चीन के मिसाइल इंडस्ट्री का हाल बेहाल, बस झूठ का फुफकारता है ड्रैगन

चीन एयरोस्पेस स्टडीज इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में चीन की मिसाइल इंडस्ट्री को लेकर कई चौंकाने वाली बातें कही गई हैं।

बीजिंग, जून 01: विश्व में अपना दबदबा कायम करने के लिए चीन लगातार नये नये हथियारों का निर्माण कर रहा है। खासकर मिसाइल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में चीन काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी रॉकेट फोर्स ने पिछले कुछ सालों में हर तरह के हथियार बनाएं हैं और अभी भी लगातार चीन अलग अलग तरह के रेंज वाले मिसाइल्स के निर्माण में लगा हुआ है। खासकर चीन की कोशिश साधारण युद्ध और न्यूक्लियल युद्ध के देखते हुए अलग अलग तरह के मिसाइल निर्माण को लेकर है। लेकिन, जब बैलिस्टिक मिसाइलों की बात आती है तो चीन लगातार काफी पिछे पिछड़ता हुआ नजर आ रहा है और ध्यान से देखने पर पता चलता है कि चीन बैलिस्टिक मिसाइलों का निर्माण तो भले कर रहा है, लेकिन जिस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल चीन कर रहा है, वो काफी पुराना है और चीन को अब नई टेक्नोलॉजी कहीं से मिल नहीं रही है।

बैलिस्टिक मिसाइल कमजोरी

बैलिस्टिक मिसाइल कमजोरी

चीन का दावा है कि उसके पास विश्व में सबसे ज्यादा विध्वंसक हथियार हैं। खासकर डीएफ-21डी एंटी शिप बैलिस्टिक मिसाइल, डीएफ-26 इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल और डीएफ-41 इंटरकन्टिनेन्टल बैलिस्टिक मिसाइल को लेकर चीन का कहना है कि ये किसी भी क्षेत्र में तबाही मचाने के लिए काफी हैं। वहीं, चीन ने डीएफ-21डी बैलिस्टिक मिसाइल को 'कैरियर किलर' का दर्जा दिया है। यानि वो बैलिस्टिक मिसाइल, जिससे समुन्द्र में एयरक्राफ्ट कैरियर को तबाह कर दे। वहीं, चीन का दावा है कि वो सबसे ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलों की टेस्टिंग करता है। और अगर ध्यान दें तो पता चलता है कि 2017 में जहां चीन के पास 29 ब्रिगेज था वहीं फरवरी 2020 में चीन ने 40 मिसाइल ब्रिगेज तैयार कर लिए थे। वहीं, 2019 में चीन ने अमेरिका से कहीं ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलों की टेस्टिंग की थी। लेकिन, चीन की बैलिस्टिक मिसाइलों को लेकर ये दावे किसी शोर से कम नहीं हैं। और एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन भले ही कितने भी बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण कर लें लेकिन चीन की कमियां भी परीक्षणों के साथ ही बाहर आ गई हैं और चीन की सबसे बड़ी कमी है टेक्नोलॉजी का नहीं होना।

बैलिस्टिक मिसाइलों में पिछड़ता चीन

बैलिस्टिक मिसाइलों में पिछड़ता चीन

अमेरिका में स्थित चीन एयरोस्पेस स्टडीज इंस्टीट्यूट, जो अमेरिका की डिफेंस फोर्स को मदद करती है, उसने चीन के बैलिस्टिक सिस्टम को लेकर एक रिपोर्ट दिया है। जिसमें चीन की बैलिस्टिक मिसाइलों को लेकर कई बड़ी कमजोरियों को सार्वजनिक किया गया है। इस रिपोर्ट के लेखक एलेक्स स्टोन और पीटर वुड ने लिखा है कि ' चीन की बैलिस्टिक मिसाइल उद्योग ने पिछले 20 सालों में महत्वपूर्ण रूप से अपने आप को आधुनिक बनाया है, चीन में परीक्षण की तेज रफ्तार ने यह भी साबित कर दिया है कि उसके मिसाइलों में विविधता नहीं है। चीन की मीडिया भले ही अपने मिसाइलों को लेकर बड़े बड़े दावे कर ले और प्रोपेगेंडा फैलाए, लेकिन हकीकत यही है कि चीन के पास मॉडर्न टेक्नोलॉजी का अभाव है और चीन अपने प्रतिद्वंदियों की तुलना में मिसाइल निर्माण में काफी पिछड़ गया है।

लक्ष्य भेदने में चीनी मिसाइल की कमियां

लक्ष्य भेदने में चीनी मिसाइल की कमियां

रिपोर्ट में दोनों ने लिखा है कि 'इसमें कोई शक नहीं है कि चीन ने पीएलए को मिसाइलों से भर दिया है और चीन अभी भी लगातार मिसाइलों का निर्माण कर रहा है लेकिन चीन के मिसाइलों के पास पिन प्वाइंट मारक क्षमता का अभाव है। चीन की मिसाइलों के पास सर्कुलर एरर 5 किलोमीटर का है लेकिन बात अगर चीन के प्रतिद्वंदियों की करें तो उनके पास 300 फीसदी ज्यादा निशाने पर वार करने की क्षमता है। चीन अपने मिसाइलों को अभी भी साल 2000 के टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है जबकि चीन के प्रतिद्वंदियों के पास सामरिक क्षमता से लैस विमान 500 फीसदी ज्यादा सटीक हैं। सीएएसआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 'इसमें शक नहीं है कि चीन ने अपनी क्षमताओं को काफी ज्यादा बढ़ाने का काम किया है लेकिन फिर भी चीन के काम करने का तरीका 40 साल पुराना है'। चीन के पास बैलिस्टिक मिसाइलों को लेकर उन्नत डिजाइनों और उत्पादन क्षमता का भारी अभाव है। दरअसल, रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण कर चीन अपने दुश्मनों को दहशत में रखना चाहता है लेकिन चीन के मिसाइल आज के दौर के मुकाबले पिछड़ गये हैं।

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