चीन में फिर दोहराया जाएगा इतिहास, राष्ट्रपति Xi Jinping का भी होगा तख्तापलट?

Xi Jinping News: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस बार ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। वह दुनिया की नजरों और सार्वजनिक दुनिया से गायब हैं। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर शी जिनपिंग कहां हैं और क्या कर रहे हैं? क्या उनकी सत्ता पर खतरा मंडरा रहा है या फिर वह कुछ बड़ा करने की योजना बना रहे हैं। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि चीन में शी का राज अब खत्म हो गया है।

चीन में मीडिया पर पाबंदी है और सीमित सूचनाएं ही दुनिया तक पहुंचती है। ऐसा नहीं है कि जिनपिंग के ऊपर यह खतरा पहली बार मंडरा रहा है, इससे पहले भी कई बार उन्हें सत्ता से हटाने की कोशिश हो चुकी है।

Xi Jinping

Xi Jinping के खिलाफ है PLA?

चीन में सत्ता की ताकत कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना यानी CPC के पास है। शी जिनपिंग की इससे पहले हत्या की कोशिश 6 बार हो चुकी है। जिनपिंग ने सत्ता की चाबी अपने पास रखने के लिए पहले अपने कई विरोधियों को बेरहमी से कुचलने का काम किया है। अब रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पहले पीएलए (PLA) के जनरलों का सफाया करने वाले जिनपिंग की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अब उन्हें पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जनरल से ही चुनौती मिलने लगी है।

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Xi Jinping से पहले भी चीन में रहा है तख्तापलट का इतिहास

चीन के इतिहास में तख्तापलट की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। पिछले 70 सालों में कम्युनिस्ट सरकार ने सत्ता से लेकर प्रशासन तक में अपनी पकड़ बना रखी है। 1949 में गणतंत्र बनने के बाद से ही चीन में कम्युनिस्ट शासन के खिलाफ कई आंदोलन हो चुके हैं। चीन में गणतंत्र बनने के बाद 1954 में तख्तापलट की कोशिश हुई थी। इसके बाद चीन में दूसरी घटना 1957 में हुई, जब दक्षिणपंथी विरोधी आंदोलन चलाया गया था। इसके बाद 1959 और 1961 के बीच, लियु शाओकी ने माओ जेदांग के खिलाफ तख्तापलट की कोशिश की गई थी। 1980 के दशक की शुरुआत में डेमोक्रेटिक वॉल मूवमेंट और 1986 में शंघाई छात्र आंदोलन हुए थे, लेकिन कम्युनिस्ट सत्ता इसे दबाने में कामयाब रही।

शी जिनपिंग के खिलाफ बढ़ रहा असंतोष

2012 से जब से शी चीन में सत्ता के सभी साधनों पर बैठे हैं। उन्होंने सत्ता संभालने के साथ ही अपने विरोधियों का सफाया करना शुरू कर दिया। पहले पीएलए के टॉप कमांडरों को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में डाल दिया गया। कम्युनिस्ट चीन में सत्ता का हस्तांतरण लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत ही नहीं होता है। कम्युनिस्ट शासन में सत्ता पर बने रहने के लिए मानवाधिकार संगठनों को कुचलना और विरोध की हर आवाज को दबाना आम बात है। शी के खिलाफ लगातार लोगों का असंतोष बढ़ रहा है और पार्टी से लेकर पीएएलए तक में उनके खिलाफ आवाज उठ रही है।

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