चीन में युवाओं में फैलती रिकॉर्ड बेरोजगारी से घबराए शी जिनपिंग, आंकड़े जारी करने पर लगाई रोक
China Unemployment: चीन में युवाओं के बीच बेरोजगारी रिकॉर्ड स्तर को पार कर गई है, जिससे घबराकर राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बेरोजगारी को लेकर डेटा को अपडेट करने पर रोक लगा दी है। बताया जा रहा है, कि आंकड़े को सस्पेंड करने का फैसला लोगों में गुस्से को फैलने से रोकने के लिए लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है, कि जुलाई महीने में बेरोजगारी ने चीन के पुराने सभी रिकॉर्ड्स को तोड़ दिया है।
चीन इस वक्त आर्थिक मंदी से जूझ रहा है और अमेरिकी निवेशकों के निकलने और अमेरिकी कंपनियों के चीन से बाहर निकलने की कोशिशों ने चीन के बाजारों में नकारात्मक असर डाला है, जिसका गंभीर प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने लगा है।

भारी बेरोजगारी के बीच शी जिनपिंग प्रशासन का ये फैसला, चीनी अर्थव्यवस्था के अपस्फीति में फिसलने के बाद आया है, क्योंकि पिछले महीनों में उपभोक्ता कीमतों में भारी गिरावट आई है, जो दो वर्षों में पहली बार हो रहा है। चीनी बाजारों में सामान तो ठूंस कर भरे हैं, लेकिन उन्हें खरीदने वाला कोई नहीं है, लिहाजा सामानों की कीमत अत्यधिक कम हो गई है, जिससे कंपनियों के लिए सामानों की लागत निकालना मुश्किल हो रहा है।
वहीं, चीन ने पिछले महीने एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट का जो डेटा जारी किया था, उसमें उसने कोविड संकट के बाद लगे लॉकडाउन के बाद रिकवरी का संकेत दिया था, लेकिन विश्लेषकों का कहना है, कि चीन का ये दावा गलत है।
चीन बढ़ते स्थानीय सरकारी ऋण और हउसिंग मार्केट चुनौतियों का भी सामना कर रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, गिरती कीमतों से बीजिंग के लिए अपना कर्ज कम करना और धीमी विकास दर पर अंकुश लगाना मुश्किल हो गया है।
बेरोजगारी दर से भयावह हो रहे हालात
चीन में पहले ही कंपनियां 35 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को नौकरियों से निकाल रही थीं और अब बेरोजगारी के फैलने की वजह से शी जिनपिंग की सरकार टेंशन में आ गई है और अब कम्युनिस्ट शासन ने लोगों को दबाना शुरू कर दिया है।
जून में एक सर्वेक्षण से पता चला है, कि 16 से 24 वर्ष की आयु के संभावित शहरी श्रमिकों में से रिकॉर्ड 21.3% को COVID से संबंधित प्रतिबंधों के खत्म होने के बाद बेरोजगार हो गये हैं। यानि, 21 प्रतिशत से ज्यादा श्रमिकों को अब नौकरी नहीं मिल रही है, जो काफी संवेदनशील मामला बन गया है।
लिहाजा, शी जिनपिंग की सरकार ने चीन के सांख्यिकी ब्यूरो मंत्रालय को बेरोजगारी से संबंधित रिपोर्ट को जारी करने से मना कर दिया है। ब्यूरो के प्रवक्ता फू लिंगहुई ने कहा, कि एक अलग सर्वेक्षण में पाया गया है, कि शहरी श्रमिकों के बीच कुल बेरोजगारी 5.3% थी। यानि, ऑरिजनल डेटा को छिपाकर चीन ने अब काल्पनिक डेटा जारी कर दी है।
चीन के सांख्यिकी ब्यूरो के प्रवक्ता फू लिंगहुई के मुताबिक, "रोजगार की स्थिति आम तौर पर स्थिर है, उपभोक्ता खर्च में वृद्धि पिछले साल जुलाई में घटकर 2.5% हो गई थी, जो जून में 3.1% थी।"
इस बीच, मंगलवार को आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है, कि अमेरिकी और यूरोपीय केंद्रीय बैंकों द्वारा मुद्रास्फीति को कम करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने के कारण निर्यात मांग में गिरावट के कारण फैक्ट्री उत्पादन में वृद्धि दर 4.4% से धीमी होकर 3.7% हो गई।
कैपिटल इकोनॉमिक्स ने एक रिपोर्ट में कहा, "युवा बेरोजगारी के आंकड़ों को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के तुरंत बाद आंकड़े जारी करने का फैसला, सरकार के आत्मविश्वास को कमजोर दिखा रहा है।"
पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने भी बैंकों को एक सप्ताह के ऋण पर ब्याज दर 1.9% से घटाकर 1.8% कर दी है, क्योंकि जून में समाप्त होने वाले तीन महीनों में, आर्थिक विकास पिछली तिमाही की तुलना में जनवरी-मार्च अवधि में 2.2% से घटकर 0.8% हो गया था। यह 3.2% वार्षिक वृद्धि होगी, जो दशकों में चीन की सबसे कमज़ोर वृद्धि होगी।
इसके अलावा, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सरकार ने कोविड लॉकडाउन के बाद देश के अर्थव्यवस्था की इंजन को स्टार्ट करने के लिए किसी भी आर्थिक पैकेज का सहारा नहीं लिया, क्योंकि उन्हें डर था, कि ऐसा करने पर ऋण उच्च स्तर तक पहुंच सकता है, लेकिन उनका ये फैसला देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित हो रहा है।












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