भारत से दोस्ती का प्लान, फिर क्यों बदले अरुणाचल प्रदेश में शहरों के नाम? चीन की दोमुंहा रणनीति समझिए
अरूणाचल प्रदेश में चीन कई बार घुसने की कोशिश कर चुका है, लेकिन इंडियन आर्मी ने पीएलए को रोक रखा है। माना जा रहा है, कि चीन भारत को अरूणाचल में उलझाकर रखना चाहता है।

China-India News: एक तरफ चीन ये भी मानता है, कि भारत एक शक्तिशाली देश है और भारत के साथ सैन्य संघर्ष में, जितना नुकसान भारत का होगा, उतना चीन का भी होगा। लेकिन दूसरी तरफ चीन, भारत को लेकर दोमुंहा रणनीति पर भी काम कर रहा है। भारत के साथ विवाद उस वक्त और बढ़ गया है, जब चीन ने अरूणाचल प्रदेश के 11 जगहों के नये नामकरण किए हैं, जबकि दूसरी तरफ चीनी विदेश मंत्रालय का कगना है, कि वो दुनिया की ऊभर रही शक्तियों, जैसे भारत और रूस के साथ संबंधों को और मजबूत करेगा। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को कहा है, कि भारत, रूस और चीन उल्लेखनीय प्रभाव के साथ "प्रमुख शक्तियां" बनकर उभर रहे हैं और बीजिंग मास्को और नई दिल्ली के साथ संबंध बढ़ाने के लिए तैयार है।

चीन का भारत को लेकर प्लान क्या है?
रूस ने पिछले हफ्ते अपनी नई विदेश नीति कंसेप्ट जारी किया है, जिसमें भारत और चीन को सबसे प्रमुख सहयोगी बताया गया है। इसको लेकर रूसी समाचार एजेंसी TASS ने चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से सवाल पूछा था, जिसको लेकर प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, कि "चीन, रूस और भारत उल्लेखनीय प्रभाव वाले, सभी क्षेत्रों में प्रमुख उभरते हुए प्रमुख देश हैं। और जिस तरह का अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय परिदृश्य जटिल परिवर्तनों का सामना कर रहा है, हम आपसी संबंधों को मजबूत करने के लिए तैयार हैं।" भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता वांग जिआओजियान के ट्वीट के मुताबिक, "वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए और मल्टीलेटरिज्म को बढ़ावा देने के लिए, और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ संचार को बढ़ावा देने के लिए, हम एक साथ मिलकर दुनिया को सकारात्मक संकेत भेजने के लिए तैयार हैं।" लेकिन, सवाल ये उठ रहे हैं, कि अगर चीन वास्तव में भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है, तो फिर उसने अरूणाचल प्रदेश के 11 जगहों के चीनी नामकरण क्यों किए हैं, जबकि चीन ये जानता है, कि अगर उसने अरूणाचल प्रदेश में घुसने की कोशिश की, तो फिर भारत के साथ युद्ध तय है।

अरूणाचल में बदले शहरों के नाम
एक तरफ चीन ने भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने की बात कही है, दूसरी तरफ चीन ने अरूणाचल प्रदेश पर अपना दावा दोहराते हुए 11 स्थानों के नामों का मानकीकरण किया है, जिसे वह "तिब्बत का दक्षिणी भाग ज़ंगनान" कहता है। चीन ने अरूणाचल प्रदेश में 11 जगहों के नाम उस वक्त बदले हैं, जब पिछले हफ्ते ही भारत ने अरूणाचल प्रदेश में जी20 की एक बैठक का आयोजन किया था, जिसमें चीन ने हिस्सा नहीं लिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी, तिब्बती और पिनयिन में चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने रविवार को नये नाम जारी किए हैं। बताया गया है, कि यह स्टेट काउंसिल, चीन की कैबिनेट, और चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स द्वारा सोमवार को जारी किए गए भौगोलिक नामों के नियमों के अनुसार है। वहीं, टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली में सरकारी सूत्रों ने कहा है, कि यह पहली बार नहीं है, जब चीन ने इस तरह की कवायद की है और नया नामकरण करने से जमीन पर स्थिति नहीं बदलेगी। एक सूत्र ने कहा, कि "अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है और रहेगा।"
भारत आने वाले हैं चीनी राष्ट्रपति
चीन ने भारत के साथ तनाव को उस वक्त बढ़ाया है, जब चीन के विदेश मंत्री भारत में एससीओ शिखर सम्मेलन की बैठक में हिस्सा लेने के लिए आने वाले हैं। वहीं, चीन के राष्ट्रपति भी जुलाई महीने में एससीओ शिखर सम्मेलन में भारत आने वाले हैं। लिहाजा, माना जा रहा है, कि अरूणाचल प्रदेश में 11 जगहों के नाम बदलने का असर इन दौरों पर पड़ सकता है। चीन ने अरूणाचल प्रदेश के जिन जगहों के चीनी नाम रखे हैं, उनमें दो भूमि क्षेत्र, दो आवासीय क्षेत्र, पांच पर्वत चोटियां और दो नदियों के नाम शामिल हैं। इन स्थानों, नामों और उनके अधीनस्थ प्रशासनिक जिलों की श्रेणियों का भी उल्लेख किया गया है। ग्लोबल टाइम्स ने कहा है, कि "मंत्रालय द्वारा जारी ज़ंगनान में मानकीकृत भौगोलिक नामों का यह तीसरा बैच है। छह स्थानों का पहला बैच 2017 में और 15 स्थानों में से दूसरा बैच 2021 में जारी किया गया था।" चीन अरूणाचल प्रदेश को तिब्बत का दक्षिणी हिस्सा 'ज़ंगनान' बताता है, हालांकि भारत चीन के दावे को नकारता आया है।

मैकमोहन रेखा को मानता है भारत
भारत मानता है, कि चीन के साथ कानूनी राष्ट्रीय सीमा अरुणाचल प्रदेश में मैकमोहन रेखा के साथ है, जिसे 1914 के शिमला सम्मेलन के हिस्से के रूप में तिब्बत और ब्रिटिश भारत के प्रतिनिधियों द्वारा तय किया गया था। हालांकि, चीन यह नहीं मानता है। चीन कहता है, कि तिब्बत चीन से स्वतंत्र नहीं था और उस सम्मेलन में कोई चीनी प्रतिनिधि नहीं था। चीनी मानचित्रों में, मैकमोहन रेखा के दक्षिण के लगभग 65,000 वर्ग किमी क्षेत्र को तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (दक्षिण तिब्बत) के हिस्से के रूप में दिखाया गया है और इसी विवाद के कारण पिछले कुछ दशकों में सीमा पर झड़पें हुई हैं। 2017 में, चीन ने पहली बार एकतरफा रूप से अरुणाचल प्रदेश में छह स्थानों के नामों को बदला था और कथित तौर पर इन स्थानों को संप्रभु बताया था। इसके अलावा 30 दिसंबर 2021 को भी चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने तिब्बती, चीनी अक्षरों और रोमन वर्णमाला में "संप्रभुता, इतिहास के आधार पर" ज़ंगनान (दक्षिण तिब्बत) में 15 स्थानों के नामों का मानकीकरण किया था और ये सभी क्षेत्र अरूणाचल प्रदेश में हैं, जिसका भारत ने उस वक्त भी विरोध किया था और कहा था, कि ऐसा करने से कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है। लेकिन,एक्सपर्ट्स का कहना है, कि चीन का मकसद इस पूरे क्षेत्र को विवादित करना है और इसमें वो कामयाब भी हो रहा है।












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