चाहकर भी चीन के कब्जे से नहीं निकल पा रहा जर्मनी, लगातार सातवें साल रहा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार
चीन 2022 में जर्मनी का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा। यह लगातार सातवीं बार है जब चीन, जर्मनी का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है।

Image: Oneindia
चीन 2022 में भी जर्मनी का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है। यह लगातार सातवीं बार है जब जर्मनी ने चीन से सबसे अधिक आयात-निर्यात किया है। पहली बार 2016 में चीन अमेरिका को पीछे छोड़ जर्मनी का सबसे बड़ा कारोबारी सहयोगी बन गया था। हालांकि गुरुवार को प्रकाशित आंकड़े बताते हैं कि किस प्रकार जर्मनी की निर्भरता चीन पर लगातार बढ़ती जा रही है। फेडेरल स्टेटिक्स सांख्यिकी एजेंसी डेस्टैटिस के अनुसार, कोरोनोवायरस महामारी के निरंतर प्रभाव के बावजूद पिछले साल दोनों देशों के बीच 297.9 बिलियन यूरो (318.9 बिलियन डॉलर) का व्यापार हुआ।
बढ़ता जा रहा व्यापार घाटा
इस व्यापार के साथ जर्मनी की दिक्कत ये है कि उसका चीन के साथ व्यापार घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। चीन के साथ जर्मनी का व्यापार घाटा 84.3 बिलियन यूरो तक पहुंच गया है जो कि अब तक सबसे अधिक है। 2022 में जर्मनी ने चीन से 191.1 बिलियन यूरो का सामान आयात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 33 प्रतिशत अधिक है। वहीं जर्मनी और चीन के बीच निर्यात लगभग स्थिर है। 2022 में जर्मनी का चीन को निर्यात 3 फीसदी बढ़कर 106.8 बिलियन यूरो हो गया है।
जर्मनी को कुशल रणनीति की जरूरत
जर्मनी में रूस के साथ अपने संबंधों और मानवाधिकारों के मुद्दों पर पश्चिम और बीजिंग के बीच तनाव की पृष्ठभूमि के खिलाफ चीन पर अत्यधिक निर्भरता के बारे में आशंकाएं बढ़ रही हैं। जर्मन आर्थिक थिंक टैंक इफ डब्ल्यू कील ने बुधवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा, "जर्मनी को चीन से प्रमुख कच्चे माल और सामान विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स की आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए तत्काल एक कुशल रणनीति की जरूरत है। चीन के बाद अमेरिका जर्मनी का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। जर्मनी ने अमेरिका से कुल 156 बिलियन यूरो मूल्य के सामानों का आयात किया है।
जर्मनी में करीब 5000 चीनी कंपनियां
डायचे वेले की एक रिपोर्ट के मुताबिक जर्मन सरकार अपने सबसे अहम कारोबारी साझेदार, चीन पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहती है, लेकिन जर्मन कारोबारी इससे सहमत नहीं है। चीन में करीब 5000 जर्मन कंपनियां कारोबार कर रही हैं। जर्मनी में आर्थिक मामलों के मंत्री और उप-चांसलर रॉबर्ट हाबेक हैं जो कि ग्रीन पार्टी से संबंध रखते हैं। ये पार्टी अपने पर्यवारणवादी विचारों के लिए जानी जाती है। हाबेक ऐलान कर चुके हैं कि चीन के प्रति भोलेपन का दौर अब खत्म हो चुका है और उनकी सरकार सख्ती से चीन संग व्यापार करेगी।
चीनी सामानों पर निर्भर है जर्मनी
इसी क्रम में रॉबर्ट हाबेक ने चीन में निवेश के लिए फॉल्क्सवागन समूह को गारंटी देने से इंकार कर दिया था, जिसके बाद काफी हंगामा भी मचा था। हालांकि सरकार के लाख प्रयास के बाद भी आंकड़ा बता रहा है कि जर्मन सरकार चीनी सामानों पर निर्भरता खत्म नहीं कर पाई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक जर्मनी, चीन से खिलौने, फर्नीचर, खेल उपकरण, कपड़े, जूते आदि का आयात करता है। 3 फीसदी जर्मन रोजगार चीन से आयात पर निर्भर है। सिर्फ जर्मनी ही नहीं बाकी यूरोपीय देश भी बुरी तरह से चीन पर निर्भर हो चुके हैं। वर्ष 2020 से ही अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए चीन यूरोपीय संघ का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है।












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