Explainer: भारत के साथ टेंशन, ताइवान पर करेगा आक्रमण...! चीन ने भारी-भरकम डिफेंस बजट का किया ऐलान
China Defence Budget: भारत के साथ गंभीर सीमा विवाद और ताइवान के साथ टेंशन के बीच चीन ने अपने भारी भरकम रक्षा बजट का ऐलान कर दिया है। बीजिंग ने मंगलवार को अपने रक्षा बजट को पिछले साल के मुकाबले 7.2 प्रतिशत बढ़ा दिया है।
चीन ने इस साल का रक्षा बजट 1.67 ट्रिलियन युआन यानि 231 अरब डॉलर कर दिया है। चीन के पिछले साल का रक्षा बजट 1.56 ट्रिलियन युआन था। दिलचस्प बात यह है, कि 2024 के लिए चीन का रक्षा खर्च, देश के लगभग 5 प्रतिशत के आर्थिक विकास लक्ष्य से काफी ऊपर है। चीन ने अपने रक्षा बजट में भारी-भरकम वृद्धि उस वक्त की है, जब देश पहले से ही आर्थिक संकट में फंसा हुआ है।

चीन ने रक्षा बजट को बेतहाशा बढ़ाया
चीन के रक्षा बजट का ऐलान उसकी रबर स्टांप कांग्रेस की बैठक में किया गया है। 2024 के लिए चीन ने जो रक्षा बजट बनाया है, वो रक्षा खर्च पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा है। इसके अलावा, यह ऐसे संकेतों के बीच आया है, जब शी जिनपिंग प्रशासन का मानना है, कि भ्रष्टाचार सैन्य सुधार को कमजोर कर रहा है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद चीन, डिफेंस सेक्टर पर दूसरा सबसे ज्यादा खर्च करने वाला देश है। दिसंबर 2023 में, राष्ट्रपति जो बाइडेन ने वित्तीय वर्ष 2024 के लिए रिकॉर्ड 886 अरब डॉलर का वार्षिक सैन्य खर्च को अधिकृत किया था, जो चीन के डिफेंस बजट का करीब चार गुना है।
इस बीच, चीन लगातार अपनी सेना के आधुनिकीकरण की दिशा में काम कर रहा है, क्योंकि उसे अमेरिका, ताइवान, जापान और महत्वपूर्ण दक्षिण चीन सागर पर दावा साझा करने वाले पड़ोसियों फिलीपींस, ब्रूनेई, इंडोनेशिया और मलेशिया के साथ तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
इसकी वजह से, चीन स्टील्थ लड़ाकू विमानों से लेकर एयरक्राफ्ट कैरियर और परमाणु हथियारों के बढ़ते शस्त्रागार तक, हाई टेक्नोलॉजी वाली सैन्य क्षमताओं पर अपना खर्च बढ़ा रहा है।
वर्ल्ड क्लास फोर्स बनाना है मकसद
शी जिनपिंग ने चीन की सेना को "विश्व स्तरीय ताकत" बनाने के लिए 2027 की समय सीमा तय की है। हालांकि, इस बात पर संदेह है, कि क्या भ्रष्टाचार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षा को नुकसान ना पहुंचा दे।
पीपुल्स लिबरेशन आर्मी डेली ने कहा है, कि वह इस साल "भ्रष्टाचार के खिलाफ कठिन और लंबी लड़ाई" लड़ना जारी रखेगी। पिछले साल कई अधिकारियों को भ्रष्टाचार के मामले में जेल भेजा गया है और कुछ अधिकारियों को फांसी की सजा सुनाई गई है।
पिछले साल अक्टूबर में चीन ने अपने रक्षा मंत्री ली शांगफू को बर्खास्त कर दिया था। शी जिनपिंग प्रशासन ने उन्हें हटाने के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया और आज तक उनकी जगह पर किसी नये रक्षा मंत्री के नाम की घोषणा नहीं की है। शांगफू को बर्खास्त करने के बाद कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया, जिनमें किन गैंग भी शामिल थे, जिन्हें जुलाई में विदेश मंत्री के पद से हटा दिया गया था।
भारत का रक्षा बजट कितना है?
भारत ने वित्तवर्ष 2023-24 के लिए डिफेंस सेक्टर के लिए 72.6 अरब डॉलर का बजट पेश किया, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रक्षा बजट है। हालांकि, ये अमेरिका और चीन के मुकाबले काफी कम है। भारत सरकार ने पिछले साल के मुकालबे इस साल के डिफेंस बजट में 13 प्रतिशत का इजाफा किया था, जिसका लक्ष्य मुख्य तौर पर चीन के साथ अपनी तनावपूर्ण सीमा पर ज्यादा से ज्यादा लड़ाकू जेट और हथियारों की तैनाती के साथ साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास करना है।
इसके अलावा, डिफेंस सेक्टर में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देशों में यूनाइटेड किंगडम 68.4 अरब डॉलर, जीडीपी का 2.2 प्रतिशत हिस्सा डिफेंस सेक्टर पर खर्च करता है। रूस का रक्षा बजट 65.9 अरब डॉलर, फ्रांस का 56.6 अरब डॉलर, जर्मनी का 56 अरब डॉलर, सऊदी अरब का 55.6 अरब डॉलर, जापान का 54.1 अरब डॉलर और दक्षिण कोरिया का रक्षा बजट 50.2 अरब डॉलर है।

चीन रक्षा बजट का पैसा कहां खर्च करता है?
चीन अपने सैन्य रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा हथियारों के निर्माण पर खर्च कर रहा है। चीन के पास इस वक्त 3 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, जिसे अगले 5 सालों में 7 तक ले जाने की कोशिश है। चीन लगातार दक्षिण चीन सागर, पूर्वी चीन सागर, हिंद महासागर में उलझने की कोशिश करता है और इसके लिए उसे एयरक्राफ्ट कैरियर की जरूरत महसूस हो रही है।
इसके अलावा, चीन के पास दो तरह के फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट्स हैं और वो छठवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के निर्माण की तरफ भी बढ़ चुका है। वहीं, वो अपने डिफेंस बजट का एक बड़ा हिस्सा मिलिट्री ट्रेनिंग, हथियारों के डेवलपमेंट, मिलिट्री रिफॉर्म और सैनिकों को पेंशन देने पर पैसे खर्च करता है।
चीन की प्लानिंग अपने स्टील्थ फाइटर जेट J-20 बेड़े में विस्तार लाने की है, जबकि DF-17 हाइपरसोनिक मिसाइलों के एडवांस वर्जन बनाने की भी चीन तेजी से तैयारी कर रहा है। चीन का मानना है, कि उसके पास इन मिसाइलों की संख्या जितनी होनी चाहिए, उससे कम है।












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