China News: 'दादा' शी जिनपिंग ने कैसे लड़ी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई? क्या भारत सीख सकता है?
जब से शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति पद ग्रहण किया है, उसके बाद से चीन में काफी तेजी से भ्रष्टाचार विरोधी अभियान शुरू किया गया और भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों में कम से कम 44 लाख लोगों की सख्त जांच की गई है।
Xi Jinping latest news: एक के बाद एक नाम, एक के बाद एक वरिष्ठ राजनेता... हाल के हफ्तों में चीन की अदालतों में भ्रष्टाचार के खिलाफ 'अंतिम मुहिम' चलाया गया है और एक के बाद एक हाई-प्रोफाइल चेहरों को सख्ततम सजा सुनाई गई। चीन की अदालतों ने भ्रष्टाचार विरोधी ये महान अभियान उस वक्त चलाया गया है, जब शी जिनपिंग तीसरी बार देश के राष्ट्रपति बनने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं और कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस की हर पांच सालों पर होने वाली बैठक में शी जिनपिंग के नाम पर लगातार तीसरी बार मुहर लगनी है। लेकिन, अचानक चीन की अदालतों में नेताओं और अधिकारियों को उम्रकैद से लेकर फांसी की सजा क्यों दी जाने लगी, आखिर चीन की राजनीति कैसी होती है और शी जिनपिंग कैसे चीन के एकमात्र शहंशाह बन गये, आइये समझते हैं।

शी जिनपिंग का अभियान
शी जिनपिंग के अभियान की तीव्रता देश के इतिहास में लगभग बेजोड़ है। साल 2012 में चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का सर्वोच्च महासचिव पद पर नियुक्त होने के साथ ही उन्होंने भ्रष्टाचार से लड़ाई को अपनी प्राथमिकता बताया और वो बताते हैं, कि उन्होंने करप्शन के खिलाफ लड़ाई में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। चीन के सार्वजनिक सुरक्षा के पूर्व उप-मंत्री सन लिजुन को 23 सितंबर को 'निलंबित' मौत की सजा सुनाई गई है। उनपर रिश्वत स्वीकार करने और अपना व्यक्तिगत काम निकालने के लिए अपनी राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करने का आरोप लगा। हालांकि, कोर्ट ने सन लिजुन को थोड़ी सी राहत ये कहकर दी है, कि अगर अगले दो सालों में उनका आचरण सही रहता है, तो उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदला जा सकता है। चीन में इस तरह की सजा को 'निलंबित मौत की सजा' कहा जाता है और अपने विरोधियों को तोड़ने के लिए इसका जमकर इस्तेमाल किया जाता है। अगर विरोधी टूट गया, तो उसकी जान बख्स दी जाती है।

अब थम जाएगा ये अभियान
चीन की राजनीति को समझने वाले एक्सपर्ट्स का मानना है, कि सन लिजुन को सजा मिलने के बाद फिलहाल भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त अभियान रूक जाएगा। लेकिन, इस अभियान के थमने से पहले पूर्व न्याय मंत्री फू झेंकहुआ, जियांग्सू प्रांत में राजनीतिक और कानूनी मामलों के पूर्व प्रमुख वांग लाइक, तीन पूर्व पुलिस प्रमुख और अनुशासन निरीक्षण आयोग के पूर्व प्रमुख लियू यानपिंग जैसे रसूखदारों को भी कोर्ट फांसी या उम्रकैद की सजा सुना चुका है। 16 अक्टूबर को कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस की बैठक होने वाली है, जिसमें पिछले 10 सालों से कुर्सी पर विराजमान शी जिनपिंग को तीसरी बार राष्ट्रपति चुनाव जीतने का ऐलान किया जाएगा और अब इसमें कोई शक नहीं है, कि शी जिनपिंग का पॉजिशन पहले से अत्यधिक मजबूत हो जाएगा। जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ब्रूस डिक्सन ने अल जज़ीरा को बताया कि, "हाल ही में घोषित जेल की सजा से संकेत मिलता है, कि शी जिनपिंग पार्टी कांग्रेस से पहले कमजोर सिरों को बांध रहे हैं।" उन्होंने कहा कि, "जिन लोगों ने अनुमान लगाया है कि शी जिनपिंग के नेतृत्व का विरोध है, ये वाक्य स्पष्ट करते हैं कि वह मजबूती से इसके प्रभारी हैं।"

चीन में भ्रष्टाचार असामान्य नहीं
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (सीपीआई) के अनुसार, जो सार्वजनिक क्षेत्र के भ्रष्टाचार के स्तरों के आधार पर अलग अलग देशों को रैंक करता है, उसमें चीन ने 2021 में 100 में से 45 अंक हासिल किए, जो एशिया प्रशांत क्षेत्र के लिए औसत है। ट्रांसपेरेंसी ने कहा कि, चीन के स्कोर में 2014 के बाद से, जो "राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मजबूत भ्रष्टाचार-विरोधी बयानबाजी के अनुरूप है" उसमें नौ अंकों का सुधार हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, शी जिनपिंग ने "ऊपर से नीचे के नियंत्रणों को मजबूत किया और भ्रष्टाचार के कुछ सबसे बेशर्म रूपों पर शिकंजा कसा" है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, साल 2014 से 2021 तक चीन में करीब 10,000 लोग, जिनपर भ्रष्टाचार का संदेह था, वो सजा से बचने के लिए विदेश भाग गये, लेकिन उन्हें वापस चीन लाया गया और उनके अवैध लाभ में से 20 बिलियन युआन (लगभग 2.9 अरब डॉलर) से अधिक की वसूली की गई।

