'युद्ध की तैयारी कर रहा चीन', शी जिनपिंग का 10 दिन में चौथी बार ऐलान, अमेरिका और चीन में शीतयुद्ध शुरू?

शी ने अपने भाषण में सीधे तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका की आलोचना की है। उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों को चीन की मौजूदा समस्याओं का प्रमुख कारण बताया है।

US-China Cold War

US-China Cold War: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पिछले 10 दिनों में चौथी बार कहा है, कि उन्होंने अपनी सेना को युद्ध की तैयारी करने का आदेश दे दिया है। मार्च में चीन की संसद और कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष राजनीतिक सलाहकार निकाय की वार्षिक बैठक में, शी जिनपिंग ने चार अलग-अलग भाषणों के माध्यम से युद्ध की तैयारी का ऐलान किया है। इसके साथ ही, शी जिनपिंग ने चीन के रक्षा बजट में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि की भी घोषणा की है, जो पिछले एक दशक में दोगुनी हो गई है। इसके अलावा चीन, विदेशी अनाज के आयात पर अपनी निर्भरता कम करने की योजना बना रहा है और हाल के महीनों में, बीजिंग ने नए सैन्य सर्विंलांस कानून, ताइवान से जलडमरूमध्य के शहरों में नए हवाई हमले ठिकाने और देश भर में नए "नेशनल डिफेंस मोबिलाइज़ेशन" कार्यालयों का अनावरण किया है। चीन की ये हरकतें किसी बड़े युद्ध का आहट दे रही है और आशंका है, कि चीन अब ताइवान पर हमला करने की फाइनल प्लानिंग में लग गया है। वहीं, कई एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अमेरिका बार बार चीन को 'प्रतियोगी' बता रहा है, जो अब एक बेमानी शब्द है, असल में अमेरिका और चीन के बीच कोल्ड वार की शुरूआत हो चुकी है।

काफी तेजी से बदल रहा है बीजिंग?

क्या चीन किसी युद्ध की तैयारी कर रहा है, इसको लेकर निश्चित तौर पर फिलहाल कुछ कहा नहीं जा सकता है, लेकिन बीजिंग में बहुत कुछ ऐसा बदल गया है, जिसे दुनिया भर के नीति निर्माता और कारोबारी नेता नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। अगर शी जिनपिंग कहते हैं, कि वह युद्ध के लिए तैयार हैं, तो उनकी बात न मानना मूर्खता होगी। सबसे पहला संकेत ये है, कि इस साल 1 मार्च को चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस और चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कान्फ्रेंस की बैठकें, जो एक ही दिन में दो सत्रों में आयोजित की जाती है, उसमें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने एक लेख प्रकाशित किया। जिसमें साफ और स्पष्ट शब्दों में लिखा गया, कि "हम शी जिनपिंग के नेतृत्व में सेना को मजबूत और जीतने लायक कर रहे हैं। हम जीत के साथ आगे बढ़ेंगे।"

सैन्य तैयारी में जुट गया है चीन

इस लेख में "जून झेंग" का नाम प्रकाशित किया गया था, जो चीन की 'सैन्य सरकार' का प्रतिनिधित्व करता है और एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये नाम शायद चीन की मिलिट्री कमीशन के लिए प्रयोग किया गया हो सकता है। इस लेख में कहा गया, कि "राष्ट्रीय रक्षा और सेना के आधुनिकीकरण में तेजी लाई जानी चाहिए।" इसने मिलिट्री-सिविल फ्यूजन को तेज करने का भी आह्वान किया। और इस लेख में कहा गया, कि शी जिनपिंग की नीति के लिए निजी कंपनियों और नागरिक संस्थानों को चीन के सैन्य आधुनिकीकरण के प्रयासों की सेवा करने की आवश्यकता है। जाहिर तौर पर, अगर कोई इन बदलावों को हल्के में लेता है, तो वो उसकी मूर्खता होगी। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी युद्ध की तैयारी में जुटी हुई है और अपने आरक्षित बलों को सक्रिय कर रही है। इस तैयारी के तहत युद्ध की स्थिति में लड़ाकू सैनिकों को फिर से भरने के लिए एक प्रणाली को संस्थागत बनाने की कोशिश चल रही है। खासकर, चीन ने यूक्रेन युद्ध को देखते हुए कई तरह के बदलाव किए हैं और सबक सीखा है।

