VIDEO: साउथ चाइना सी में टेंशन बढ़ाने के लिए चीन ने उतारे न्यूक्लियर बॉम्बर्स
नई दिल्ली। चीन ने विवादित साउथ चाइना सी पर न्यूक्लियर बॉम्बर्स उतार कर अमेरिका और इस क्षेत्र में दावा करने वाले देशों को खुलेआम चेतावनी दी है। चीन ने साउथ चाइना सी में पहली बार इस प्रकार का भड़काऊ कदम उठाया है, जिससे इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने के पूरी-पूरी संभावना है। बीबीसी के मुताबिक, चीन ने इस क्षेत्र में लॉन्ग रेंज वाले H-6K ने भी मीलिट्री ड्रिल में हिस्सा लिया है। साउथ चाइना सी में हाल ही में चीन ने सबसे बड़ी मिलिट्री ड्रिल कर अमेरिका समेत अन्य देशों को चेताया था। साउथ चाइना सी एशिया में ट्रेड के लिए प्रमुख समुद्र मार्ग है, जिस पर 6 अलग-अलग देश अपने हक की बात करते आए हैं।

साउथ चाइना सी में चीन का यह कदम आने वाले टाइम में जबरदस्त टेंशन का काम करेगा। हालांकि, चीन के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि इस क्षेत्र में किस जगह उनके न्यूक्लियर बॉम्बर्स को तैनात किया गया है। एक H-6K के पायलट ने कहा कि इसकी तैनाती से हमारे साहस को मजबूती मिलेगी और यह एक वास्तविक युद्ध में हमारी क्षमताओं को बढ़ाएगा।
चीन सरकार के मुखपत्र पीपुल्स डेली चाइना ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि साउथ चाइना सी में उनके H-6K समेत अन्य बॉम्बर्स टेक ऑफ और लैंडिंग की ट्रेनिंग कर रहे हैं। चीन ने अपने बॉम्बर्स को ताइवान के वूडी आइलैंड पर तैनात किया है, जिसे चीन योंगक्सिंग आइलैंड कहता है।
एशिया और इंटरनेशनल मामलों के विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले टाइम में चीन साउथ चाइना सी के अलग-अलग द्वीपों पर अपने बॉम्बर्स को तैनात कर लेगा। एशिया मैरिटाइम ट्रांसपरेंसी इनिशिएटिव (AMTI) की मानें तो चीन ने जो H-6K तैनात किए हैं, वे ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी तट और अमेरिका के गुआम (जापान में अमेरिकी मिलिट्री बेस) पर अटैक करने की क्षमता रखता है।
चीन की इस टेंशन बढ़ाने वाली हरकत के बाद पेंटागन के स्पोक्सपर्सन लेफ्टिनेंट कर्नल क्रिस्टोफर लोगन ने कहा है कि चीन लगातार विवादित साउथ चाइना सी में टेंशन और अस्थिरता को बढ़ावा देने के लिए अपनी मिलिट्रिलाइजेशन को बढ़ाने में लगा है। सन् 1947 से ही चीन लगभग पूरे साउथ चाइना सी पर अपना दावा ठोकता आया है।












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