ChatGPT ने लगाया छात्रा का यौन उत्पीड़न करने का झूठा आरोप, लॉ प्रोफेसर बोले- ‘मैं उस लड़की से मिला ही नहीं’
एक लॉ प्रोफेसर ने अपनी आपबीती सुनाते हुए ब्लॉग लिखकर बताया है कि कैसे ChatGPT ने उन्हें यौन शोषण का आरोपी बना दिया। दरअसल ChatGPT ने एक यौन शोषण करने वालों की लिस्ट बनाई जिसमें प्रोफेसर का भी नाम जोड़ दिया।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित ChatGPT इंसानी दिमाग के समान कार्य करने की योग्यता रखने के कारण इन दिनों छाया हुआ है। हालांकि कुछ वजहों से इसे लेकर अब विवाद शुरू हो गया है। ChatGPT द्वारा अमेरिका के एक लॉ प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न का झूठा आरोप लगाने का आरोप है।
पिछले हफ्ते एक शोध अध्ययन के दौरान कैलिफोर्निया में एक वकील ने ChatGPT से उन कानूनी विद्वानों की सूची तैयार करने के लिए कहा था जिन्होंने किसी का यौन उत्पीड़न किया था। इसके बाद ChatGPT एक लिस्ट बनाई। इस लिस्ट में लॉ प्रोफेसर जोनाथन टर्ली का नाम भी जोड़ दिया।
OpenAI के चैटबॉट ChatGPT ने एक द वाशिंगटन पोस्ट रिपोर्ट का हवाला देते हुए जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के लॉ प्रोफेसर टर्ली पर आरोप लगाया कि 2018 में अलास्का की क्लास ट्रिप के दौरान प्रोफेसर ने एक स्टूडेंट को छूने का प्रयास किया था और उस पर यौन टिप्पणियां की थीं।
दिलचस्प बात तो ये है कि वाशिंगटन पोस्ट पर ऐसी कोई रिपोर्ट मौजूद ही नहीं है और न ही कभी अलास्का क्लास ट्रिप हुई थी। जोनाथन टर्ली ने इस पर चिंता जताते हुए एक आर्टिकल में कहा कि जिस छात्रा का ChatGPT जिक्र कर रहा है उसे आजतक उन्होंने कभी पढ़ाया तक नहीं है।
जोनाथन टर्ली ने इसे लेकर ट्विटर पर लिखा, "यह एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है। क्या हम वास्तव में AI पर भरोसा कर सकते हैं? मुझे इसके बारे में पता चला तो पहले मुझे हास्यास्पद लगा, लेकिन बाद में महसूस हुआ कि मुझ पर लगाया यह आरोप मेरी छवि को नुकसान पहुंचाने वाला है।"
गौरतलब है कि ये पहली बार नहीं है जब ChatGPT को लेकर ऐसे दावे किए गए हैं। इससे पहले ChatGPT ने गलत दावा करते हुए लिखा था कि ऑस्ट्रेलिया में एक मेयर ब्रायन हुड को रिश्वतखोरी के लिए कैद किया गया था। इस दावे से नाराज होकर हेपबर्न शायर के मेयर ब्रायन हुड ने ChatGPT की निर्माता कंपनी OpenAI पर मुकदमा करने की धमकी दी है।
बता दें कि ChatGPT, बार्ड जैसे अनियमित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर को वेब पर शामिल किया जाना शुरू हो गया है। विशेषज्ञों को आशंका है कि इससे झूठ और गलत सूचनाओं के प्रसार को बढ़ावा मिल सकता है। हाल ही में हजारों विशेषज्ञों और टेक्नोलॉजी कंपनी के अधिकारियों ने इन पर रोक लगाने की अपील की है।
30 नवंबर को लांच हुआ ChatGPT इंसानों की तरह टेक्स्ट लिख सकता है। ये अमूमन किसी भी सवाल का जवाब देने में सक्षम है। इतना ही नहीं, ChatGPT कई जटिल प्रोजेक्ट डिजाइन करने में सक्षम है। बीते महीने लांच हुआ ChatGPT का अपग्रेड वर्जन ChatGPT-4 तो तस्वीरों को भी पहचान सकता है।












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