China Congress: चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सबसे बड़ी बैठक शुरू, गुटबाजी से लेकर राजकुमार गैंग तक... जानें सबकुछ
चीन की किशांग बक्सिया यानि "सात ऊपर, आठ नीचे" सम्मेलन के अनुसार, जिसका पालन साल 2002 से किया गया है, उसके मुताबिक, एक व्यक्ति को 68 साल या उससे ज्यादा की उम्र में फिर से पोलित ब्यूरो का सदस्य नियुक्त नहीं किया जा सकता है
China's 20th Communist Party Congress: चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) की सप्ताह भर चलने वाली राष्ट्रीय कांग्रेस की बैठक आज से शुरू हो गई है। चीन में पांच सालों पर होने वाली सबसे बड़ी कांग्रेस की बैठक चायनीज कम्युनिस्ट पार्टी की चीन की राजनीति पर एकाधिकार को दर्शाता है, हालांकि पिछले कुछ सालों में लगातार मिल रही अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों, कोविड महामारी और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर धीमी आर्थिक वैश्विक सुधार, रूस-यूक्रेन युद्ध ने कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस की 20वीं बैठक को काफी महत्वपूर्ण बना दिया है। लेकिन, इस बार होने वाली बैठक के साथ ही इस बात पर भी मुहर लग जाएगी, कि एक ताकतवार नेता कैसे आजीवन सत्ता में रहने के लिए अपने हिसाब से पार्टी के संविधान को बदलता है।

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चायना की संरचना
राजधानी बीजिंग में हो रही कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस की बैठक में इसके करीब 2300 पार्टी प्रतिनिध शामिल हुए हैं। ये 2300 पार्टी प्रतिनिधि मिलकर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की एक नई सेंट्रल कमेटी का चयन करेंगे। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चायना के सर्वोच्च सदस्य केंद्रीय समिति का गठन करते हैं। वर्तमान केंद्रीय समिति में 205 पूर्ण सदस्य और 171 वैकल्पिक सदस्य हैं (मृत्यु की स्थिति में रिक्तियों को भरने के लिए)। उसके बाद ये सदस्य मिलकर पोलित ब्यूरो (PB) के 25 सदस्यों का चुनाव करते हैं और फिर उसके बाद 7 सदस्यीय पोलित ब्यूरो सेन्ट्रल कमेटी (PAC) का चयन किया जाता है, जो चीन और कम्युनिस्ट पार्टी की सभी महत्वपूर्ण नीतियों, निर्णयों और समझौतों की देखरेख करती है। पोलित ब्यूरो के सदस्यों के पास सरकार और प्रभावशाली क्षेत्रीय कार्यालयों में समवर्ती पद होते हैं और नौकरशाही नियुक्तियों पर उनका अधिकार होता है।

कितनी होती है रिटायरमेंट की उम्र
चीन की किशांग बक्सिया यानि "सात ऊपर, आठ नीचे" सम्मेलन के अनुसार, जिसका पालन साल 2002 से किया गया है, उसके मुताबिक, एक व्यक्ति को 68 साल या उससे ज्यादा की उम्र में फिर से पोलित ब्यूरो का सदस्य नियुक्त नहीं किया जा सकता है और 67 वर्ष या उससे कम उम्र में सेवानिवृत्त नहीं किया जा सकता है। पोलित ब्यूरो के नये सदस्य उन सदस्यों के जगह पर चुने जाते हैं, जिनकी उम्र 68 वर्ष होने की वजह से रिटायर्ड कर दिए जाते हैं। इसके अलावा साल 2006 में एक अंतरिम नियम बनाया गया था, जिसमें कहा गया था, कि पोलित ब्यूरो के अधिकारी सिर्फ दो कार्यकाल तक ही सदस्य रह सकते हैं, उन्हें तीसरा कार्यकाल नहीं दिया जा सकता है। हालांकि, ये मानदंड राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर लागू नहीं होते हैं, जो अब 69 साल के हो चुके हैं। उन्हें सामान्य पीएससी सदस्य के बजाय महासचिव के रूप में माना जाता है। इसके साथ ही किसी भी सीसीपी आधिकारिक रेग्यूलेशन या दस्तावेज में सेवानिवृत्ति की कोई अनिवार्य आयु नहीं है। इसके साथ ही राष्ट्रपति के पास कितनी शक्ति है, वो पोलित ब्यूरो के सदस्यों पर निर्भर करता है। पोलित ब्यूरो में जितने लोग राष्ट्रपति के समर्थक होंगे, राष्ट्रपति उतना ही शक्तिशाली होगा। फिलहाल, पोलित ब्यूरो के ज्यादातर सदस्य राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ही आदमी हैं।

