दक्षिण चीन सागर में भारत-US के प्लान से छाती पीट रहा चीन, मोदी सरकार ने दिया उसी की भाषा में जवाब
China on India-US Tie: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिछले हफ्ते हुई अमेरिका दौरे को लेकर चीन अभी तक भड़का हुआ है और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स लगातार भड़ास निकाल रहा है। पिछले 10 दिनों में चीनी अखबार दर्जन भर लेख लिख चुका है, जिसमें अलग अलग तरह से भारत को नसीहत, चेतावनी और धमकी दी गई है।
ग्लोबल टाइम्स के ताजा तरीन आर्टिकल में अमेरिका को झगड़ालू बताते हुए भारत को फिर से नसीहत दी गई है, कि वो चीन से उलझने की कोशिश ना करे। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, कि भारत की मदद से अमेरिका, दक्षिण चीन सागर में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है।

ग्लोबल टाइम्स ने क्या लिखा है?
ग्लोबल टाइम्स ने अपने डिप्लोमेटिक लेख में लिखआ है, कि "अमेरिका अपनी तथाकथित इंडो-पैसिफिक रणनीति में बड़ी भूमिका निभाने के लिए भारत को शामिल करने के प्रयास तेज कर रहा है, जिसका लक्ष्य स्पष्ट रूप से चीन को नियंत्रित करना है।" इस लेख में आगे लिखा गया है, कि पूर्वी एशिया में वाशिंगटन के शीर्ष दूत डैनियल क्रिटेनब्रिंक ने एक रस्ताव रखा है, जिसमें दक्षिण चीन सागर से संबंधित मुद्दों पर अमेरिका-भारत की बेहतर साझेदारी का निर्माण करने की बात कही गई है।"
ग्लोबल टाइम्स के इस लेख में भारत और अमेरिका के बीच बन रहे नये इंडो-पैसिफिक नीति से चीन की बड़ी चिंता जगजाहिर हो रही है और दक्षिण चीन सागर में चीन बहुत बड़ा तनाव महसूस कर रहा है। क्योंकि, भारत पहले से ही दक्षिण चीन सागर पर दावा करने वाले देशों, फिलीपींस, वियतनाम, इंडोनेशिया और ब्रूनेई से समझौते कर रहा है।
ग्लोबल टाइम्स ने एक्सपर्ट्स के हवाले से चिंता जताते हुए लिखा है, कि "भारत, दक्षिण चीन सागर के बाहर एक बाहरी ताकत के रूप में, केवल स्थिति को जटिल करेगा और क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाकर कड़ी मेहनत से हासिल की गई स्थिरता और शांति को खतरे में डाल देगा।"
वहीं, भारतीय एक्सपर्ट्स का कहना है, कि भारत दक्षिण चीन सागर में वही कर रहा है, जो चीन हिन्द महासागर में करना चाह रहा है। कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं, कि भारत दक्षिण चीन सागर में और ज्यादा आक्रामक है और ब्रह्मोस जैसे मिसाइलों की तैनाती दक्षिण चीन सागर के देशों में कर रहा है, जिसने चीन को परेशान कर दिया है।
दक्षिण चीन सागर में डरा चीन
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, कि "पिछले सप्ताह भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की वाशिंगटन की राजकीय यात्रा के दौरान अमेरिका और भारत ने खुद को "दुनिया के सबसे करीबी साझेदारों में से एक" घोषित किया है।"
ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा है, कि "मोदी की यात्रा के बाद, अमेरिकी डिप्लोमेट क्रिटेनब्रिंक ने बुधवार को वाशिंगटन के सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज थिंक-टैंक को बताया, कि क्षेत्रीय शक्तियों के एक समूह, अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच काफी सहयोग किए जाने वाले हैं। इन देशों ने मिलकर क्वाड बना रखा है।"
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, कि अब दक्षिण चीन सागर में भारत की भूमिका बढ़ने वाली है और अमेरिका के साथ भारत का दक्षिण चीन सागर में और सहयोग बढ़ने वाला है। आपको बता दें, कि दक्षिण चीन सागर के पूरे हिस्से पर चीन अपना दावा करता है, जबकि वो वियतनाम, मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस और ब्रूनेई जैसे देशों को दक्षिण चीन सागर में हिस्सा देने से साफ मना करता है।
भारत के दबदबे को मान रहा चीन
ग्लोबल टाइम्स ने चीन के सिंघुआ विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय रणनीति अनुसंधान विभाग के डायरेक्टर कियान फेंग के हवाले से लिखा है, कि "वास्तव में भारत का अमेरिका की ओर झुकाव बढ़ रहा है और भारत न केवल हिंद महासागर में, बल्कि दक्षिण चीन सागर और प्रशांत महासागर में भी अपना प्रभाव और कदम बढ़ा रहा है।"
यानि, चीन ने खुले तौर पर माना है, कि दक्षिण चीन सागर में भारत दाखिल हो चुका है, जिससे वो हमेशा से इनकार करता रहा है।
ग्लोबल टाइम्स ने चिंता जताते हुए लिखा है, कि "भारत की नौसेना ने बुधवार को कहा है, कि वह वियतनाम को गिफ्ट के रूप में एक सक्रिय ड्यूटी मिसाइल कार्वेट भेज रही है, जो किसी भी देश को दिया गया पहला युद्धपोत है।"
ग्लोबल टाइम्स ने चीन के डिफेंस एक्सपर्ट सॉन्ग के हवाले से चेतावनी दी है, कि "दक्षिण चीन सागर के पास स्थित देशों को हथियार प्रणाली बेचने के भारत के हालिया कदम एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति है और इस क्षेत्र में नए जोखिम ला रहे हैं। पिछले साल भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की बिक्री की थी और वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइलों की तीन से पांच इकाइयां सौंपी थी, जो चिंताजनक है।"
वहीं, कियान ने कहा, कि "हम दक्षिण चीन सागर में स्थिति को भड़काने के लिए क्षेत्र के बाहर के सभी देशों के हस्तक्षेप का विरोध करते हैं, क्योंकि इससे अनिवार्य रूप से स्थिति की जटिलता और अनिश्चितता बढ़ेगी और क्षेत्र की स्थिरता और समृद्धि प्रभावित होगी।"
कुल मिलाकर देखा जाए, तो भारत ने चीन को उसी की भाषा में जवाब देना शुरू कर दिया है और चीन की बौखलाहट इसीलिए सामने रही है। माना जा रहा है, की आने वाले वक्त में दक्षिण चीन सागर में भारत प्राकृतिक खनिजों को निकालना शुरू करेगा, जिसके बाद चीन का छाती पीटना तय माना जा रहा है।












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