शी जिनपिंग का सख्त अभियान
जीरो टॉलरेंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब से शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति पद ग्रहण किया है, उसके बाद से चीन में काफी तेजी से भ्रष्टाचार विरोधी अभियान शुरू किया गया और भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों में कम से कम 44 लाख लोगों की सख्त जांच की गई है। चीन में भ्रष्टाचार मामलों की जांच करने वाली शीर्ष संस्था 'सेन्ट्रल कमीशन फॉर डिसिप्लीन इंस्पेक्शन' यानि (CCDI) ने कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर भी भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाया। जिसको लेकर कहा गया, कि सीसीडीआई का ये अभियान पार्टी के अंदर नीचे से लेकर ऊपर तक शी जिनपिंग के तमाम विरोधियों का सफाया करना है। लेकिन, सीसीडीआई ने अपनी कार्रवाई को निष्पक्ष बताया और शी जिनपिंग ने कहा कि, सीसीडीआई की कार्रवाई सभी पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए एक समान है। सीसीडीआई की कार्रवाई को 'बाघ और मक्खी' कहकर स्वागत किया, यानि ये पार्टी के उच्च अधिकारी, जो खुद को बाघ समझते हैं, उनका भी शिकार करता है और छोटे से छोटे सिविल सेवकों का भी शिकार करता है। सन लिजुन से पहले पार्टी के झोउ योंगकांग, जिन्हें बाघ कहा जाता था, उन्हें 2014 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी और झोउ योंगकांग पार्टी के पहले वरिष्ट अधिकारी थे, जिन्हें शी जिनपिंग ने नाप दिया था।

शी जिनपिंग की मंशा पर सवाल
लेकिन, सीसीडीआई की अथक कार्रवाई ने शी जिनपिंग की मंशा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कई एक्सपर्ट्स का मानना है, कि इस मुद्दे में शी जिनपिंग का व्यक्तिगत निवेश भ्रष्टाचार की समस्या से निपटने की वास्तविक इच्छा से उपजा है, जबकि, दूसरों का तर्क है कि राष्ट्रपति इसे पार्टी पर अपने अधिकार को मजबूत करने के बहाने के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं और हर उस नेता को अपने रास्ते से 'विश्वासघाती और गद्दार' का सर्टिफिकेट देकर हटा रहे हैं, जो भविष्य में उनके पैरों में चुभ सकते थे। हांगकांग बैपटिस्ट यूनिवर्सिटी में गवर्नमेंट एंड इंटरनेशनल स्टडीज के प्रोग्राम डायरेक्टर सैमसन यूएन ने कहा कि "भ्रष्टाचार विरोधी अभियान, अपनी होनहार बयानबाजी के बावजूद, पार्टी को बचाने और भ्रष्टाचार को खत्म करने से ज्यादा जनता के विश्वास को बहाल करने के बारे में है।" उन्होंने कहा कि, "भ्रष्टाचार को चीन के आर्थिक विकास के साथ जटिल तरीके से जोड़ा गया है।"

जिनपिंग की कार्रवाई पर जनता की सोच
अब सवाल ये उठते हैं, कि क्या शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को जनता का कितना समर्थन हासिल है, तो अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ चीनी नागरिकों का मानना है, कि शी जिनपिंग सही कर रहे हैं। बीजिंग के रहने वाले एक निवासी ने अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि, शुरूआत में उन्हें इस बात पर संदेह था, कि नई झाड़ू ज्यादा साफ करती है, और निश्चित तौर पर हम सभी को यही लग रहा था, कि ये बातें, कि हम भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म कर देंगे, ये कोरी बातें हैं और ये आगे बढ़ने वाला नहीं है। लेकिन, शी जिनपिंग अपनी बातों पर खरे उतरे हैं और उन्होंने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए काफी अच्छा काम किया है। उन्होंने कहा कि, 'मुझे याद है कि उन दिनों में भ्रष्ट अधिकारी हर जगह थे, और सरकार उनके खिलाफ कुछ नही्ं करती थी। लेकिन, जब से शी दादा (चीनी राष्ट्रपति के लिए संबोधन का एक प्यारा रूप) नेता बने, तब से चीन में भ्रष्टाचार का कोई रूप नहीं रह सकता।"

कब तक जारी रहेगा ये अभियान?
अब इसे प्रोपेगेंडा कहें या फिर सच्चाई, मगर चीन की मीडिया में इसे इसी तरह से प्रचारित किया जाता है। पार्टी शिक्षा से लेकर सोशल मीडिया तक, कम्युनिस्ट पार्टी यह तर्क देती रही है कि जब तक भ्रष्टाचार से निपटा नहीं जाएगा, आर्थिक असमानता बनी रहेगी, और शी जिनपिंग एकमात्र व्यक्ति हैं जो इस काम को करने के लिए तैयार हैं। लेकिन, एक हकीकत ये भी है, कि शी जिनपिंग के पहली बार राष्ट्रपति बनने के 10 साल बाद भी भ्रष्टाचार व्याप्त है और कई लोग आश्चर्य करते हैं, कि आखिर राष्ट्रपति शी जिनपिंग का ये अभियान आखिर कब तक चलने वाला है। जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के डिक्सन ने कहा कि, "भ्रष्टाचार का लगातार खुलासा यह दर्शाता है कि समस्या कितनी व्यापक है, इसे पूरी तरह से जड़ से खत्म करना कितना मुश्किल है, और सीसीपी पर अपने नियंत्रण को मजबूत करने के लिए शी इस तंत्र का उपयोग करने के लिए कितने दृढ़ हैं।"












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