सीसीपी के भीतर गुटबाजी
इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है, कि शी जिनपिंग के पार्टी पर कब्जा करने के बाद से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चायना मुद्दों, नजरियों और अलग अलग क्षेत्रों के हिसाब से युद्ध के मैदान बन चुके हैं। कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर अभिजात्य गठबंधनों या राजकुमारों का प्रतिनिधित्व शी जिनपिंग करते हैं, जिन्हें खुद चीन में राजकुमार कहा जाता है। कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर कई शक्तिशाली राजकुमार हैं, जो पूर्व क्रांतिकारियों की संताने हैं। ये राजकुमार अब काफी रसूखदार हो चुके हैं और शी जिनपिंग को ये अटूट समर्थन देते हैं। राजकुमार गुट के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी में एक 'शंघाई गैंग' भी है, जिसका नेतृत्व पूर्व राष्ट्रपति जियांग जेमिन और वरिष्ठ नेता जेंग किंगहोंग करते हैं। शंघाई गुट भी काफी प्रभावशाली माना जाता है और इस गुट के लोग चीन के अंदर बड़े बड़े कारोबार का प्रतिनिधित्व करते हैं और पिछले कुछ सालों में शी जिनपिंग ने इस गैंग की नाक में दम कर रखा है। चीन के प्रमुख कारोबारी जैक मा भी शंघाई गैंग से ही आते हैं, जिनके कई बार नजरबंद करने की खबर सामने आ चुकी है। वहीं, शंघाई गैंग के एक और प्रमुख नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सन लिजुन को पिछले दिनों उम्रकैद की सजा दे दी गई। वहीं, शंघाई गुट का प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व न्याय मंत्री फू झेंहुआ को भी सलाखों के पीछे डाल दिया गया है।

तीसरे गुट का नाम है 'तुआनपाई'
राजकुमार गुट और शंघाई गैंग के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर एक और गुट है, जिसे 'तुआनपाई' गुट कहा जाता है और इस गुट का नेतृत्व एक और पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ कर रहे हैं, जिसमें कम्युनिस्ट यूथ लीग पृष्ठभूमि वाले सदस्य शामिल हैं। इस गुट को आमतौर पर "लोकलुभावन" कहा जाता है। साल 2012 में शी जिनपिंग के राष्ट्रपति बनने के बाद कम्युनस्ट पार्टी के अंदर इस गुट का वर्चस्व काफी बढ़ा हुआ है। 19वीं पार्टी कांग्रेस की बैठक से पहले तक कम्युनिस्ट पार्टी में आगे बढ़ने के लिए उम्मीदवारों की उम्र, उनकी कार्यशैली, उनका बैकग्राउंड जैसे फेक्टर्स काम करते थे, लेकिन 19वीं पार्टी कांग्रेस की बैठक के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है, कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्रति समर्पण ही पार्टी में पदोन्नति के लिए सर्वोच्च गुण बन गया है। पिछले 10 सालों के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर उम्र के मानदंडों का सख्सी से पालन किया गया और चार पीएससी सदस्यों ली केकियांग (67), वांग यांग (67), वांग हुनिंग (67), और झाओ लेजी (65) के सेवा जारी रखने की उम्मीद है, जबकि ली झांशु (72) और हान झेंग (68) को पीएससी के दो पदों से मुक्त करते हुए रिटायर्ड कर दिया जाएगा।

क्या पीएसी में और परिवर्तन करेंगे शी जिनपिंग?
इस बार की कांग्रेस की बैठक में सबसे बड़ा सवाल ये है, कि क्या शी जिनपिंग पोलित ब्यूरो पर अपना वर्चस्व बरकरार रखने के लिए उसकी संरचना में कोई परिवर्तन भी करेंगे? इतिहास को देखें तो पीएससी सदस्यता के साथ दो प्रयोग हुए हैं। साल 2002 में सदस्यता को सात पदों से बढ़ाकर नौ कर दिया गया था और साल 2012 में इसे फिर से 9 से घटकर सात कर दिया गया था। शी जिनपिंग के किसी भी महत्वपूर्ण उथल-पुथल को ट्रिगर करने के बजाय पीएससी की मानक-आधारित संरचना को संरक्षित करने की संभावना है। इस पार्टी कांग्रेस में सात सदस्यों की यथास्थिति बनाए रखने की उम्मीद है, भले ही इसका मतलब यह होगा, कि पीएससी का आधा हिस्सा तुआनपाई (वांग यांग, ली केकियांग और हू) से बना होगा, जिसमें शी जिनपिंग के केवल दो स्पष्ट सहयोगी (झाओ और चेन ) होंगे।

शक्ति को और मजबूत कैसे करेंगे शी जिनपिंग?
यदि शी जिनपिंग पीएससी की एक आदर्श आधारित संरचना का पालन करते हैं, तो यह उस समय उनकी व्यक्तिगत शक्ति की सीमा का भी प्रतिनिधित्व करेगा। जब वह एक बीमार अर्थव्यवस्था, संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ विरोधी संबंधों और एक सख्त शून्य-कोविड नीति के लिए आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं। वहीं, पीएससी के संभावित सात सदस्यों में से वांग यांग, ली केकियांग, हू और चेन को बाजार-समर्थक सुधार उन्मुखीकरण माना जाता है। उनकी आवाज का विस्तार तभी संभव है जब कई टेक्नोक्रेट व्यापक केंद्रीय समिति में शामिल हों। हालांकि, कई एक्सपर्ट्स का कहना है, कि पीएसी के सदस्य और देश के प्रधानमंत्री ली केकियांग को रिटायर्ड किया जा सकता है। लेकिन पार्टी पर शी जिनपिंग की पकड़ ढीली होने की संभावना नहीं है। महामारी के साथ देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को देखते हुए राजनीतिक स्थिरता कीवर्ड बना हुआ है। इसलिए, इस कार्यकाल में भी सामुहिक नेतृत्व पर शी जिनपिंग का अधिपत्य का ही वर्चस्व बना रहेगा।

