भारत को घेरने के लिए चीन का नया ‘मिशन हिंदमहासागर’ शुरू, अफ्रीकी देश जिबूती में खोला नौसैनिक अड्डा
अफ्रीकी देश जिबूती में चीन का नेवल बेस शुरू हो चुका है। मैक्सार टेक्नोलॉजीज की ओर से जारी की गई सैटेलाइट तस्वीरों से यह पता चला है कि चीन का यह नौसैनिक अड्डा अब पूरी तरह से ऑपरेशनल है।
नई दिल्ली, 18 अगस्तः अफ्रीकी देश जिबूती में चीन का नेवल बेस शुरू हो चुका है। मैक्सार टेक्नोलॉजीज की ओर से जारी की गई सैटेलाइट तस्वीरों से यह पता चला है कि चीन का यह नौसैनिक अड्डा अब पूरी तरह से ऑपरेशनल है। इन तस्वीरों में नेवलबेस पर चीनी वॉरशिप भी दिखाई दिए हैं, जो कि हिन्द महासागर में तैनात किए गए हैं।

विदेश में चीन का पहला मिलिट्री बेस
जिबूती में चीन का नेवल बेस उसका पहला विदेशी मिलिट्री बेस है। इसे 590 मिलियन डॉलर की लागत से बनाया गया है और यह वर्ष 2016 से ही निर्माणाधीन है। यह नेवल बेस यह स्ट्रैटेजिक तौर अहम बाब-अल-मंडेब स्ट्रैट के पास स्थित है और अदन की खाड़ी और लाल सागर को अलग करता है। जिबूती, स्वेज नहर जो किए एक व्यस्ततम शिपिंग रूट है, उसके रास्ते में पड़ता है। जिबूती में सैन्य अड्डा बनाने के बाद चीन ने हिंद महासागर से लेकर साउथ चाइना सी तक अपनी ताकत का विस्तार कर लिया है।

बेहद मजबूत बना है जिबूती नेवल बेस
नेवल बेस के नौसेना विश्लेषक एच आई सटन ने NDTV को बताया कि जिबूती बेस को स्पष्ट तौर पर सीधे हमले का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है। उनके मुताबिक इसे मजबूत तरीके से बनाया गया है। इसकी रक्षा परतें आधुनिक औपनिवेशिक किले जैसी मध्युगीन दिखाई देती हैं। यह स्पष्ट रूप से सीधे हमले का सामना करने के लिए ही बनाया गया लगता है। मैक्सार की सैटेलाइट तस्वीरों में एक चीनी युझाओ क्लास (टाइप-071) लैंडिंग शिप दिखाई दी है। इसे 320 मीटर लंबे डॉकयार्ड पर डॉक किया गया है। इस डॉकयार्ड पर हेलिकॉप्टर उतारने की भी सुविधा है।

बेहद विशालकाय है चीनी टाइप-071 लैंडिंग शिप
चीनी टाइप-071 लैंडिंग शिप की विशालता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह अपने साथ कई टैंक, ट्रक और होवरक्राफ्ट ले जा सकता है। एच आई सटन के मुताबिक चीनी फ्लीट में और भी ताकतवर जहाज शामिल हो रहे हैं। इनके आकार और क्षमता के आधार पर कहा जा सकता है कि इनका इस्तेमाल अहम रसद सप्लाई और ट्रांसपोर्ट मिशन के लिए किया जा रहा है। युझाओ क्लास के शिप्स को चीनी टास्क फोर्स के सबसे अहम वॉरशिप के तौर पर डिजाइन किया गया है। ये शिप जमीनी और हवाई हमलों से भी निपटने में सक्षम हैं। चीनी नेवी ने अलग-अलग चरणों में इस कैटेगरी के कुल 8 शिप्स को अपनी फ्लीट में कमीशन किया है।

हिंदमहासागर में दिखा ‘चांगबाई शान'
इस बेस पर एक और चीनी शिप 'चांगबाई शान' को भी देखा गया है। यह एक 25,000 टन का विशालकाय जहाज है, जिसे 800 सैनिकों और वाहनों, एयर-कुशन लैंडिंग क्राफ्ट और हेलिकॉप्टर ले जाने करने के लिए डिजाइन किया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि इसने इसी साल एक फ्रंटलाइन चीनी डिस्ट्रॉयर के साथ हिंद महासागर के पानी में प्रवेश किया है। जिबूती में चीनी नेवल बेस की तस्वीरें उस समय आई है, जब चीन ने श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह में सैटेलाइट और बैलिस्टिक मिसाइल ट्रैकिंग शिप युआन वांग 5 को उतरने दिया है। इस जहाज की जासूसी शक्तियों के खतरे को देखते हुए भारत ने इसे लेकर श्रीलंका के सामने विरोध दर्ज कराया था।

जिबूती की हालत भी श्रीलंका जैसी
श्रीलंका और जिबूती दोनों देशों में चीन की उपस्थिति लांग टर्म 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' के तहत दोनों देशों में उसके आर्थिक निवेश से बड़ी ही निकटता से जुड़ी हुई है। बीजिंग से जिबूती ने बेहिसाब कर्जा ले रखा है, जिसके तले यह देश बुरी तरह से दबा हुआ है। यह कर्ज जिबूती की GDP के 70% से ज्यादा है। वहीं, चीन ने 99 साल के जरिए श्रीलंका के पोर्ट पर कब्जा कर लिया है। इसी कर्जजाल से श्रीलंका भी घिरा हुआ है।

हिंद महासागर में मजबूती से काम कर रहा चीन
भारतीय नौसेना के पूर्व चीफ एडमिरल अरुण प्रकाश ने NDTV को बताया कि भारत को चीन के समुद्री इरादों या क्षमताओं के बारे में कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। उन्हें अफ्रीकी देश में स्टैंडिंग पेट्रोल चालू किए 14 साल हो चुके हैं। शुरू में हमें संदेह था कि चीन इतनी दूर की बेस को कैसे ऑपरेट कर सकता है। लेकिन उन्होंने दिखाया है कि वे ऐसा कर सकते हैं। उन्होंने 6 से 9 महीनों तक शिप्स को स्टेशन पर तैनात रखा है। आज हम जो कुछ भी देख रहे हैं, वह चीन के समुद्री प्रभाव को बढ़ाने की एक सुनियोजित और सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

अमेरिकी नेवी कमांडरों ने दी चेतावनी
इसके तहत चीन ने पहले ही हिंद महासागर में परमाणु-संचालित अटैक सबमरीन ऑपरेट कर चुका है। इस समुद्री इलाके में हम वॉरशिप के बड़े ग्रुप को भी देख सकते हैं। इसको लेकर अमेरिकी नेवी के शीर्ष कमांडरों ने भी चेतावनी दी है। आने वाले वक्त में चीन पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह का इस्तेमाल भी इसी रूप में करेगा। US पैसिफिक कमांड के तत्कालीन कमांडर एडमिरल हैरी हैरिस जूनियर ने 2017 में कहा था कि- आज चीन को हिंद महासागर में शिप ले जाने से कोई भी नहीं रोक सकता
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