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भारत के अग्नि-V लॉन्‍च से परेशान चीन, UNSC में भारत को घेरने के लिए तैयार

यूएनएससी के स्‍थायी चीन ने सोमवार को भारत की इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल (आईएसबीएम) अग्नि-V की सफल लॉन्‍च से परेशान होकर इस टेस्‍ट के मुद्दे पर भारत को घेरने का मन बनाया है।

बीजिंग। चीन ने मंगलवार को कहा है कि वह भारत की ओर से सोमवार को किए गए इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल (आईएसबीएम) अग्नि-V के सफल लॉन्‍च पर भारत से संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सवाल करना चाहता है। आपको बता दें कि चीन यूएनएससी के पांच स्‍थायी सदस्‍यों में से एक है। अग्नि-V की रेंज 5,000 किमी से ज्‍यादा है और इसे एक 'गेम चेंजर' मिसाइल करार दिया जा रहा है।

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विदेश मंत्रालय ने दिया नियमों का हवाला

चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से इस बारे में एक बयान जारी किया गया। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्‍ता हुआ चुनयिंग ने कहा, ' क्‍या भारत परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बैलेस्टिक मिसाइलों को डेवलप कर सकता है, इस बारे में यूएनएससी के नियम एकदम साफ हैं।' चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से भारत और जापान की मीडिया में आई उन रिपोर्ट्स पर भी चिंता जताई गई है जिनमें इस बात की आशंका जताई गई कि अग्नि-V चीन को जवाब देने के मकसद से तैयार की गई है। इस पर चुनयिंग ने कहा कि इस बारे में भारतीय पक्ष से पूछना होगा कि इस कदम के पीछे उनकी मंशा क्‍या है। अग्नि-V एशिया और यूरोप के ज्‍यादातर हिस्‍सों में पहुंच सकती है। इससे ही मीडिया ने यह आशंका लगाई कि यह मिसाइल चीन और पाकिस्‍तान की चुनौतियों से निबटने के लिए तैयार की गई है।

चीन चाहता है शांति

चीन की ओर से यह बयान तब आया है जब चीन ने पांचवी पीढ़ी के अपने दूसरे फाइटर जेट का प्रदर्शन किया है और वर्ष 2018 में चांद और वर्ष 2020 में मंगल से जुड़े एक मिशन के बारे में ऐलान किया। चीन का दावा है कि वह अंतरिक्ष विज्ञान का प्रयोग शांति कायम करने के मकसद के लिए करना चाहता है। चुनयिंग ने कहा कि चीन, भारत समेत तमाम क्षेत्रीय ताकतों के साथ मिलकर काम करने का ख्‍वाहिशंमद है ताकि यहां पर शांति कायम रह सके। चुनयिंग के मुताबिक चीन और भारत दोनों एक अहम समझौते पर पहुंचे है कि दोनों एक-दूसरे से प्रतियोगिता नहीं करेंगे बल्कि साझीदार बनकर काम करेंगे। उन्‍होंने कहा कि दोनों ही देश उभरती हुई ताकतें और बढ़ती हुई अर्थव्‍यवस्‍था हैं। चुनयिंग ने कहा कि दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन और स्‍थायीत्‍व कायम रखने के लिए देशों को शांति कायम रखनी होगी। पढ़ें-चीन ने फाइटर जेट FC-31 के साथ दी अमेरिका और ब्रिटेन को चुनौती

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