श्रीलंका के सबसे बड़े बंदरगाह पर चीन ने किया कब्जा, हिंद महासागर में भारत को बहुत बड़ा झटका

हंबनटोटा के बाद चीन ने श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह पर भी कब्जा कर लिया है, जो भारत के लिए बहुत बड़ी टेंशन की बात है।

कोलंबो, जुलाई 16: हंबनटोटा बंदरगाह पर 99 सालों के लिए कब्जा कर लेने के बाद चीन ने श्रीलंका के एक और बेहद महत्वपूर्ण बंदरगाह पर करीब करीब कब्जा जमा लिया है। श्रीलंका की राजधानी में बनने वाले कोलंबो बंदरगाह अब सिर्फ कहने के लिए श्रीलंका का बचा है। चीन श्रीलंका के कोलंबो पोर्ट सिटी, जिसे सीपीसी भी कहा जाता है, वहां एक और एन्क्लेव बना रहा है, जो न केवल स्थानीय आजीविका और श्रीलंका की स्थानीय परंपरा को हमेशा के लिए खत्म कर देगा, बल्कि इस प्रोजेक्ट से इस बंदरगाह पर श्रीलंका की संप्रुभता भी खत्म हो गई है। यानि, इस पूरे बंदरगाह पर अब चीन का कब्जो हो गया है और एक्सपर्ट्स का मानना है कि कोलंबो पोर्ट पर कब्जा करने के साथ ही चीन ने हिंद महासागर का दरवाजा खोल लिया है।

कोलंबो पोर्ट पर चीन का 'कब्जा'

कोलंबो पोर्ट पर चीन का 'कब्जा'

इंटरनेशनल फोरम फॉर राइट्स एंड सिक्योरिटी यानि IFFRAS के मुताबिक, कोलंबो पोर्ट सिटी पर अधिकार जमाने के बाद चीन को चीन को भारतीय उपमहाद्वीप के लिए अपना प्रवेश द्वार श्रीलंका में मिल गया है और ये पोर्ट भारत के सबसे दक्षिणी सिरे से कुछ सौ किलोमीटर की दूरी पर ही है। रिपोर्ट के मुकाबिक, कोलंबो पोर्ट सिटी के लिए निर्माण के लिए चीन दादागिरी करते हुए हिंद महासागर में कई हेक्टेयर जमीन पर दावा कर उसपर कब्जा कर चुका है और रिपोर्ट है कि रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाली चीन की सिल्क रोड परियोजना के लिए कोलंबो बंदरगाह काफी अहम है।

Recommended Video

    Indian Ocean में China ने India को दिया झटका, Sri Lanka के इस पोर्ट पर किया कब्जा | वनइंडिया हिंदी
    चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट को फायदा

    चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट को फायदा

    कई इंटरनेशनल रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कोलंबो पोर्ट के लिए चीन की आक्रामकता उसकी 'भेड़या योद्धा कूटनीति' यानि 'वुल्फ वैरियर कूटनीति' का हिस्सा है, जिससे बेल्ड एंड रोड इनिशिएटिव को काफी ज्यादा फायदा मिलेगा और दुनिया इसे पहले ही देख चुकी है, जब चीन ने श्रीलंका को विवादास्पद कई अरब डॉलर का कर्ज देकर हंबनटोटा बंदरगाह पर 99 सालों के लिए पूरी तरह से कब्जा कर लिया। ऐसे में हिंद महासागर में अब भारत की चिंता काफी ज्यादा बढ़ गई है। हिंद महासागर में काफी ज्यादा आक्रामकता के साथ आगे बढ़ते हुए चीन लगातार एक के बाद एक बंदरगाह पर कब्जा कर रहा है, जो उसके 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' यानि भारत को घेरने के लिए 'मोतियों की माला' परियोजना का हिस्सा है, उसपर काम कर रहा है और ये भारत के लिए बहुत बड़ी खतरे की घंटी है। IFFRAS के मुताबिक भारत को रणनीतिक और सामरिक तौर पर चीन काफी आक्रामकता के साथ घेर रहा है और हिंद महासागर के व्यापारिक मार्ग पर भी चीन कब्जा करने के फिराक में है और अगर वो ऐसा करने में कामयाब होता है, तो फिर उसका हिंद महासागर पर भी वर्चस्व स्थापित हो सकता है।

    चीन के जाल में कैसे फंसा श्रीलंका?

    चीन के जाल में कैसे फंसा श्रीलंका?

    आपको जानकर हैरानी होगी, कि आखिर सबकुछ जानते हुए भी श्रीलंका, चीन के जाल में कैसे फंस गया। तो हम आपको बताते हैं कि श्रीलंका ने अपनी संसद के द्वारा ही अपनी संप्रभुता का गला घोटा है। 20 मई 2021 को श्रीलंका की संसद ने कोलंबो पोर्ट सिटी इकोनोमिक कमीशन बिल पारित किया था, जो कोलंबो पोर्ट सिटी का शासन और प्रशानिक ढांचा तैयार करता है। लेकिन, इस बिल में सबसे बड़ी हैरानी की बात ये थी कि कोलंबो पोर्ट सिटी का प्रशासनिक और शासन का अधिकार भी चीन को सौंप दे दिया गया। यानि, कोलंबो पोर्ट सिटी में किसी भी तरह का कोई दखल श्रीलंका की सरकार नहीं करेगी, जो सीधे सीधे श्रीलंका की संप्रभुता का उल्लंघन है। इसका मतलब ये है कि श्रीलंका की जमीन पर बनने वाले कोलंबो पोर्ट सिटी में अब चीन का शासन चलेगा और ये अधिकार खुद श्रीलंका ने ही चीन को अपनी संसद से दिए हैं। कोलंबो पोर्ट सिटी के लिए अब चीन हिंद महासागर में 269 हेक्टेयर जमीन पर फिर से दावा कर उसपर कब्जा कर चुका है, जिसपर पहला स्पेशल इकोनोमिक जोन यानि SEZ का निर्माण किया जाएगा।

