नया रडार सिस्टम और अब बॉम्बर की तैनाती, भारत के खिलाफ और आक्रामक हो रहा है चीन
बीजिंग। साल 2017 में डोकलाम विवाद के बाद भारत और चीन के रिश्तों में जो नरमी आई थी, उस पर चीन नई हरकत पानी फेर सकती है। एक मीडिया रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है कि चीन की सेना वुगोंग में भारत के खिलाफ अपने बॉम्बर जियान एच-6के को डेप्लॉय कर रही है। इस बॉम्बर को चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी एयरफोर्स यानी पीएलएएएफ का स्तंभ माना जाता है। पहली बार पांच जनवरी 2007 को इस बॉम्बर की झलक दुनिया को देखने को मिली थी। इसके बाद एक अक्टूबर 2009 को इसे सेना में कमीशन किया गया था। यह भी पढ़ें-भारत पर नजर रखने के मकसद से चीन ने चली नई चाल

डोकलाम विवाद के बाद सेना का फैसला
एच-6के रूस के बॉम्बर टीयू-16 का वर्जन है और एक मीडियम रेंज का एयरक्राफ्ट है। इसे चीन की जियान एयरक्राफ्ट कंपनी (एक्सएसी) ने तैयार किया है। इस बॉम्बर को गुआम, ताइवान और साउथ चाइना सी में डेप्लॉय किया जा चुका है। लेकिन साल 2017 में भारत के साथ हुए डोकलाम विवाद के बाद अब इसकी तैनाती भारत के खिलाफ भी हो रही है। वेबसाइट द प्रिंट की ओर से जारी एक रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है। कहा जा रहा है कि इस बॉम्बर का चौथा बैच डेप्लॉय हो रहा है। चीनी एयरफोर्स की 36वीं डिविजन जिसे कमांडर हाओ जियानके और रेजीमेंट कमांडर वांग गुओसोंगे लीड कर रहे हैं, उनकी देखरेख में इसकी तैनाती हो रही है। दोनों ऑफिसर सेंट्रल थियेटर कमांड में हैं।

पिछले दिनों ड्रॉप किया सबसे बड़ा बम
पिछले दिनों चीन के एक विशालकाय बम का वीडियो सामने आया था। इस बम को देश का सबसे ताकतवर गैर-परमाणु हथियार करार दिया जा रहा है। इस बम को इसी एक एच-6के बॉम्बर से ड्रॉप किया गया था। इसने बड़े क्षेत्रफल तक अपना असर दिखाया। ग्लोबल टाइम्स की मानें तो इसकी क्षमता परमाणु बम जितनी ही है लेकिन यह परमाणु बम नहीं है। नोरिनको ने दिसंबर माह के अंत में इसे ड्रॉप करने का वीडियो अपनी वेबसाइट पर डाला है। चीन की न्यूज एजेंसी शिन्हुआ की ओर से बताया गया है कि यह पहला मौका है जब एक नए बम की विनाशकारी ताकतों को जनता के सामने लाया गया है।

भारत पर नजर रखने वाला रडार सिस्टम
चीन ने एक ऐसा मैरीटाइम रडार तैयार किया है जो भारत जितने क्षेत्रफल वाले इलाके में आसानी से नजर रख सकता है। इस रडार सिस्टम के डेवलप होने के बाद से चीनी नेवी आसानी से चीन के समंदर पर तो नजर रख ही सकेगी लेकिन इसके अलावा दुश्मन के जहाज, एयरक्राफ्ट और मिसाइलों पर भी नजर रखी जाएगी। इस रडार सिस्टम को ओवर द होराइजन (ओटीएच) रडार प्रोग्राम के तहत डेवलप किया गया है। इस प्रोग्राम से जुड़े वैज्ञानिक ल्यू योंगतान को प्रोग्राम का श्रेय दिया जा रहा है। ल्यू ने रडार सिस्टम के बारे में बताया है कि ओटीएस की रेंज को इतना बढ़ाया गया है कि पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) इसके तहत आसानी से नजर रख सकती है। उन्होंने बताया है कि परंपरागत टेक्नोलॉजी के भरोसे पर सिर्फ चीन की मैरीटाइम सीमा के सिर्फ 20 प्रतिशत हिस्से पर ही नजर रखी जा सकती थी।












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