मोदी सरकार के प्रयासों से अब कोई भी देश पाकिस्तान को नहीं देगा कर्ज, चीन ने नए प्रस्ताव से भी खींचा हाथ
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह से आतंकवाद को समग्र मानवता का दुश्मन करार दिया और आतंकवाद के वास्तविक स्वरूप को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया, इसका अब सीधा असर होता भी दिख रहा है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने के बाद अब पाकिस्तान को एक और झटका लगा है। FATF के एक्शन के खिलाफ लाए जाने वाले प्रस्ताव से चीन ने अपने हाथ खींच लिए है और पाकिस्तान का साथ छोड़ दिया है। अब पाकिस्तान की आर्थिक व्यवस्था ब्लैकलिस्ट के साए में है।

अगर जून तक पाकिस्तान ने टेरर फंडिंग को खत्म करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार नहीं की तो उसका नाम ब्लैकलिस्ट में शामिल देशों में शुमार कर लिया जाएगा। इस जबरदस्त असर पाकिस्तान की इकॉनोमी पर पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान को अबतक चीन, सऊदी अरब और तुर्की का समर्थन था। सऊदी ने पहले ही अपने कदम वापस खींच लिए थे और चीन भी अब पीछे हट गया है। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार द डॉन के मुताबिक चीन ने पाकिस्तान को इस बात की सूचना दे दी है कि अब वह इस मामले से बाहर रहने वाला है। चीन ने कहा है कि असफल होने वाले प्रस्ताव को अपना समर्थन देकर वह अपनी स्थिति को कमजोर नहीं बना सकता।
पाकिस्तान को FATF की ग्रे सूची में डाला गया
दरअसल मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग के मसले पर रोक न लगाने वाले देशों की रेटिंग तैयार करने का काम फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स तैयार करता है। ये इसी आधार पर ग्रे और ब्लैक लिस्ट तैयार करता है, लेकिन यह किसी भी देश पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा सकता है। हालांकि इसका असर उस देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ना लाजिमी है। इससे पाकिस्तान की वित्तीय साख खराब हो गई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार से कर्ज हासिल करना उसके लिए मुश्किल हो गया है। विदेशी निवेशकों और कंपनियों की पाकिस्तान में दिलचस्पी कम हो गई है।












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