भारत दौरे से पहले शी जिनपिंग की गुस्ताखी, अरुणाचल प्रदेश से लेकर अक्साई चिन को बताया चीन का हिस्सा
China releases new map: चीन ने सोमवार को जारी अपने नये मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन जैसे भारत के अभिन्न क्षेत्रों को शामिल करके नई दिल्ली को फिर से नाराज कर दिया है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के भोंपू ग्लोबल टाइम्स की वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर जारी तथाकथित मानक मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश, अक्साई चिन क्षेत्र, ताइवान और विवादित दक्षिण चीन सागर सहित विवादित क्षेत्रों को चीन का हिस्सा बताया गया है।
ग्लोबल टाइम्स में लिखा है, कि "चीन के मानक मानचित्र का 2023 वेरिएंट आधिकारिक तौर पर सोमवार को जारी किया गया और प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय द्वारा होस्ट की गई मानक मानचित्र सेवा की वेबसाइट पर लॉन्च किया गया।"
इसमें कहा गया है, "यह नक्शा चीन और दुनिया के विभिन्न देशों की राष्ट्रीय सीमाओं की रेखांकन पद्धति के आधार पर संकलित किया गया है।"

आपको बता दें, कि चीन दावा करता है, कि अरुणाचल प्रदेश तिब्बत क्षेत्र का हिस्सा है।
चीन की तरफ से ये नया मानचित्र उस वक्त जारी किया गया है, जब इसी महीने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दक्षिण अफ्रीका में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की थी और इस मुलाकात को लेकर कहा गया, कि दोनों नेता सीमा पर जल्द शांति स्थापित करने के लिए सहमत हुए हैं। हालांकि, नये मानचित्र को देखने के बाद ऐसा लग नहीं रहा है, कि चीन शांति चाहता भी है।
अरूणाचल के 11 जगहों के भी बदले थे नाम
इस साल की शुरुआत में अप्रैल में, चीनी सरकार ने कहा था, कि वह अरुणाचल प्रदेश में 11 स्थानों के नामों को "मानकीकृत" करेगी। उस समय, इसमें अरुणाचल के कुछ हिस्सों को दक्षिणी तिब्बती क्षेत्र के अंदर दिखाया गया था, जिसे सीसीपी सरकार ज़ंगनान के रूप में संदर्भित करती है।
इसके अलावा, चीनी नागरिक मामलों के मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर के करीब एक शहर को भी अपने नक्शे में शामिल किया था। हालांकि, भारत ने चीन के नाम परिवर्तन और मानचित्र को सिरे से खारिज कर दिया था।
भारत हमेशा से कहता रहा है, कि अरुणाचल प्रदेश राज्य "हमेशा" देश का अभिन्न अंग रहा है और "हमेशा" रहेगा। नवीनतम दावे नई दिल्ली में बहुप्रतीक्षित जी20 शिखर सम्मेलन से लगभग दस दिन पहले किए गये हैं, जहां चीनी राष्ट्रपति को 42 अन्य राष्ट्र प्रमुखों के साथ आमंत्रित किया गया है।
ताइवान पर भी चीन ने फिर दावा किया
इसके अलावा, मानचित्र में ताइवान के अलग द्वीप और दक्षिण चीन सागर के एक बड़े हिस्से पर दावा करने वाली नाइन-डैश लाइन पर चीन के दावों को भी शामिल किया गया है।
गौरतलब है कि 1949 में गृहयुद्ध के बाद ताइवान चीन से अलग हो गया था। सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी का कहना है कि यदि आवश्यक हो तो बलपूर्वक द्वीप मुख्य भूमि में फिर से शामिल होने के लिए बाध्य है।
बीजिंग का कहना है, कि विदेशी अधिकारियों के साथ संपर्क उन ताइवानियों को प्रोत्साहित करता है, जो औपचारिक स्वतंत्रता चाहते हैं। चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी का कहना है, कि यह कदम युद्ध का कारण बनेगा।












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