कनाडा-अमेरिका और रूस में सूरज का प्रचंड कहर, सैकड़ों मरे, बर्बाद हुआ एक शहर, 121 डिग्री पहुंचा पारा
अमेरिका और कनाडा में अभूतपूर्व गर्मी की वजह से सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और वैज्ञानिकों ने कहा है कि इंसानों को अब प्रकृति ने सबक सिखाना शुरू कर दिया है।
वॉशिंगटन, जुलाई 04: कनाडा में एक शहर है, जिसका नाम है लिटन। इस छोटे से शहर ने गर्मी को लेकर कनाडा में पिछले सभी रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। कनाडा में पिछले 10 दिनों में ऐसी लू चल रही है, जिसकी चपेट में आकर अभी तक सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं, खतरनाक गर्मी की वजह से करीब 150 से ज्यादा जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें से कई जंगल अब भी जल रहे हैं। कनाडा के लिए गर्मी इतना विनाशकारी इसलिए साबित हो रहा है, क्योंकि गर्मी के महीनों में कनाडा का तापमान ज्यादा से ज्यादा 25 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता था, वो भी कभी कभी। लेकिन, इस बार कनाडा में पारा 50 डिग्री को छू चुका है और ऊपर से लू को भी कनाडा के लोगों ने पहली बार महसूस किया है, जिससे सैकड़ों लोग अपनी जान महज एक हफ्ते में गंवा चुके हैं।
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121 डिग्री तक पहुंचा पारा
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक कनाडा के लिटन शहर में 121.3 डिग्री फॉरेनहाइट यानि 49.6 डिग्री सेल्सियस तक पारा पहुंच चुका है। पहाड़ों में बसे इस शहर के लिए इतनी गर्मी आश्चर्यजनक है। इन जगहों पर 25 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पहुंचना एक रिकॉर्ड बन जाता है। इन इलाकों में घरों में गर्मी बनाए रखने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सामान लगाए जाते हैं, घरों में हीटर जलाए जाते हैं और इन जगहों पर एयरकंडीशन नहीं मिलता है। लेकिन, इस बार की स्थिति अलग है और ग्लोबल वॉर्मिंग क्या चीज है, उसका पता कनाडा और अमेरिका जैसे देशों को पता चल रहा है। जो लोग ग्लोबल वॉर्मिंग को मजाक समझते हैं, वो अभी कनाडा की स्थिति जाकर देख सकते हैं। स्थिति ये है कि लिटन शहर के लोगों ने घरों को छोड़ दिया है और किसी ठंडे स्थान पर जाना शुरू कर दिया है।

ग्लोबल वॉर्मिंग मजाक नहीं है
वैज्ञानिकों ने दशकों से चेतावनी दे रखी है कि जलवायु परिवर्तन गर्मी की लहरों को काफी खतरनारक बना देगा और उस गर्मी में रहना लोगों के लिए संभव नहीं होगा। ये कनाडा में वास्तव में हो रहा है। और उत्तरी गोलार्ध के कई हिस्से अब इंसानों के रहने लायक नहीं बचे हैं। नॉर्थ हेम्पशॉयर के कई हिस्से पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं और लोगों ने उसे पूरी तरह से खाली कर दिया है। इस हफ्ते अमेरिका के उत्तर-पश्चिम में सड़कें के किनारे सालों से मौजूद बर्फ पिघलने शुरू हो गये हैं और न्यूयॉर्क शहर के निवासियों को बिजली की समस्या से बचने के लिए पॉवर ग्रिड या फिर वॉशर या ड्रायर इस्तेमाल नहीं करने को कहा गया है। रिपोर्ट है कि अमेरिका के कई शहरों में भयानक बिजली कटौती की जा रही है और बिजली कटौती ने लोगों को पसीना पसीना कर दिया है।