कई राज्यों में खोले युद्ध सेंटर्स

दिसंबर के बाद से, चीनी सरकार ने बीजिंग, फ़ुज़ियान, हुबेई, हुनान, इनर मंगोलिया, शेडोंग, शंघाई, सिचुआन, तिब्बत और वुहान सहित देश भर में कई नेशनल डिफेंस मोबिलाइजेशन ऑफिस खोले हैं, जिसके जरिए सैनिकों की भर्ती की जा रही है। इन जगहों पर सैनिकों को स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती है। चीनी राज्य मीडिया के मुताबिक, इन जगहों पर एयर-राइड शेल्टर और कम से कम एक "युद्धकालीन आपातकालीन अस्पताल" का निर्माण या फिर उनको अपग्रेड करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मार्च में, फ़ुज़ियान और प्रांत के कई शहरों ने विदेशी आईपी एड्रेस को सरकारी वेबसाइटों तक पहुंचने से रोकना शुरू कर दिया। माना जा रहा है, कि ये कोशिश युद्ध की स्थिति में चीनी सरकार की किसी भी तैयारी तक विदेशी पहुंच को रोकने के लिए किया जा रहा है। यूएस-चायना कमीशन, जो अमेरिकी कांग्रेस का एक थिंक टैंक है, उसके एक सदस्य जैकब हेलबर्ग ने ट्वीटों की एक श्रृंखला में दावा किया है, कि "यूएस-चायना के बीच अब शीत युद्ध शुरू हो गया है।"

क्या शुरू हो चुका है शीत युद्ध?

जैकब हेलबर्ग ने अपने ट्वीट में लिखा है, कि "चीन युद्ध की तैयारी कर रहा है। शी जिनपिंग ने पिछले 10 दिनों में 4 बार ऐसा कहा है। इस बीच, अधिकांश अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा प्रोफेशनल्स अभी भी शीत युद्ध के बजाय अमेरिका-चीन संबंधों को एक "प्रतिस्पर्धा" के रूप में बताने पर जोर देते हैं। और अगर द वायर्स ऑफ वार (प्रस्तावना) के नजरिए से इसे देखें, तो इस संबंध को प्रतियोगी बताना खतरनाक कथन है।" उन्होंने लिखा है, कि "इस जियो पॉलिटिकल संघर्ष को सिर्फ एक 'प्रतियोगिता' बताना एक फैशन बन गया है और इस शब्द को लोग फैशनेबल अंदाज में इस्तेमाल करते हैं। यह एक गलती है। प्रतियोगिता शब्द, किसी खेल, किसी व्यापार या आर्थिक बाजारों के लिए है। हालांकि, ये प्रतियोगिताएं नियमों से बंधी होती हैं, रेफरी उनपर नजर रखते हैं और अंततः विजेता और हारने वाले की घोषणा की जाती है। लेकिन, अमेरिका और चीन के बीच भू-राजनीतिक प्रतियोगिता आर्थिक प्रतिस्पर्धा के दायरे तक ही सीमित नहीं है और न ही यह पारस्परिक रूप से किसी नियमों के तहत इसे बांधा गया है। उन्होंने लिखा है, कि इस संघर्ष को 'प्रतियोगिता' शब्द देना, उस तात्कालिकता और जो चीजें दांव पर लगी हैं, उसके महत्व को कम करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है, कि चीन जो कर रहा है, उसे अब गंभीरता से लेने की जरूरत है और अब ये सिर्फ प्रतियोगिता का मामला नहीं है, बल्कि अब एक नया 'शीत युद्ध' शुरू हो चुका है।

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