दक्षिण चीन सागर में चीन की एक और खुराफात.. फिलीपींस के बाद भारत के एक और दोस्त का हड़प रहा समुद्री इलाका
China-Vietnam Conflict: दक्षिण चीन सागर को पूरी तरह से हड़पने के लिए चीन लगातार दूसरे देशों से टकराता रहता है और पिछले कुछ महीनों से चीनी कोस्ट गार्ड और फिलीपींस कोस्ट गार्ड के बीच होने वाली झड़पें हेडलाइंस में रही हैं।
लेकिन, दक्षिण चीन सागर में एक और देश बीजिंग की आक्रामक चालबाजी का निशाना है। और वो देश है वियतनाम। वियतनाम ने अपने जलक्षेत्र में चीनी रिसर्च जहाजों की बढ़ती गतिविधियों पर गहरी चिंता जताई है और उसने बीजिंग से अपनी "अवैध गतिविधियों" को रोकने के लिए कहा है।

दूसरे देशों की जमीन हड़पने की अपनी रणनीति के तहत चीन, समुद्री ग्रेज जोन स्ट्रैटजी के साथ वियतनाम के स्पेशल इकोनॉमिक जोन (EEZ) में लगातार जहाजों को भेज रहा है, जिसने वियतनाम की सुरक्षा पर गंभीर खतरा ला दिया है। इससे पहले 2023 में भी चीनी रिसर्च जहाज ने वियतनाम के EEZ में एक महीने तक घुसपैठ की थी, जो वियतनाम के तट से 200 समुद्री मील तक फैला हुआ है।
एक्सपर्ट्स का मानना है, कि चीन अपनी 'सलामी स्लाइसिंग' नीति के तहत वियतनाम के समुद्री क्षेत्र को हड़पना चाहता है, जिससे वियतनाम का समुद्री क्षेत्र विवाद का नया अखाड़ा बन सकता है।
वियतनाम के समुद्री क्षेत्र में घुसपैठ का मकसद
दरअसल, चीन पूरे दक्षिण चीन सागर को अपना हिस्सा बताता है और उसका कहना है, कि इसपर किसी भी और देश का अधिकार नहीं है। जबकि, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून के मुताबिक, किसी भी देश को अपने तट से 200 समुद्री मील तक के क्षेत्र पर अधिकार होता है।
लिहाजा, चीनी रिसर्च जहाज, कोस्ट गार्ड और सर्विलांस जहाज लगातार दक्षिण चीन सागर में मौजूद वियतनाम के तेल भंडार और गैस ऑपरेशनल क्षेत्र को परेशान करते हैं। 6 जून को, वियतनाम ने अपने EEZ और महाद्वीपीय शेल्फ में है चीनी रिसर्च जहाज यांग 26 पोत के घुसने के बाद गहरी नाराजगी जताते हुए चिंता जताई है। इसके अलावा, वियतनाम ने डिप्लोमेटिक चैनलों के जरिए चीन को अपना विरोध भी भेजा है।
वियतनाम विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता फाम थू हांग ने 6 जून को कहा, कि "वियतनाम काफी ज्यादा चिंतित है और मजबूती से इसका विरोध करता है और मांग करता है, कि चीन वियतनाम के आर्थिक क्षेत्र और महाद्वीपीय शेल्फ के भीतर हाई यांग 26 पोत की अवैध सर्वेक्षण गतिविधियों को खत्म करे, जैसा कि संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (यूएनसीएलओएस 1982) द्वारा परिभाषित किया गया है।"

दक्षिणी चीन सागर पर कब्जे का मकसद क्या है?
दक्षिण चीन सागर प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है और चीनी रिसर्च जहाजों के घूमने का मकसद ये है, कि चीन पूरे समुद्र पर अपना दावा पेश कर सके। माना जा रहा है, कि दक्षिण चीन सागर में 11 अरब बैरल कच्चा तेल और 190 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस है।
चीन का हाई यांग 26 एक रिसर्च जहाज है, जिसे जासूसी जहाजा कहा जाता है और इसका संचालन चीन का भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग करता है, जो चीनी प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय के अधीन एक उप-एजेंसी है। इसकी क्षमता 35 दिनों की है और यह 32 भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण उपकरण मॉड्यूल से लैस है, जिसमें ड्रिलिंग, स्टेटिक कोन पैठ, भूभौतिकीय सर्वेक्षण और खनिज अध्ययन के लिए मॉड्यूल शामिल हैं।
चीन आक्रामक तरीके से सीबेड माइनिंग सिद्धांत का पालन कर रहा है। दक्षिण चीन सागर में, पानी के नीचे की प्रोफाइलिंग चीन के स्वायत्त पानी के नीचे के वाहनों (AUV) जैसे भूमिगत जहाजों के ऑपरेशन के लिए बहुत फायदेमंद है।

2019 में, दक्षिण चीन सागर में एक चट्टान को लेकर चीनी और वियतनामी तट रक्षक जहाज एक हफ्ते तक एक दूसरे के सामने खजडे रहे, जिससे दोनों देशों के बीच पांच वर्षों में सबसे बड़ा टकराव होने का जोखिम था। 2014 में विवादित पैरासेल द्वीप समूह में चीनी तेल रिग के आने के बाद से यह दोनों देशों के बीच एक बड़ा गतिरोध था।
2023 में, दोनों देशों के बीच फिर से एक बड़ा गतिरोध हुआ, जब वियतनाम ने वैनगार्ड बैंक में अपने तेल ड्रिलिंग संचालन का विस्तार करने का फैसला किया। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिस पर दोनों पक्ष दावा करते हैं। दोनों देश एक-दूसरे के जहाजों को बाहर निकालने के लिए क्षेत्र में जहाज भेज रहे हैं।
विवादित द्वीपों को सैन्य किला बना रहा चीन
हाल के वर्षों में सैटेलाइट तस्वीरों में देखा गया है, कि चीन दक्षिण चीन सागर और वियतनाम, फिलीपींस के नजदीक समुद्री द्वीपों पर ना सिर्फ कब्जा कर रहा है, बल्कि उन्हें सैन्य किले के तौर पर विकसित कर रहा है। इतना ही नहीं, दक्षिण चीन सागर में चीन मानव निर्मित द्वीपों का भी निर्माण कर रहा है। ताकि, दक्षिण चीन सागर के ज्यादा से ज्यादा हिस्सों पर अपने दावे के लिए उन कृत्रिम द्वीपों को सबूत के तौर पर पेश किया जा सके।
कृत्रिम द्वीप बनाने का काम मौजूदा चट्टानों पर रेत जमा करके किया गया है, और चीन ने बंदरगाह, सैन्य प्रतिष्ठान और हवाई पट्टियां बनाई हैं - खास तौर पर पैरासेल और स्प्रैटली द्वीपों में। चीन ने लड़ाकू जेट, क्रूज मिसाइल और रडार सिस्टम तैनात करके वुडी द्वीप का सैन्यीकरण किया है।
लिहाजा, माना जा रहा है, कि आने वाले महीनों में फिलीपींस की तरह वियतनाम से भी चीन का टकराव शुरू हो जाएगा, जिससे क्षेत्रीय शांति को गहरा धक्का लग सकता है।
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