और उस वक्त चीन ने अपने दूसरे जासूसी जहाज युआन वांग-6 को हिंद महासागर में भेज दिया था, जिसकी वजह से भारत को मिसाइल परीक्षण टालने के लिए मजबूर होना पड़ा था। वहीं, ओपन सोर्स जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस एनालिस्ट डेमियन साइमन ने 2 दिसंबर को अनुमान लगाते हुए ट्वीट किया था, कि, हिंद महासागर में एक बार फिर से चीन का जासूसी जहाज आने वाला है और उसकी भविष्यवाणी सच साबित हुई है। युआन वांग 6 से 11 नवंबर के बीच होने वाले मिसाइल टेस्ट से पहले हिंद महासागर क्षेत्र में प्रवेश किया था, जिसके लिए भारत ने नोटम जारी किया था। उस नोटम के तहत भारत बंगाल की खाड़ी के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र को नो-फ्लाई जोन के रूप में चिह्नित किया था। साइमन के मुताबिक, भारत ने चीनी पोत की उपस्थिति के कारण 7 नवंबर को अपने पिछले NOTAM को रद्द कर दिया था, और 23-24 नवंबर की लॉन्च विंडो के साथ बंगाल की खाड़ी के ऊपर नो-फ्लाई ज़ोन के लिए NOTAM को फिर से जारी किया था।

भारत के लिए चीनी जहाज क्यों है खतरा?

भारत के लिए चीनी जहाज क्यों है खतरा?

भारत के डिफेंस एक्सपर्ट पीके सहगल ने एक भारतीय न्यूज चैनल से बात करते हुए कहा कि, चीन के इस जासूसी जहाज में इतनी क्षमता है, कि भारत अगर अपने दक्षिणी हिस्से में कोई भी सैटेलाइट या फिर मिसाइल लॉन्च करता है, तो इस जहाज से उसे डिटेक्ट किया जा सकता है। यानि, भारत किस सैटेलाइट को लॉन्च कर रहा है, उसकी क्षमता क्या है, किस मिसाइल को लॉन्च कर रहा है, उसकी सारी जानकारी चीन के पास होगी और भारत के पास उस जनकारी को छिपाने का कोई दूसरा रास्ता नहीं होगा। पीके सहगल के मुताबिक, इससे भारत की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है और इसीलिए अगस्त महीने में जब चीन ने अपने जासूसी जहाज को श्रीलंका के हंबनटोटा पोर्ट पर भेजा था, तो भारत के साथ साथ अमेरिका ने भी इसका विरोध किया था, मगर श्रीलंका ने दोनों देशों के विरोध को खारिज करते हुए चीनी जहाज को अपने बंदरगाह पर आने की इजाजत दे दी थी। एक्सपर्ट्स का कहना है, कि चीन अपने इस जासूसी जहाज की मदद से भारत के न्यूक्लियर प्लांट्स की भी जानकारियां हासिल कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अपने इस जासूसी जहाज की मदद से करीब 750 किलोमीटर तक आसानी से नजर रख सकता है।

चीन के पास कई जासूसी जहाज

चीन के पास कई जासूसी जहाज

चीन के पास जासूसी करने के लिए युआंग वांग 5 जैसे 7 जहाज हैं। जिन्हें प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागर में निगरानी करने के लिए उतारा गया है। इनका काम लैंड आधारित कमांडिंग सेंटर को जानकारी भेजना है। युआंग वांग 5 युआन वांग सीरीज की थर्ड जनरेशन की ट्रैकिंग शिप है। ये 29 सितंबर 2007 से सेवा में है। इसे जियांगन शिपयार्ड में बनाया गया था। चीनी मीडिया के मुताबिक, इस जहाज को साल 2007 में बनाया गया था और यह एक मिलिट्री नहीं, बल्कि पावरफूल सैटेलाइट रिसर्च जहाज है। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि ये जहाज उसी वक्त गतिविधियों को संचालित करता है, जब कोई देश अपना मिसाइल परीक्षण कर रहा हो। इस जहाज पर कई सैटेलाइट एंटीना और सेंसर्स लगे हुए हैं।

अग्नि-5 का परीक्षण करने वाला भारत

अग्नि-5 का परीक्षण करने वाला भारत

भारत अपने हफ्ते अपने सबसे शक्तिशाली और सबसे दुर्जेय अग्नि-5 मिसाइल का टेस्ट करने वाला है, जिसकी मारक क्षमता 5 हजार किलोमीटर की है। भारत अपने इस मिसाइल को ट्राय सर्विस स्ट्रैटजिक फोर्स कमांड (SFC) में शामिल करने वाला है और भारत के लिए अग्नि-5 मिसाइल की टेस्टिंक काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है। अग्नि-5 मिसाइल का परीक्षण तीन चरणों में होने वाला है और इसके पहले चरण का ट्रायल ही चीन के उत्तरी भाग को अपने पूरे दायरे में लाता है और यही वजह है, कि अग्नि-5 मिसाइल को लेकर चीन डरा हुआ है और बार बार अपने जहाज को जासूसी के लिए भेज रहा है। नवंबर महीने में भारत को चीनी जासूसी जहाज की वजह से जिस मिसाइल की लांचिंग टालनी पड़ी थी, वो अग्नि-3 मिसाइल थी, जिसकी मारक क्षमता 3 हजार किलोमीटर तक की है। आपको बता दें कि, भारत की अग्नि सीरिज की मिसाइलें दुनिया की सबसे घातक मिसाइलों में से एक मानी जाती है, जिससे परमाणु हमले किए जा सकते हैं।

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English summary
Chinese vessel in Indian Ocean: Before India's missile test, China has again sent its spy ship to the Indian Ocean.
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