दोस्त ने ही राष्ट्रपति पुतिन को लगाई फटकार, यूक्रेन में रूस की सेना को मिली हार का ठहराया जिम्मेदार
रूस के राष्ट्रवादियों ने रविवार को गुस्से में आकर पुतिन से यूक्रेन युद्ध में अंतिम जीत सुनिश्चित करने के लिए तत्काल बदलाव करने का आह्वान किया है।
मॉस्को, सितंबर 12: यूक्रेन की जंग में रूसी की सेनत बड़ी हार की तरफ बढ़ती नजर आ रही है और कई क्षेत्रों में रूस की सेना को बड़ी बाल मिल भी चुकी है और पुतिन के सैनिकों को अपने हथियार छोड़कर भागते देखा गया है, जिसको लेकर राष्ट्रपति पुतिन के सबसे बड़े दोस्तों में से एक चेचन्या नेता रमजान कादिरोव ने जमकर गुस्से का इजहार किया है और उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन के साथ साथ रूसी सेना की जमकर आलोचना की है और उन्हें हार के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

दोस्त ने की पुतिन की आलोचना
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सहयोगी चेचन नेता रमजान कादिरोव ने यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में स्थिति काफी महत्वपूर्ण माने जाने वाले खार्किव प्रांत में एक महत्वपूर्ण रसद आपूर्ति केंद्र इज़ीयम के रूसी सेना से हाथ से निकल जाने को लेकर रूसी सेना की आलोचना की है। शनिवार को टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप पर पोस्ट किए गए 11 मिनट के लंबे वॉयस मैसेज में उन्होंने माना कि, रूसी सेना के पास अपने अभियान के लिए कोई प्लानिंग ही नहीं थी। आपको बता दें कि, चेचन्या के नेता रमजान कादिरोव को रूस ने ही नियुक्त किया हुआ है और वो राष्ट्रपति पुतिन के सबसे करीबी दोस्तों में से एक माने जाते हैं, जो लगातार यूक्रेन युद्ध में पुतिन की मदद कर रहे हैं। उन्हगोंने कहा कि,"अगर आज या कल, विशेष सैन्य अभियान के संचालन में बदलाव नहीं किया गया, तो मुझे देश के नेतृत्व के पास जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, ताकि उन्हें जमीन पर स्थिति की व्याख्या की जा सके।" रमजान कादिरोव का आशय राष्ट्रपति पुतिन से था और उन्होंने यूक्रेन युद्ध में रूस की स्थिति पर गहरी निराशा जताई है।

'यूक्रेन में की गईं हैं गलतियां'
रमजान कादिरोव ने अपने ऑडियो मैसेज में कहा कि, "मैं रक्षा मंत्रालय के लोगों की तरह रणनीतिकार नहीं हूं। लेकिन, यह साफ है, कि गलतियां की गईं हैं। मुझे लगता है कि वे कुछ निष्कर्ष निकालेंगे।" हालांकि, उन्होंने एक बार फिर से उम्मीद जताई है, कि जो क्षेत्र रूस के नियंत्रण से बाहर गई हैं, वो एक बार फिर से रूस के नियंत्रण में वापस आ जाएंगीं। उन्होंने कहा कि, "हमारे पास हमारे लोग हैं, विशेष रूप से ऐसी स्थितियों के लिए तैयार किए गए लड़ाके हमारे पास हैं और उनसे जुड़ने के लिए 10,000 और लड़ाके तैयार हैं। हम निकट भविष्य में ओडेसा पहुंचेंगे।" चेचन्या नेता ने राष्ट्रपति पुतिन की आलोचना उस वक्त की है, जब रूस की सेना को खार्किव में भारी नुकसान उठाना पड़ा है और अब पूर्वी यूक्रेन में रूस का नियंत्रण कमजोर पड़ता जा रहा है।

'युद्ध नीति में तत्काल बदलाव का आह्वान'
रूस के राष्ट्रवादियों ने रविवार को गुस्से में आकर पुतिन से यूक्रेन युद्ध में अंतिम जीत सुनिश्चित करने के लिए तत्काल बदलाव करने का आह्वान किया है। मार्च में यूक्रेन की राजधानी कीव से अपने सैनिकों को वापस बुलाने के बाद से इज़ियम का तेजी से पतन रूस की सबसे खराब सैन्य हार मानी जा रही है। शनिवार को जब रूसी सेना एक शहर के बाद दूसरा शहर हार रही थी, उस वक्त राष्ट्रपतिपुतिन मॉस्को पार्क में यूरोप का सबसे बड़ा फेरिस व्हील की ओपनिंग कर रहे थे, और इस मौके पर मॉस्को में रेड स्क्वायर पर जमकर आतिशबाजी की गई। वहीं, यूक्रेन में मिली अब तक की सबसे बड़ी हार पर रूस और रूस के राष्ट्रपति ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है, हालांकि, रूस के कुछ राष्ट्रवादियों में इस हार को लेकर भारी गुस्सा देखा जा रहा है और सोशल मीडिया पर उकसावे वाली टिप्पणियां की जा रही हैं।

