रूस के रास्ते ही चला चीन? शी जिनपिंग ने देश की रक्षा बजट में की बेतहाशा बढ़ोतरी, भारत के लिए टेंशन?
भारत से लगातार तनाव और ताइवान संकट के बीच चीन ने अपनी रक्षा बजट में बेतहाशा वृद्धि कर दी है और चीन ने शनिवार को अपना वार्षिक रक्षा बजट पेश किया है, जिसमें पिछले साल के मुकाबले 7.1 फीसदी का इजाफा किया है।
बीजिंग, मार्च 05: यूक्रेन में रूस किस तरह से बर्बादी फैला रहा है, ये पूरी दुनिया देख रही है और पूरी दुनिया देख रही है, कि किस तरह से बर्बाद हो रहे यूक्रेन को बचाने के लिए विश्व की बड़ी ताकतें भी नहीं आ रही हैं। यूक्रेन हमले के बीच सबकी निगाहें चीन की तरफ हैं, क्योंकि चीन में भी सत्तावादी सरका है, जो किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है। चीन ने अपना रक्षा बजट पेश कर दिया है, जिसमें बेतहाशा वृद्धि की गई है। ऐसे में सवाल ये है कि, क्या चीन के मंसूबे भी रूस की तरह ही तो नहीं हैं?

चीन ने पेश किया रक्षा बजट
भारत से लगातार तनाव और ताइवान संकट के बीच चीन ने अपनी रक्षा बजट में बेतहाशा वृद्धि कर दी है और चीन ने शनिवार को अपना वार्षिक रक्षा बजट पेश किया है, जिसमें पिछले साल के मुकाबले 7.1 फीसदी का इजाफा किया है, जो काफी ज्यादा है। चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक, पिछले साल के 209 अरब डॉलर के मुकाबले चीन ने इस साल अपनी रक्षा बजट में 7.1 फीसदी का इजाफा किया है और अब चीन का रक्षा बजट बढ़कर 230 अरब डॉलर हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि, चीन ने अपनी रक्षा बजट में बेतहाशा बढ़ोतरी उस वक्त की है, जब यूक्रेन संकट चल रहा है और विश्वयुद्ध की आशंका लगातार बनी हुई है।

भारतीय रक्षा बजट से तुलना
चीन के सरकारी अखबार चायना डेली की रिपोर्ट के मुताबित चीनी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2022 के लिए 1.45 ट्रिलियन युआन (230 बिलियन डॉलर) का रक्षा बजट प्रस्तावित किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 7.1 प्रतिशत ज्यादा है। चाइना डेली ने चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग द्वारा प्रस्तुत मसौदा बजट प्रस्तावों के हवाले से बताया है कि, सरकार ने देश की संसद पीपुल्स कांग्रेस में बजट पेश किया है। आपको बता दें कि, चीन का रक्षा बजट भारतीय रक्षा बजट के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है। साल 2022 के लिए भारत का रक्षा बदट 5.25 ट्रिलियन (लगभग $ 70 बिलियन) था, जबकी चीन का रक्षा बजट 230 अरब डॉलर है, जो भारतीय रक्षा बजट के मुकाबले तीन गुना से भी ज्यादा है। पिछले साल चीन का रक्षा खर्च पहली बार 200 अरब डॉलर को पार कर गया था। पूर्वी लद्दाख में गतिरोध और अमेरिका के साथ उसके बढ़ते राजनीतिक और सैन्य तनाव के बीच इस साल के रक्षा बजट में चीन की वृद्धि हुई है। चीन के पास अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा बजट है।

