चीन का यह पावरफुल टेलीस्कोप 'सूर्य' से लेगा टक्कर, पूरे ब्रह्मांड पर होगी 'ड्रैगन' की नजर, NASA परेशान
चीन का यह विशाल टेलीस्कोप सूर्य की भयंकर लपटों का अध्ययन करेगा। कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) का अध्ययन करने के लिए टेलीस्कोप सूर्य की हर गतिविधि पर अपनी नजर रखेगा।
बीजिंग, 22 अगस्त : चीन अंतरिक्ष विज्ञान और अन्य तकनीकी क्षेत्र में तेजी से आगे निकलता जा रहा है। उसकी इस गति से अमेरिका जैसे ताकतवर देश भी घबरा जाता है। खबर है कि, चीन दुनिया के सबसे बड़े टेलीस्कोप (दूरबीन) का निर्माण कर रहा है। यह विशाल टेलीस्कोप सूर्य का करीब से अध्य्यन करेगा। चीन का इस विशाल टेलीस्कोप को बनाने का उद्देश्य कोरोनल मास इजेक्शन की समझ में सुधार करना है। जानकार बताते हैं कि, सूर्य के कोरोनल मास इजेक्शन से पृथ्वी और अंतरिक्ष में इसका गहरा असर हो सकता है।

चीन की तकनीक अमेरिका को दे रहा टक्कर
दाओचेंग सोलर रेडियो टेलीस्कोप (DSRT-The Daocheng Solar Radio Telescope) दक्षिण पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत में एक पठार पर निर्माणाधीन है। जानकारी के मुताबिक, दाओचेंग सोलर रेडियो टेलीस्कोप में 313 डिश को लगाया जा रहा है, जिनमें से प्रत्येक का व्यास 19.7 फीट (6 मीटर) होगा, जो 1.95 मील (3.14 किलोमीटर) की परिधि के साथ एक वृत का निर्माण करेगा। बता दें कि,सूरज से निकलने वाली लपटों को ही कोरोनल मास इजेक्शन कहा जाता है। कोरोनल मास इजेक्शन वो घटना है, जिसमें सूर्य के कोरोना से प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा बाहर निकलता है। सूर्य अरबों टन कोरोनल सामग्री (लपटों) को बाहर निकाल सकता है।

कोरोनल मास इजेक्शन किसे कहते हैं?
कोरोनल मास इजेक्शन (What is Coronal mass ejection) सूर्य से बाहर की ओर 250 किलोमीटर प्रति सेकेंड की धीमी रफ्तार से लेकर लगभग 3000 किमी प्रति सेकेंड की तेज रफ्तार से यात्रा कर सकते हैं। पृथ्वी की तरफ आने वाला सूर्य की लपटें कम से कम 15-18 घंटों में पहुंच सकती हैं।

चीन का यह विशाल टेलीस्कोप सूर्य का अध्ययन करेगा
चीन का यह विशाल टेलीस्कोप सूर्य की भयंकर लपटों का अध्ययन करेगा। कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) का अध्ययन करने के लिए टेलीस्कोप सूर्य की हर गतिविधि पर अपनी नजर रखेगा। भौतिक विज्ञान के जानकार बताते हैं कि, CME मतलब सूर्य की भयंकर लपटें जब तेजी से धरती की ओर तूफान बनकर आती है तो इससे धरती प्रभावित तो होती ही है, लेकिन इससे सबसे अधिक खतरा इंसान के बनाए हुए उपकरणों को होता है। जानकारी के मुताबिक, जब सूर्य का तूफान धरती पर आता है तो, इससे मानव निर्मित उपग्रहों, अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं।

चीन का विशाल टेलीस्कोप
बता दें कि, साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने बताया कि विशाल टेलीस्कोप इस साल के अंत तक पूरा होने वाला है। इस निर्माण के पूरा होते ही चीन अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल कर लेगा।

चीन अमेरिका को दे रहा है कड़ी टक्कर
बता दें कि, अभी दुनिया का सबसे बड़ा अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का जेम्स वेब टेलीस्कोप है, जो 2021 में अंतरिक्ष की गहराइयों के रहस्य को उजागर करने के मकसद से लॉन्च किए गए सबसे बड़े और शक्तिशाली टेलीस्कोप (Telescope) ने ब्रह्मांड की पहली रंगीन तस्वीर को कैद किया था। कहा जा रहा है कि जेम्स वेब टेलीस्कोप लोगों के ब्रह्मांड (Universe) को देखने के नजरिए को बदल देगा। अब देखना है कि, चीन के इस नए टेलीस्कोप विज्ञान के क्षेत्र में क्या कुछ बदलाव लाएगा।
(Photo Credit. PTI & Social Media)












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