तो क्या अब चीन बनाएगा तिब्बत का दलाई लामा? उत्तराधिकारी चुनने को लेकर चली ये खतरनाक चाल
चीन ने दावा किया है कि तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के अगले उत्तराधिकारी 14वें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो चुनने का एकमात्र अधिकार उसके पास है।
बीजिंग, 04 सितंबरः चीन ने दावा किया है कि तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के अगले उत्तराधिकारी 14वें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो चुनने का एकमात्र अधिकार उसके पास है। दरअसल, चीन का ये दावा यूएस-तिब्बत नीति के विपरीत है, जिसमें कहा गया है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन करना तिब्बतियों के हाथों में है। एक थिंक टैंक पॉलिसी रिसर्च ग्रुप (POREG) के अनुसार चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार अगले दलाई लामा के चयन में अंतिम अधिकार के अपने दावों पर कायम है।

हमेशा चीन के निशाने पर रहे हैं दलाई लामा
वर्तमान दलाई लामा, तेनज़िन ग्यात्सो की पहचान उनके पूर्ववर्ती के पुनर्जन्म के रूप में की गई थी जब वे दो वर्ष के थे। बचपन से ही उनका सामना चीनी ताकत से होता रहा है, जिन्होंने न केवल उनके प्रिय तिब्बत पर अधिकार कर लिया, बल्कि उन्हें और कई अन्य तिब्बतियों को भी भारत में निर्वासन के लिए मजबूर कर दिया। इसके बाद से दलाई लामा हमेशा चीन के निशाने पर रहे हैं।

दलाई लामा चुनने के नियम से छेड़छाड़
अब अगला दलाई लामा को कैसे चुना जाएगा ये तय करने के लिए चीनी अधिकारियों ने आदेश पारित किया है। इनमें से 1 सितंबर, 2007 का आदेश (आदेश संख्या 5) है जो तिब्बती बौद्ध धर्म में जीवित बुद्धों के पुनर्जन्म के प्रबंधन पर उपायों की रूपरेखा तैयार करता है। इस आदेश के अनुसार, अगले दलाई लामा के लिए पुनर्जन्म के आवेदन को चीन के सभी बौद्ध मंदिरों द्वारा पुनर्जन्म लामाओं को पहचानने की अनुमति देने से पहले भरा जाना चाहिए।

चीन ने खुद को बनाया अंंतिम मध्यस्थ
इस तरह से चीनी राज्य ने खुद को अंतिम मध्यस्थ बना लिया कि क्या लामा का पुनर्जन्म होता है या नहीं? इसकी वजह से ये कहने की जरुरत नहीं है कि देश और विदेश में तिब्बतियों में घोर निराशा का भाव है। पुनर्जन्म वह विश्वास प्रणाली है जो तिब्बत में प्रचलित है। इसके अनुसार, एक उच्च लामा अपने परिनिर्वाण के बाद मानव रूप में जन्म लेते हैं, जिसका अर्थ है संसार, कर्म और पुनर्जन्म से मुक्ति।

चीन ने किया इतिहास से छेड़छाड़
तिब्बतियों द्वारा छह शताब्दियों से अधिक समय से पोषित इस पवित्र परंपरा पर सीधा हमला करते हुए, चीनी अधिकारी अगले लामा का चयन करने के अपने अधिकार का दावा करने पर डटे हुए हैं। चीन दलाई लामा की संस्था के महत्व से अवगत है इसलिए उसने बौद्ध निवास के कब्जे के बाद तिब्बत और दलाई लामा को अपने अधीन लाने की कोशिश में कोई कसर नहीं छोड़ा है। इसके लिए चीन ने नई सिर्फ कई चालें चलीं, योजनाएं बनाईं बल्कि इतिहास को भी तोड़-मरोड़ कर पेश किया है।












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