China News: चीन में एक और टॉप मिलिट्री कमांडर पर चला शी जिनपिंग का चाबुक, भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में डाला
China News: चीन में भ्रष्टाचार के आरोप में एक और टॉप मिलिट्री कमांडर को बर्खास्त कर जेल में डाल दिया गया है। सिंगल पार्टी डेमोक्रेसी वाले देश में इस फैसले को जियो-पॉलिटिकल मामलों के विशेषज्ञ सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन के तौर पर नहीं देख रहे हैं। इसे सत्ता के केंद्रीकरण और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अपने सामने सिर उठाने वाली चुनौती को कुचलने के प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है। चीन की सरकारी मीडिया की ओर से पीएलए (PLA) के टॉप कमांडर एडमिरल मिया हुओ को चीन ने सेंट्रल मिलिट्री कमीशन और नेशनल पीपुल्स कांग्रेस दोनों से हटाने की सूचना जारी की गई है।
फिलहाल यह स्पष्ट तौर पर नहीं बताया गया है कि एडमिरल मिया हुओ कहां हैं, लेकिन माना जा रहा है कि उन्हें जेल में डाल दिया गया है। यही वजह है कि इस बार शांगरी-ला डायलॉग में चीन की तरफ से कोई भी टॉप कमांडर या प्रतिनिधि हिस्सा नहीं ले रहा हैं। एशिया-प्रशांत क्षेत्र की यह सबसे महत्वपूर्ण बैठक मानी जाती है।

China में भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और सरकारी मीडिया दोनों की ओर से भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का दावा किया जाता रहा है। एडमिरल मिया हुओ पर हुए एक्शन के पीछे भी भ्रष्टाचार को ही वजह बताया गया है। हालांकि, पिछले तीन वर्षों में चीन के दो रक्षा मंत्री, कई जनरल और हाई रैंकिंग कमांडरों के ऊपर इस तरह की सख्त कार्रवाई हो चुकी है। ली शांगफु (पूर्व रक्षा मंत्री),वेई फेंघे (पूर्व रक्षा मंत्री) और पूर्व रॉकेट फोर्स कमांडर को भी भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में डाला गया है या पद से बर्खास्त किया गया है। शी जिनपिंग के कार्यकाल में लगातार हो रही ऐसी कार्रवाई के पीछे सत्ता के केंद्रीकरण की मंशा भी एक वजह मानी जाती है।
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China में अपने विरोधियों को खत्म कर रहे हैं शी जिनपिंग?
चीन के अंदर की राजनीति और सरकारी फैसलों की जानकारी बहुत सीमित स्तर तक ही दुनिया के सामने आती है। चीन में सरकारी मीडिया का प्रभुत्व है और आम लोगों के पास जानकारी का सर्वमान्य माध्यम भी वही है। हालांकि, अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशों की मीडिया रिपोर्ट्स में अक्सर ही चीन में प्रतिरोध की आवाज को कुचलने के दावे किए जाते हैं।
इटली की मीडिया आउटलेट Difesa में प्रकाशित 2022 की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि शी जिनपिंग को तीसरा कार्यकाल दिए जाने वाली बैठक में उनके खिलाफ विरोध के स्वर उठे थे। जिनपिंग विरोध की हर आवाज को बंद करने के लिए पिछले एक दशक में 50 लाख से ज्यादा लोगों पर भ्रष्टाचार विरोधी जांच बिठा चुके हैं।
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