शी जिनपिंग का राजनीतिक भविष्य
शी जिनपिंग पार्टी के महासचिव के रूप में ऐतिहासिक तीसरा कार्यकाल जीतने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह प्रभावी रूप से उन्हें जीवन के लिए सत्ता में बने रहने की अनुमति देगा, क्योंकि चीन के नेताओं ने साल 2018 में 1990 के दशक से दो कार्यकाल की सीमा को हटाने के लिए मतदान किया था। कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर दिन रात शी जिनपिंग की छवि को चमकाने के लिए काम किया जा रहा है, ताकि उनका कद कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक माओत्से तुंग के बराबर किया जाए। पांच साल पहले शी जिनपिंग के विचारों का एक सेट पहले ही संविधान में शामिल किया जा चुका है। जिसका नाम "चायना डायनेमिक डिकेट " जो अब सरकारी अखबार चाइना डेली पर प्रसारित हो रही है।

कौन सी बड़ी नियुक्तियां होंगी?
प्रधानमंत्री ली केकियांग ने राज्य परिषद के प्रमुख के रूप में एक और कार्यकाल की सेवा करने से इनकार कर दिया है और शी को अगले प्रधानमंत्री के रूप में एक करीबी सहयोगी नियुक्त करने की इजाजत दी है, भले ही शी जिनपिंग के पोलित ब्यूरो सहयोगियों में किसी के पास भी पूर्व-आवश्यक अनुभव नहीं है। माना जा रहा है कि, पीएएसी के नेता हू चुनहुआ को नया प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन कई एक्सपर्ट्स का कहना है, कि शी जिनपिंग हू के ऊपर बुजुर्ग वांग को पसंद कर सकते हैं। ऐसे में दो नए सदस्यों हू और चेन को 2027-28 के लिए भविष्य के नेताओं के रूप में चिह्नित किया जा सकता है। हालांकि, शी जिनपंग अपने चौथे कार्यकाल के लिए भी एक दरवाजा खुला रखना पसंद कर सकते हैं, लिहाजा इस बात की संभावना नगन्य है, कि इस बैठक में शा जिनपिंग के किसी उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा की जाएगी। वहीं, माना जा रहा है, कि पार्टी कांग्रेस की बैठक में शी जिनपिंग को सेना, प्रचार विंग और आंतरिक सुरक्षा को लेकर अपने विश्वसनीय सहयोगियों को नियुक्त करने का अधिकार दे सकती है। फिलहाल सेना के प्रमुख शी जिनपिंग खुद हैं। इन कदमों से उनके हाथ में सत्ता और मजबूत होगी। शायद वह लोकप्रिय चीनी मुहावरे का पालन करके आगे बढ़ेंगे,"बज़ू बसी", "यदि अगर आप अदालत को परेशानी नहीं करेंगे, तो आप नहीं मरेंगे!"
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दुनिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
पार्टी की केंद्रीय समिति के विदेश मामलों के कार्यालय के निदेशक यांग जीची के रिटायर्ड होने की व्यापक रूप से उम्मीद है। लिहाजा, इस नये पद के लिए दो संभावित उम्मीदवारों में लियू जीयी और वांग यी हो सकते हैं। दोनों में से वांग यी सख्त विदेश नीति का समर्थन करते हैं। दूसरी ओर, लियू जीयी को वैश्विक शासन सुधार के एजेंडे के करीब और ताइवान की स्वतंत्रता को बाधित करने वाले के रूप में देखा जाता है। पीएससी में किसी के भी प्रवेश के बावजूद, शी की "महान शक्ति कूटनीति" ने अन्य मौजूदा निकायों को महत्वहीन कर दिया है। अब चीन BRI (बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव), GDI (ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव), GDSI (ग्लोबल डेटा सिक्योरिटी इनिशिएटिव), और GSI (ग्लोबल सिक्योरिटी इनिशिएटिव) के माध्यम से शी जिनपिंग के आर्थिक, राजनीतिक, डिजिटल और सुरक्षा मॉडल को आगे बढ़ा रहा है। शी जिनपिंग के शासनकाल में यूएस-चीन व्यापार युद्ध जारी ही रहने की उम्मीद है। वहीं, अब ताइवान को लेकर तनावा काफी ज्यादा बढ़ने की आशंका है। वहीं, दुनिया में चीन की प्रतिष्ठा को और नुकसान पहुंचेगा और वैश्विक तनाव में और इजाफा होने की पूरी आशंका रहेगी।
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