प्रचंड सर्दी में लद्दाख से 'भागे' चीनी सैनिक, रोबोट के हाथ में मशीनगन देकर सीमा पर भेज रहा ड्रैगन
प्रचंड सर्दी में भारतीय सीमा के पास चीन के सैनिक नहीं रह पा रहे हैं, लिहाजा अब चीन ने अपने सैनिकों को रोबोट से बदलना शुरू कर दिया है।
बीजिंग, दिसंबर 29: इस प्रचंड सर्दी के मौसम में चीन सैनिक तिब्बत और लद्दाख में भारतीय सीमा के पास तैनाती नहीं कर पा रहे हैं और इस मौसम में उनके लिए सीमा पर खड़ा रहना काफी मुश्किल भरी चुनौती साबित हो रही है और ज्यादातर सैनिकों के सीमा पर रहने से इनकार करने के बाद अब चीन ने भारतीय सीमा के पास रोबोट की तैनाती करनी शुरू कर दी है। ऐसा दावा किया गया है कि, चीन ने भारतीय सीमा के पास जिन रोबोट्स की तैनाती कर रहा है, वो ही मशीनगन चलाएंगे।

रोबोट की तैनाती कर रहा चीन
यह दावा किया गया है कि, भारत के साथ गतिरोध के बीच चीन अपने पश्चिमी रेगिस्तानी क्षेत्रों में मशीनगन ले जाने वाले रोबोटों को तैनात कर रहा है क्योंकि इतनी ऊंचाई पर चीनी सैनिक अब काम करने लायक नहीं रहे हैं और उन्होंने हाथ खड़ कर दिए हैं। पहले चीन की तरफ से कहा गया था कि, सर्दी के महीने में भी चीन के कम से कम 50 हजार से 60 हजार सैनिक सीमा पर रहेंगे, लेकिन अब रिपोर्ट है कि, चीन की सरकार को समझ नहीं आ रहा है कि, वो अपने सैनिकों को सीमा पर कैसे रखे।

सीमा पर मानवरहित गाड़ियां
कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि, सीमा पर हथियारों और रसद सप्लाई के लिए दर्जनों मानवरहित वाहनों को तिब्बत भेजा रहा है, जिनमें से ज्यादातर सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात हैं जहां भारत और चीन के सैनिक एक दूसरे को रोकने के लिए अपने अपने पॉजिशन पर तैनात हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन वाहनों में शार्प क्लॉ शामिल है, जिसे एक हल्की मशीनगन के साथ लगाया जाता है और इसे वायरलेस तरीके से संचालित किया जा सकता है। इसके साथ जवानों तक रसद आपूर्ति करने के लिए चीन अब म्यूल-200 मानवरहित वाहनों का भी सहारा ले रहा है, वहीं इन्हीं वाहनों के जरिए चीन अपने सैनिकों तक हथियार पहुंचा रहा है।

हथियार और रोबोट की तैनाती
वहीं, टाइम्स नाउ ने दावा किया है कि, बीजिंग ने 88 शार्प क्लॉज तिब्बत में भेजे हैं, जो हिमालय में काफी ऊंचाई पर स्थिति हैं, जिनमें से 38 सीमा क्षेत्र में तैनात हैं। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ 120 म्यूल-200 भी तिब्बत भेजे गए हैं, जिनमें से अधिकांश को सीमा क्षेत्र में तैनात किया गया है। मानव रहित वाहनों के अलावा, चीन ने 70 VP-22 बख्तरबंद सैन्य गाड़ियों को अपनी सेना को मजबूत करने के लिए भेजा है, जिनमें से 47 सीमावर्ती क्षेत्रों में हैं। अन्य 150 लिंक्स ऑल-टेरेन वाहनों को भी सीमा पर भेजा गया है। लिंक्स कई तरह से सैनिकों के काम आता है और इसका उपयोग अकसर सैनिकों को एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाने में किया जाता है। वहीं, हॉवित्जर, भारी मशीनगन, मोर्टार या मिसाइल लांचर सहित विभिन्न हथियार प्रणालियों की तैनाती में भी इसका इस्तेमाल होता है।

सैनिकों को मिले हैं स्पेशल कपड़े
वहीं, चीनी सरकार की भोंपू राज्य मीडिया ने पहले बताया था कि, सैनिकों को एक्सोस्केलेटन सूट के साथ सीमा पर तैनात किया गया है, ताकि उन्हें उस ऊंचाई पर मदद मिल सके। समुद्र तल से 16,000 फीट ऊपर भारी उपकरण और हथियारों को अपने पास रखते वक्त सैनिकों को उनके पैरों और टखनों पर दबाव को कम करने के लिए कार्बन-फाइबर एक्सोस्केलेटन दिए गए थे। वहीं, रिपोर्ट् में कहा गया था, इतनी ऊंचाई पर सैनिक लगातार संघर्ष कर रहे हैं और ऑक्सीजन की कमी और प्रचंड सर्दी होने की वजह से उनका लद्दाख में भारतीय सीमा के पास रहना नामुमकिन हो रहा है।

भारत-चीन में जारी है तनाव
आपको बता दें कि, भारत और चीन के बीच पिछले साल से ही भारी तनाव छिड़ा हुआ है और पिछले साल जून के महीने में दोनों ही देशों के सैनिकों के बीच झड़प भी हो चुकी है। चीन ने भारत पर अपने सैनिकों को उकसाने का आरोप लगाया, जबकि भारत ने बीजिंग पर सीमा रेखा पर तनाव बढ़ाने और भारतीय सीमा में घुसपैठ करने के आरोप लगाए थे। सैटेलाइट इमेज भारत के दावों का समर्थन करती दिख रही थीं, जिसमें विवादित क्षेत्रों में नए चीनी निर्माण दिखाई दे रहे थे। इस झड़प के बाद बीजिंग और नई दिल्ली के बीच राजनयिक रिश्ते खराब हो गये हैं। हालांकि, पिछले साल जून में चीन ने विवादित क्षेत्रों में कुछ संरचनाओं को नष्ट करना शुरू किया, जिससे तनाव कम हुआ, लेकिन, अभी भी ये पूरा क्षेत्र हाई अलर्ट पर है।












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