खार्किव में और सैनिकों को भेज रहा रूस
वहीं, जैसे ही खार्किव के इजीयम शहर से रूसी सैनिकों के भागने की खबर आई, ठीक उसके बाद रूसी रक्षा मंत्रालय की तरफ से रूसी सैनिकों का एक वीडियो जारी किया गया, जिसमें रूसी सैनिकों को खार्किव की तरफ जाते हुए देखा जा रहा है। रविवार को रक्षा मंत्रालय ने कहा कि, रूसी बलों ने हवाई सैनिकों, मिसाइलों और तोपखाने के साथ क्षेत्र में यूक्रेनी ठिकानों पर हमला किया है। वहीं, अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, कई रूसी समर्थक टेलीग्राम चैनल पर इसे रूस की बड़ी हार बता रहे हैं और वहीं, "एक हाई-प्रोफाइल सैन्य विश्लेषक ने कहा कि, उनके सैनिक एक ऑपरेशनल संकट में हैं और यूक्रेनियन ने इस युद्ध में को जीत लिया है।"

रूस ने साथ रखी है चुप्पी
न तो पुतिन, जो रूस के सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर-इन-चीफ हैं, और न ही रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने रविवार दोपहर तक सार्वजनिक रूप से हार पर कोई टिप्पणी की थी। वहीं, राष्ट्रपति पुतिन ने मस्कोवाइट्स को दिए गये एक इंटरव्यू में बताया कि, "हम मास्को पर गर्व करते हैं, और इस शहर को इसकी राजसी पुरातनता और जीवन की आधुनिक और गतिशील गति, इसके आरामदायक पार्कों, गलियों और सड़कों के आकर्षण और व्यापार और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की बहुतायत से प्यार करते हैं।" लेकिन, उन्होंने यूक्रेन में रूसी सैनिकों को मिली हार पर चुप्पी साध रखी है। वहीं, खुद को जर्मनी में केजीबी का जासूस बताए जाने के सवाल पर पुतिन ने कहा कि, मॉस्को चुप है, क्योंकि बर्लिन की महान दीवार ढह गई है। वहीं, अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी रक्षा मंत्री ने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, युद्ध समर्थक एक रूसी ब्लॉगर ने रूसी नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि, 'वे शायद पेशाब कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि, "अब चुप रहने और कुछ न कहने का समय नहीं है ... यह गंभीर रूप से हमारे युद्ध लड़ने के कारण को आहत करता है।"

युद्ध समर्थकों में क्यों है गुस्सा
दरअसल, रूसी रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को अपने सैनिकों को 'रीग्रुप' करने की बात कही थी और उन्हें खार्किव से आगे बढ़ने का आदेश दिया था, ताकि दोनेत्स्क पर पूरा फोकस किया जा सके, जो पूर्वी यूक्रेन का हिस्सा है। लेकिन, रूसी सैनिकों के पीछे हटने का आदेश देना रूस के राष्ट्रवादियों के मन में क्रोध भर रहा है और रूसी ब्लॉगर्स इसके लिए अपने नेतृत्व की जमकर आलोचना कर रहे हैं। कई युद्ध समर्थक, जिनमें पूर्व सैनिक और रक्षा विशेषज्ञ शामिल हैं, उन्होंने पुतिन की आलोचना करते हुए कहा कि, रूसी रक्षा मंत्रालय अपनी हार को कम करने करके बता रहा है।

क्या रूस को मिल रही है हार?
इगोर गिरकिन, एक राष्ट्रवादी और पूर्व एफएसबी अधिकारी, जिन्होंने यूक्रेन के पूर्वी डोनबास क्षेत्र में 2014 के युद्ध को शुरू करने में मदद की थी,उन्होंने यूक्रेन में रूसी सैनिकों की हार की तुलना साल 1905 की रूस-जापान युद्ध से की है, जिसमें जापान के सामने रूसी सैनिकों की बुरी हार हुई थी, जिसके बाद ही रूस में 1905 की क्रांति आई थी। वहीं, यूक्रेन ने काफी तेजी और जोश के साथ नये तरीके के साथ लड़ाई शुरू कर दी है, जिसकी वजह से इजियम में रूसी सैनिकों को भारी संख्या में गोला बारूद के भंडार और उपकरणों को छोड़कर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इगोर गिरकिन ने हमेशा से ही रूसी शीर्ष नेतृत्व से बेपरवाह रहकर उनकी आलोचना की है। उन्होंने रूसी रक्षा मंत्री शोइगु को "कार्डबोर्ड मार्शल" कहा है और जोर देकर कहा है, कि अगर रूस ने देशव्यापी लामबंदी की घोषणा नहीं की, तो यूक्रेन में रूस हार जाएगा।












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