क्यों रक्षा बजट में बढ़ोतरी कर रहा चीन?
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साल 2035 तक अपनी सेना पीएलए को पूरी तरह से आधुनिक बनाने का लक्ष्य रखा है और पीएलए को लेकर पिछले दिनों आई कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि, चीन की सेना इस वक्त किसी भी विपरीत परिस्थितियों में लड़ने के लिए तैयार नहीं हैं और संख्या बल के हिसाब से वो भले ही दुनिया में नंबर हैं, लेकिन उनकी क्षमता इस वक्त काफी कम है। इसके साथ ही पीएलए के पास जो टैंक और तोप मौजूद हैं, वो काफ पुराने हो चुके हैं और सेना में कई तरह की खामिल हैं, लिहाजा चीन अपनी सेना पर बेतहाशा खर्च कर रहा है। खासकर चीन अपनी नौसेना के विकास पर काफी पैसे लगा रहा है और यही वजह से ही चीन की नौसेना इस वक्त अमेरिका को भी पीछे छोड़ चुकी है और दुनिया की नंबर वन नौसेना बन चुकी है।

क्वाड और ऑकस से डर?
चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि, इस साल के रक्षा बजट में जो बढोतरी की गई है, वो 'चीन के रास्ते में आने वाले खतरों' को दर्शाता है और अमेरिका पिछले कुछ सालों से लगातार चीन के रास्ते में रूकावटें पैदा कर रहा है और अमेरिका के प्रेशर को बर्दाश्त करने के लिए चीन को अपनी रक्षा बजट में इजाफा करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है। चीनी अखबार ने कहा है कि, अमेरिका लगातार चीन को उकसाने के लिए दक्षिण चीन सागर में अपनी युद्धपोतों को भेजता है, जासूसी विमानों को चीन के सागर में भेजता है और अमेरिका की ये हरकतें चीन के लिए परेशानी पैदा करती हैं, लिहाजा चीन के पास रक्षा बजट में बढ़ोतरी करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था। इसके साथ ही चीनी अखबार ने क्वाड को भी चीन की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है और कहा है कि, अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया क्वाड डॉयलॉग कर रहे हैं, जो चीन को परेशान करता है।

भारत पर क्या बोला चीन?
रक्षा बजट में बेतहाशा वृद्धि करने के बाद चीन की तरफ से भारत और भारत-चीन सीमा पर जारी तनाव को लेकर भी बात की गई है और ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि, 'भारत से लगती सीमा पर अब स्थिति स्थिर हो चुकी है और स्थिति संभाले जाने योग्य बन चुकी है, लेकिन कई गतिरोध अभी भी बाकी हैं, जिन्हें कई दौर की बातचीत के बाद उसे दूर किया जाना बाकी है।' वहीं, अगर भारतीय बजट पर एक नजर डाली जाए, तो पता चलता है कि, बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 25 फीसदी आरएंडडी बजट के साथ डिफेंस आरएंडडी की घोषणा की थी। वहीं, सैन्य उपकरणों के लिए प्राइवेट इंडस्ट्री को प्रोत्साहित करने की भी बात कही थी। बजट में भारत सरकार की तरफ से कहा गया था कि, प्राइवेट इंडस्ट्री डीआरडीओ और अन्य संगठनों के साथ मिलकर काम कर सकेंगी। बजट में कहा गया था कि, भारत रक्षा उपकरणों का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। बजट में डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाने पर बल दिया गया था।

ताइवान पर हमला करेगा चीन?
इस वक्त जब यूक्रेन में भीषण जंग जारी है और रूस यूक्रेन पर बुरी तरह से हमला कर रहा है, उस वक्त चीनी सोशल मीडिया पर सरकार से इस मौके का फायदा उठाकर ताइवान के खिलाफ भी सैन्य अभियान शुरू करने की मांग की जा रही है। चीनी 'राष्ट्रवादी' लगातार सोशल मीडिया पर ताइवान पर हमला करने के लिए इस वक्त को सही मौका ठहरा रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि, इस वक्त जब अमेरिका यूक्रेन में उलझा हुआ है, उस वक्त ताइवान को चीन में सेना का इस्तेमाल कर मिला लेना चाहिए। जिसके बाद ताइवान में हलचल तेज हो गई है और आशंका है कि, शी जिनपिंग भी लड़ाई शुरू कर सकते हैं और अब चीन की तरफ से जो बजट पेश किया गया है, उससे साफ जाहिर होता है, की चीन लगातार ताइवान को घेरने की कोशिश और भी ज्यादा बढ़ाएगा और वो दिन दूर नहीं, जब चीन ताइवान पर हमला कर दे।












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