भारत पर आरोप लगाने वाले पाकिस्तानी अफसर को चीन ने लगाई फटकार
पाकिस्तान की ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन जनरल जुबैर महमूद हयात ने 14 नवंबर को सीपैक और भारत को लेकर एक बयान दिया था। हयात ने कहा था कि भारत की खुफिया एजेंसी RAW ने 5 करोड़ डॉलर की लागत से एक स्पेशल इंटेलिजेंस सेल बनाया है। इस सेल को इसलिए बनाया गया है ताकि ये CPEC को नुकसान पहुंचा सके
नई दिल्ली। चीन ने पाकिस्तान के उन आरोपों को नकार दिया है जिसमें भारत पर चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के स्पोक्सपर्सन लु कांग ने सोमवार को मीडिया के सवालों के जवाब में कहा कि हमारे पास इस तरह की कोई रिपोर्ट नहीं है जिससे पाकिस्तानी जनरल के आरोप साबित होते हों। हम उम्मीद करते हैं सीपैक को रीजनल और इंटरनेशनल लेवल पर सपोर्ट हासिल होगा।कांग ने कहा है कि चीन और पाकिस्तान भविष्य को देखते हुए सीपैक तैयार कर रहे हैं। इससे रीजनल कनेक्टिविटी बढ़ेगी और सभी खुशहाल होंगे।

पाकिस्तान आर्मी के एक टॉप जनरल ने लगाया था आरोप
पाकिस्तान की ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन जनरल जुबैर महमूद हयात ने 14 नवंबर को सीपैक और भारत को लेकर एक बयान दिया था। हयात ने कहा था कि भारत की खुफिया एजेंसी RAW ने 5 करोड़ डॉलर की लागत से एक स्पेशल इंटेलिजेंस सेल बनाया है। इस सेल को इसलिए बनाया गया है ताकि ये CPEC को नुकसान पहुंचा सके और उस इलाके में हालात खराब किए जा सकें। हयात ने ये भी आरोप लगाया था कि भारत पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में आतंकवाद फैला रहा है। बता दें कि सीपैक का ज्यादातर हिस्सा बलूचिस्तान से ही होकर गुजरता है और यहां बलूच लोग आजादी की मांग कर रहे हैं।

क्या है चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर ?
इस कॉरिडोर से कई बिलियन डॉलर के इन्वेस्टमेंट की उम्मीद है। सीपीईसी के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा परियोजनाओं के जरिए 46 अरब डॉलर के निवेश की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट की शुरूआत 2015 में हुई थी। अगर ये पूरा होता है तो इसके जरिए तीन हजार किलोमीटर के सड़क नेटवर्क तैयार के साथ-साथ रेलवे और पाइपलाइन लिंक भी पश्चिमी चीन से दक्षिणी पाकिस्तान को जोड़ेगा। सीपीईसी, चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग के सिल्क रोड इकोनॉमिक बेल्ट और 21वें मेरीटाइम सिल्क रोड प्रोजेक्ट का हिस्सा है। चीन की योजना इन दोनों विकास योजनाओं को एशिया और यूरोप के देशों के साथ मिलकर आगे बढ़ाने की है। चीन द्वारा बनाया जा रहा ये कॉरिडोर बलूचिस्तान प्रांत से होकर गुजरेगा, जहां दशकों से लगातार अलगाववादी आंदोलन चल रहे हैं। इसके साथ-साथ गिलगिट-बल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का इलाका भी शामिल है।

पाकितस्तान को मिलेगी मदद
पाकिस्तान को उम्मीद है कि दो हिस्सों में बनने वाले इस प्रोजक्ट के जरिए उन्हें वित्तीय विकास और ऊर्जा उत्पादन में सहायता मिलेगी। वास्तव में इस कॉरिडोर के जरिए पाकिस्तान में 35 बिलियन डॉलर का इन्वेस्टमेंट होगा, इनमें कोयला और एलएनजी आधारित थर्मल ऊर्जा प्रोजक्ट शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक चीन को उम्मीद है कि इस कॉरिडोर के जरिए वह अपनी ऊर्जा को तेजी से फारस की खाड़ी तक पहुंचा सकता है। वहीं, कॉरिडोर के जरिए पश्चिमी चीन में वित्तीय विस्तार मिलने की उम्मीद है, जो कि बंद इलाका है। इसके साथ-साथ चीन की योजना अपने गिलगिट-बल्टिस्तान में अपने पैर जमाने की है, जहां लगातार अलगाववादी आंदोलन हो रहे हैं। सीपीईसी प्रोजेक्ट के लिए पाकिस्तान में मौजूद चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए करीब 17 हजार पाकिस्तानी सैनिक तैनात किए गए हैं। ये हाल अप्रैल से पहले का था लेकिन अप्रैल के बाद चार हजार और पाकिस्तानी सैनिकों की चीनी अधिकारियों की सुरक्षा में पाकिस्तान ने लगाए गए हैं। खास तौर पंजाब प्रांत में उनकी सुरक्षा का खास ख्याल रखा गया है।












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