चीन ने अरुणाचल के करीब ब्रह्मपुत्र नदी पर सबसे बड़े डैम को दी मंजूरी, भारत पर क्या होगा असर ?
बीजिंग। चीन की संसद ने अरुणाचल प्रदेश के पास स्थित अब तक के सबसे बड़े हाइड्रोपॉवर संयंत्र को मंजूरी दे दी है। चीन का ये बांध अरुणाचल प्रदेश से लगे तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में यारलुंग जांगबो नदी- जिसे भारत में ब्रह्मपुत्र के नाम से जाना जाता है- पर बनाने को प्रस्तावित है। गुरुवार को चीन की नेशनल पीपल्स कांग्रेस के अंतिम सत्र में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई। पीपल्स कांग्रेस का ये सत्र देश की 14वीं पंचवर्षीय योजना के लिए बुलाया गया था।
जिस यारलुग जांगबो नदी पर यह बांध बनना है वह तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) क्षेत्र से बहते हुए अरुणाचल प्रदेश में पहुंचती है जहां पर इसे सियांग कहते हैं। असम में पहुंचने पर यह ब्रह्मपुत्र के नाम से जानी जाती है जहां से यह बांग्लादेश में निकल जाती है।

नवम्बर में हुई थी घोषणा
चीन ने इस प्रोजेक्ट की घोषणा पिछले साल नवम्बर में की थी। उस समय चीन ने कहा था कि यारलूंग सांगपो के निचले क्षेत्रों में बांध बनाना उसका वैध अधिकार है। चीन ने यह भी कहा था कि इस हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान निचले क्षेत्रों में पड़ने वाले भारत और बांग्लादेश के हितों का ध्यान रखा जाएगा।
भारत भी इस ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपरी हिस्से में बनने वाले बांध को लेकर चिंता जताता रहा है। भारत यहां निचले क्षेत्र में पड़ता है ऐसे में किसी भी बांध के चलते हमेशा खतरा बना रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बांध के बनने के साथ ही भारत को सूखे और बाढ़ दोनों के खतरे का सामना करना पड़ सकता है।
चीन के कम से कम दो बड़े अधिकारियों ने इसी सप्ताह नेशनल पीपल्स कांग्रेस के सत्र में इस बांध के महत्व के बारे में बात की थी।

सबसे बड़े बांध से भी विशाल
चीन के लिए इस बांध के महत्व का अंदाजा इस बात से ही लगा सकते हैं कि बांध बनने के बाद यहां पर तीन घाटी पर बने बांध की तुलना में तीन गुना बिजली पैदा की जा सकेगी। चीन के मध्य हुबेई प्रांत स्थित तीन घाटियों पर बना बांध दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट है।
इस परियोजना के बारे में पहली बार जानकारी तब सामने आई थी जब चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने नवम्बर में अपनी एक रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी थी। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा था "भारत और बांग्लादेश से होकर जाने वाली यारलूंग जांगबो नदी के पानी पर चीन एक हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट का निर्माण करेगा।"

चिंताओं को लेकर चीन ने क्या कहा ?
पॉवर चाइना के चेयरमैन यान जियांग ने बांध के बारे में कहा था कि "ऐसा इतिहास में कभी नहीं हुआ होगा.. चीन की हाईड्रोपॉवर इंडस्ट्री के लिए यह एक ऐतिहासिक मौका है।"
पिछले साल दिसम्बर में चीन से इस प्रोजेक्ट के निचले क्षेत्र में पड़ने वाले देशों पर असर के बारे में पूछा गया था तो चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने सभी तरह आशंकाओं को खारिज किया था।
यारलुंग ज़ंगबो नदी की निचली पहुंच में हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट विकास चीन का वैध अधिकार है। जब सीमा के पार नदियों के उपयोग और विकास की बात आती है, तो चीन हमेशा जिम्मेदारी से काम करता है।''
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