हिप्पोक्रेसी की भी हद होती है... प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपातकाल लगाने का जस्टिन ट्रूडो का फैसला असंवैधानिक

Justin Trudeau News: भारत को लोकतंत्र और दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन पर ज्ञान देने वाले कनाडाई प्रधानमंत्री की हिप्पोक्रेसी की कनाडाई कोर्ट ने पोल खोलकर रख दी है।

ओटावा की एक संघीय अदालत ने फ्रीडम कॉन्वॉय द्वारा कोविड-19 टीकाकरण का विरोध करने के लिए फरवरी 2022 में कनाडा में भारी विरोध प्रदर्शन किया था और उस विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा में आपातकाल लगा दिया था और अब कनाडा की फेडरल कोर्ट ने उनके इस फैसले को असंवैधानिक करार दिया है।

Emergency invoked by Trudeau govt unjustified

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ राष्ट्रीय आपातकाल लगाने के प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार के फैसले को कनाडा की फेडरल कोर्ट ने अवैध करार दिया है, जिसके बाद सवाल ये उठ रहे हैं, कि ये पश्चिमी देश के नेता भारत जैसे विशालकाय लोकतांत्रिक देशों को ज्ञान देने में सबसे आगे रहते हैं, लेकिन जब खुद पर बात आती है, तो ये कितनी आसानी से संविधान की धज्जियां उड़ा देते हैं।

सवाल अमेरिका पर भी उठ रहे हैं, जो भारत को बार बार लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने की कोशिश करता रहता है, लेकिन कनाडाई फेडरल कोर्ट के फैसले आए हुए कई घंटों का वक्त बीत चुका है, लेकिन व्हाइट हाउस ने जस्टिन ट्रूडो को एक शब्द का भी ज्ञान नहीं दिया है।

इसीलिए एक्सपर्ट्स का कहना है, कि कनाडा जैसे देश लोकतंत्र का ढोंग करते हैं, लेकिन जब खुद पर बात आती है, तो ये सबसे पहले संविधान को पैरों से ठोकर मारते हैं।

कनाडाई कोर्ट का फैसला क्या है?

मंगलवार (स्थानीय समय) को दिए गए एक फैसले में, कनाडाई फेडरनल कोर्ट के न्यायाधीश रिचर्ड जी मोस्ले ने कहा, कि "मैंने निष्कर्ष निकाला है, जिन बाधाओं पर विचार किया जाना आवश्यक था, उनपर आपातकाल जारी करने का फैसला तर्कसंगतता, औचित्य, पारदर्शिता और समझदारी - की पहचान नहीं करता है और प्रासंगिक तथ्यात्मक और कानूनी के संबंध में उचित नहीं था।"

आपको बता दें, कि 14 फरवरी 2022 को, जैसे ही ट्रंक ड्राइवर्स का आंदोलन 18वें दिन में प्रवेश कर गया, जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने आपातकालीन अधिनियम लागू कर दिया, जो कनाडा में पहले कभी नहीं किया गया था।

जस्टिन ट्रूडो के इस फैसले को खालिस्तान समर्थक कनाडाई सिख नेता जगमीत सिंह के नेतृत्व वाली न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थन से हाउस ऑफ कॉमन्स में इसकी पुष्टि की गई थी, लेकिन सीनेट में मतदान से पहले इसे नौ दिन बाद रद्द कर दिया गया था।

हालांकि, इतने दिनों में जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने ट्रक ड्राइवर्स के प्रदर्शन को इस कानून के तहत कुचल दिया था। ट्रंक ड्राइवरों के प्रदर्शन को सरकार के आदेश पर पुलिस ने चारों तरफ से घेर लिया था और तमाम सामानों की सप्लाई रोक दी थी। लेकिन, हैरानी का बात ये थी, कि पड़ोसी देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन को कुचल दिया गया, लेकिन व्हाइट हाउस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

न्यायमूर्ति मोस्ले ने फैसले में लिखा, कि "मैं यह निष्कर्ष निकालता हूं, कि आपातकालीन अधिनियम को लागू करने को उचित ठहराने वाला कोई राष्ट्रीय आपातकाल नहीं था, और ऐसा करने का फैसला अनुचित और अधिकारों के खिलाफ था।"

वहीं, कनाडा के उप प्रधान मंत्री क्रिस्टिया फ़्रीलैंड ने संवाददाताओं से कहा, कि सरकार ने फेडरल कोर्ट के फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि "हमें विश्वास है, कि हम उस समय कुछ आवश्यक और कानूनी कदम उठा रहे थे।"

उन्होंने कहा, "यह मेरा विश्वास आज भी कायम है।"

आपातकाल के आह्वान को नागरिक स्वतंत्रता समूहों, कैनेडियन सिविल लिबर्टीज एसोसिएशन (सीसीएलए) और कैनेडियन कॉन्स्टिट्यूशन फाउंडेशन और विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले दो प्रतिभागियों द्वारा अदालत में चुनौती दी गई थी, जिनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए थे।

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