पानी पी-पीकर जवाब देता है ChatGPT! जल संरक्षण के लिए क्या कर रही हैं Google,Microsoft जैसी कंपनियां? जानिए
करीब सात महीने पहले जबसे चैटजीपीटी आया है, यह कई क्षेत्रों के लिए गेम-चेंजर साबित हो रहा है। लोगों को काम करने के तरीके में यह अपने कौशल से चमत्कारिक बदलाव ला रहा है। लेकिन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस चमत्कार की कई तरह की आलोचनाएं भी हो रही हैं। अब इसपर होने वाले पानी के खपत से दिमाग हिल सकता है।
अमेरिका के कोलोराडो रिवरसाइड यूनिवर्सिटी और टेक्सास यूनिवर्सिटी आर्लिंगटन के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में पाया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का यह चैटबॉट्स खुद को ठंडा रखने के लिए बहुत ही ज्यादा मात्रा में पानी 'इस्तेमाल' करता है।

सवालों के जवाब देने के लिए खुद को ठंडा रखता है चैटजीपीटी
इन शोधकर्ताओं ने 'मेकिंग एआई लेस थर्स्टी': अनकवरिंग एंड एड्रेसिंग द सीक्रेट वाटर फुटप्रिंट ऑफ एआई मॉडल्स' के नाम से तैयार अपने शोधपत्र में चैटजीपीटी के पानी 'पीने' के बारे में खुलासा किया है। इसके मुताबिक चैटजीपीटी आपके थकाने वाले सवालों का जवाब देने के दौरान खुद को कूल रखने के लिए बड़ी मात्रा में 'पानी' इस्तेमाल करता है।
एशिया में पानी की खपत तीन गुना बढ़ सकती है
शोधकर्ताओं ने जो आकलन किया है उसके मुताबिक अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट के डेटा सेंटर का ट्रेनिंग जीपीटी-3 सीधे 70,00,00 लीटर ताजा पानी इस्तेमाल कर सकता है। यह उतना है कि जो 370 बीएमडब्ल्यू कारों या 320 टेस्ला इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन पर खपत होता है। यही नहीं अगर यही ट्रेनिंग कंपनी के एशिया स्थिति डेटा सेंटर में हो तो वहां पानी की यह खपत तीन गुना बढ़ जाएगी। हालांकि इस शोध की सहकर्मी समीक्षा अभी बाकी है।
चैटजीपीटी के प्रत्येक बातचीत पर आधा लीटर पानी की खपत
चैटजीपीटी में पानी का इस्तेमाल सिर्फ इसकी ट्रेनिंग तक ही सीमित नहीं है। शोध में पाया गया है कि चैटजीपीटी पर आपके 20 से 50 सवाल जवाबों के दौरान प्रत्येक बातचीत पर चैटबॉट 500 एमएल पानी इस्तेमाल करता है। यह पानी उसके सर्वर को ठंडा रखने पर इस्तेमाल होता है।
बहुत तेजी से बढ़ रहा है यूजर बेस
चैटजीपीटी अबतक के इतिहास में सबसे तेजी से 1 मिलियन यूजर तक पहुंचने वाला सॉफ्टवेयर है, जिसके अब 100 मिलियन से ज्यादा यूजर हो चुके हैं। अगर इतने विशाल यूजर बेस को देखें तो यह पर्यावरण संकट को और बढ़ाने वाला नजर आता है।
गूगल ने भी बनाया है बार्ड (Bard)
चैटजीपीटी माइक्रोसॉफ्ट के एआई इनोवेशन से जुड़े ओपनएआई का प्रोडक्ट है। लेकिन, इस तरह का एआई चैटबॉट बनाने वाला माइक्रोसॉफ्ट अकेला नहीं है। गूगल ने बार्ड (Bard) बनाया है, जिसके भी कई मिलियन सक्रिय यूजर होंगे, लेकिन इसकी संख्या का अबतक खुलासा नहीं किया गया है।
10 लाख घरों में साल भर इस्तेमाल लायक पानी की खपत!
ओरेगोनियन ने खुलासा किया है कि गूगल के ग्लोबल डेटा सेंटर ने 2022 में 15 बिलियन गैलन पानी गटक लिया था। बाद में छानबीन में यह बात सामने आई कि कंपनी ने एक ही इलाके में अकेले 2021 में 1.25 बिलियन लीटर पानी इस्तेमाल किया था। कुछ अनुमानों के मुताबिक यह इतना पानी है, जिससे एक साल तक 10 लाख घरों में पानी की पर्याप्त सप्लाई हो सकती है।
डेटा सेंटर के स्थान परिवर्तन पर हो रहा है काम
ऐसी स्थिति में इस रिसर्च से अलग यह समाधान बताया जा रहा है कि ऐसे डेटा सेंटर्स को या तो बहुत ठंडी जगहों पर या फिर पानी के अंदर शिफ्ट किया जा सकता है। क्योंकि, इन जगहों पर एनर्जी और पानी दोनों की खपत कम रहने की उम्मीद है। माइक्रोसॉफ्ट उन कंपनियों में से एक है, जिसने पानी के नीचे के डेटा सेंटर पर प्रयोग किया है और दावा किया है कि यह भरोसेमंद, व्यावहारिक है और परंपरागत डेटा सेंटर से कम ऊर्जा इस्तेमाल करता है।
गूगल पानी की बचत के लिए क्या कर रही है?
लगता है कि माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियां इस चुनौती से निपटने के लिए अलग-अलग नजरिया अपना रही हैं, ताकि डेटा सेंटर को ज्यादा टिकाऊ बनाया जा सके।
एक प्रेस कांफ्रेंस में गूगल ने कहा था कि जहां भी संभव है, वह अपने डेटा सेंटर के लिए समुद्र का पानी या रिसाइकिल किया हुआ पानी इस्तेमाल करता है। यही नही वह नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत और कार्बन ऑफसेट में भी निवेश करता है। उसका कहना है कि वह स्थानीय लोगों और स्थानीय अधिकारियों के साथ भी यह तालमेल बिठाने की कोशिश करता है, ताकि दूसरे उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव न पड़े।
माइक्रोसॉफ्ट क्या कर रही है?
वहीं माइक्रोसॉफ्ट का नजरिया बिल्कुल ही अलग है। वह 2024 तक डेटा सेंटर्स में पानी का इस्तेमाल 95 फीसदी तक कम करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है और भविष्य में इसे पूरी तरह से खत्म कर देने की बात कर रहा है। वह अपने सर्वरों को भविष्य में ठंडा रखने के लिए उन्हें फ्लूओरोकार्बन आधारित लिक्विड में डुबो कर रखने की योजना पर भी काम कर रहा है।












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