खाद खरीदने से किया था इनकार, भड़के चीन ने श्रीलंका के सरकारी बैंक को कर दिया ब्लैकलिस्ट
श्रीलंका ने चीनी कंपनी के हानिकारक खाद को लेने से मना किया तो गुस्साए चीन ने श्रीलंका की सरकारी बैंक को ही ब्लैकलिस्ट कर दिया।
कोलंबो, अक्टूबर 30: इतिहास गवाह रहा है, चीन के साथ जिन देशों ने भी गलबहियां करने की कोशिश की है, उसे चीन ने धोखा दिया है और अब चीन का अगला शिकार श्रीलंका बना है। श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर तो चीन पहले से ही कब्जा जमा चुका है, लेकिन अब चीन ने श्रीलका के प्रमुख बैंक को ही ब्लैकलिस्ट कर दिया है। जिसके बाद श्रीलंका बड़ी मुश्किल में फंस गया है।

श्रीलंका के नेशनल बैंक को किया ब्लॉक
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने श्रीलंका के एक शीर्ष सरकारी बैंक को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, श्रीलंका ने जैविक खाद को लेकर चीनी कंपनी का ऑर्डर कैंसिल कर दिया था, जिसके बाद चीन ने श्रीलंकर बैंक को ही ब्लैकलिस्ट कर दिया। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने उर्वरक खाद के एक ऑर्डर के संबंध में 'दुर्भावनापूर्ण' लेटर ऑफ क्रेडिट 'डिफॉल्ट' का हवाला देते हुए श्रीलंका के सरकारी बैंक को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। जिसे श्रीलंकन बैंक के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।

श्रीलंकन बैंक को क्यों किया बैल्कलिस्ट?
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ समय पहले श्रीलंका ने चीन की एक जैविक खाद बनाने वाली कंपनी को खाद सप्लाई करने का ऑर्डर दिया था, लेकिन जांच के दौरान पता चला कि, चीनी कंपनी ने जिस खाद की सप्लाई श्रीलंका को की है, वो दूषित था, लिहाजा श्रीलंकन अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए चीन से आए खाद को वापस कर दिया, जबकि लेटर ऑफ क्रेडिट देने वाले बैंक ने चीन की कंपनी को पैसों का भुगतान करने से मना कर दिया। जिससे गुस्साए चीन ने श्रीलंका की सरकारी बैंक को ही ब्लैकलिस्ट कर दिया।

''चीनी उद्योग को नुकसान''
श्रीलंकन बैंक को प्रतिबंधित करने के बाद चीन की तरफ से श्रीलंका को लेकर सख्त बयान जारी किए गये हैं। चीन के कॉमर्स मिनिस्ट्री की तरफ से कहा गया है कि, इस 'डिफॉल्ट' की वजह से श्रीलंका के साथ इंटरनेशनल ट्रेड में चीन के उद्योगों को 'बड़ा नुकसान' हुआ है। जिसके बाद श्रीलंकन बैंक की तरफ से भी जवाब दिया गया है। चीन द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने के बाद श्रीलंका स्थिति चीन के दूतावास के एक ट्वीट के जवाब में श्रीलंका की पीपल्स बैंक ने सफाई देते हुए कहा कि, ''वह केवल कोर्ट के आदेश का पालन कर रहा था, जिसमें कोर्ट की तरफ से उसे चीन की कंपनी को भुगतान करने से रोक दिया गया था''।

कोर्ट ऑर्डर हटने का इंतजार
श्रीलंकन बैंक की तरफ से कहा गया है कि, 'कोर्ट की तरफ से चीनी कंपनी को भुगतान करने पर लगी रोक हटने के बाद सामान्य तरीकों से लेटर ऑफ क्रेडिट भुगताव प्रभावी हो जाएगा'। आपको बता दें कि, पिछले हफ्ते ही श्रीलंका ने चीनी जहाज को वापस कर दिया था, जिसमें जैविक खाद को लादकर भेजा गया था। श्रीलंका के अधिकारियों ने कहा कि, चीन से मंगाए गये जैविक खाद में हानिकाकर बैक्टीरिया पाए गये थे, जिसके बाद जहाज को वापस करने का फैसला लिया गया। समाचार एजेंसी एएफपी ने बताया कि, एक वाणिज्यिक उच्च न्यायालय ने क़िंगदाओ सीविन बायोटेक ग्रुप कंपनी लिमिटेड को 96,000 टन उर्वरक के लिए किसी भी भुगतान पर प्रतिबंध लगा दिया है।

मुसीबत में फंस सकता है श्रीलंका
चीन के साथ मचे इस घमासान के बीच आशंका जताई जा रही है कि, इस विवाद की वजह से श्रीलका में कृषि संकट पैदा हो सकता है। आपको बता दें कि, पिछले साल श्रीलंका सरकार ने देश में रासायनिक खाद के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी और उसके जगह पर जैविक खाद के इस्तेमाल करने का फैसला लिया गया था। लेकिन, टाइमिंग को लेकर श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे की जमकर आलोचना की गई थी। कहा गया था कि, कोरोना महामारी के वक्त सरकार का ये फैसला सही नहीं है। वहीं, जब चीन के राजदूत ने श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे से इस बाबत मुलाकात की थी, तो प्रधानमंत्री की तरफ से साफ शब्दों में कहा गया था कि, खराब खाद को श्रीलंका की सरकार स्वीकार नहीं कर सकती है, हां तय मानकों पर खरा उतरने वाले खाद को लेने में कोई दिक्कत नहीं है।












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