    कर्ज के जाल में फंसा श्रीलंका

    कर्ज के जाल में फंसा श्रीलंका

    सबसे आश्चर्य की बात ये है कि हंबनटोटा बंदरगाल 99 सालों के लिए गंवाने के बाद भी श्रीलंका ने 2014 में चीन के साथ कोलंबो पोर्ट सिटी के लिए करार किया था और श्रीलंका के इतिहास में ये सबसे बड़ा एफडीआई था। कोलंबो पोर्ट सिटी के निर्माण की लागत 140 करोड़ अमेरिकी डॉलर है और अब चीन ने इसे बढ़ाकर 13 अरब अमेरिकी डॉलर कर दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि 140 करोड़ डॉलर से 1300 करोड़ डॉलर का प्रोजेक्ट बना देना ही चीन का जाल था, जिसमें बेहद आसानी से श्रीलंका फंस गया है। वहीं, एक्सपर्ट्स ये भी कहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में भी चीन इसी नीति के आधार पर बढ़ना चाहता था और उसने ऑस्ट्रेलिया के कई टॉप के नेताओं को भारी रिश्वत दी थी और ऑस्ट्रेलिया के एक राज्य ने चीन के साथ बड़ा करार भी कर लिया था, लेकिन एन वक्त पर इसका खुलासा हो गया और विरोध-प्रदर्शन के बाद ऑस्ट्रेलिया ने चीन के साथ सारे करार तोड़ लिए। 2014 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने श्रीलंका का दौरा किया था, उस वक्त उन्होंने कोलंबो पोर्ट सिटी का शिलान्यास किया था। उस वक्त श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिन्द्रा राजपक्षे थे।

    श्रीलंका के प्रधानमंत्री को रिश्वत ?

    श्रीलंका के प्रधानमंत्री को रिश्वत ?

    आपको बता दें कि श्रीलंका की राजनीति को चलाने वाले राजपक्षे भाइयों, प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और राष्ट्रपति गोटाबाया का चीन के साथ करीब एक दशक से ज्यादा पुराना स्पेशल रिश्ता है और बीजिंग ने 2009 में खत्म हुए श्रीलंकन सिविल वॉर के दौरान श्रीलंका को हथियारों की मदद भी की थी। IFFRAS के मुताबिक, 2018 में अमेरिकन न्यूज पेपर न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा करते हुए कहा था कि राजपक्षे परिवार और चीन के बीच में संबंध अलग स्तर पर पहुंचे हुए हैं और कोलंबो पोर्ट परियोजना के लिए चीन ने राजपक्षे परिवार को काफी ज्यादा पैसों का भुगतान किया था। वहीं, न्यूयॉर्क टाइम्स ने ये भी खुलासा किया था कि चीन की एक बड़ी कंपनी ने 2015 में हुए श्रीलंका चुनाव में राजपक्षे भाईयों को वित्तीय मदद दी थी। हालांकि, 2015 में राजपक्षे परिवार के हारने के बाद कोलंबो पोर्ट परियोजना की रफ्तार रूक गई थी, लेकिन 2019 में राजपक्षे परिवार फिर से सत्ता में आ गया और फिर कोलंबो पोर्ट परियोजना काफी तेजी से आगे बढ़ने लगी। चीन द्वारा प्रायोजित दसियों श्रीलंकाई जहाज 269 हेक्टेयर के समुद्री क्षेत्र को विकसित करने के लिए हिंद महासागर के तल से रेत निकालने का काम ओवरटाइम कर रहे हैं।

    चीन को दी हिंद महासागर की जमीन

    चीन को दी हिंद महासागर की जमीन

    हिंद महासागर में चीन ने 269 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जा किया है, लेकिन सबसे अहम बात ये है कि 269 हेक्टेयर की जमीन में से सिर्फ 125 हेक्टेयर की जमीन ही श्रीलंका को दी गई है, बाकी 88 हेक्टेयर जमीन चीन ने 99 सालों के लिए लीज पर ले लिया है, वहीं श्रीलंका ने अपने 125 हेक्टेयर जमीन में से और 20 एकड़ जमीन चीन के हवाले कर दिया, यानि हिंद महासागर में 108 हेक्टेयर जमीन पर पूरी तरह से चीन का कब्जा होगा, जहां चीन क्या करेगा, कोई नहीं जान सकता है और ये भारत के लिए चिंता की बात है। श्रीलंका की सिविल सोसाइटी, जनता और विपक्ष ने चीन का काफी कड़ा विरोध भी किया है, लेकिन राजपक्षे सरकार इस विवादित बिल को संसद में पास कराने में कामयाब रही है। ऐसे में अब पूरी तरह से मान लेना चाहिए कि श्रीलंका पूरी तरह से चीन के कब्जे में जा चुका है और अब चीन अपने हिसाब से श्रीलंका का इस्तेमाल करेगा और अब भारत को पूरी तरह से सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि हिंद महासागर में चीन भारत से कुछ किलोमीटर की दूरी पर ही हमेशा के लिए आ गया है।

    ड्रैगन के जाल में फंसकर बिकने के कगार पर पहुंचा एक देश, चीन कर सकता है कब्जा

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+