रूस में भी गर्मी में बेतहाशा वृद्धि
रूस की राजधानी मास्को ने 23 जून को अपने उच्चतम तापमान 34.8 डिग्री दर्ज किया है, जो रूस के लिए एक आश्चर्य की बात है। साइबेरियाई किसान अपनी फसलों को चल रही गर्मी की लहर में मरने से बचाने के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं। आर्कटिक सर्कल में भी तापमान बढ़ गया है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने आर्कटिक सर्कल के उत्तर में अब तक का सबसे ज्यादा तापमान रिकॉर्ड किया है। साइबेरिया के वेरखोयांस्क में एक मौसम स्टेशन ने 20 जून को 38 डिग्री दिन दर्ज किया था और साइबेरिया में इतना टेम्परेचर कभी नहीं गया था।

भारत में भी भीषण गर्मी
यही हाल भारत का भी है। हालांकि, भारत में सालों से भीषण गर्मी पड़ती रही है और भारत देश के लिए 40 डिग्री सेल्सियस की गर्मी कोई नई बात नहीं है। राजस्थान के कई इलाकों में पारा पचास डिग्री को भी कई बार पार कर जाता है और इस बार भी भारत के करोड़ो लोग गर्मी से परेशान है। भारतीय मौसम विभाग ने बुधवार को राजधानी नई दिल्ली और इसके आसपास के शहरों को "अत्यधिक गंभीर गर्मी" की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने कहा है कि भारत में सामान्य तापमान से 7 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा तापमान बढ़ सकता है। मौसम विभाग ने कहा कि राजस्थान जैसे राज्य में भीषण गर्मी लोगों को काफी बदहाल कर देगा और मॉनसून की देरी से किसान भयानक प्रभावित होंगे।

इराक में गर्मी से छुट्टी की घोषणा
वहीं, इराक की सरकार ने भीषण गर्मी को देखते हुए सार्वजनिक छुट्टी का ऐलान कर दिया है। इराक की राजधानी बगदाद समेत कई हिस्सों में सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा कर दी गई है। इराक के कई हिस्सों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है और बिजली व्यवस्था इराक में पहले से ही बदहाल रहा है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में अचानक भारी गर्मी पड़ना कोई संयोग नहीं है, बल्कि अब गर्मी और बढ़ने वाली है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तरी गोलार्ध में गर्मी अभी और ज्यादा बढ़ने वाली है और भीषण गर्मी की वजह से हजारों लोगों की मौत हो सकती है।

वैज्ञानिकों ने कहा- अब हर साल ऐसा ही होगा
वैज्ञानिकों का मानना है कि पिछले 100 सालों में इंसानों ने प्रकृति का जितना नुकसान किया है, अब प्रकृति ने इंसानों से उसका बदला लेना शुरू कर दिया। वैज्ञानिकों ने कहा है कि अब साल 2100 तक अमेरिका, कनाडा और रूस के तापमान में हर साल इजाफा होगा और ठंडे प्रदेश के लोगों को अब गर्मी को नीयत मान लेनी चाहिए। वहीं, ग्लोबल वॉर्मिंग को लेकर अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ सहित कई देशों ने हाल ही में अपनी प्रतिबद्धताओं में वृद्धि की है। लेकिन कई वैज्ञानिकों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे अभी भी वैश्विक औसत तापमान को 1.5C से ऊपर रखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

कनाडा और अमेरिका में क्या हुआ है
कनाडा में असामान्य गर्म हवाओं की थपेड़ों के चलते तापमान 49.5 डिग्री तक पहुंच गया है, जो कि वहां अब तक का रिकॉर्ड है। मौसम विशेषज्ञों ने जलवायु की इस घटना के लिए हीट डोम के प्रभाव को जिम्मेदार माना है। कहा जा रहा है कि कनाडा पर 10 हजार साल में पहली बार इस तरह के हीट डोम का असर पड़ा है। इस क्षेत्र में हर साल 16.4 डिग्री सेल्सियस ही औसत तापमान दर्ज किया जाता है। लेकिन, जहां कभी भी तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार नहीं गया, वहां इसबार करीब 50 डिग्री के करीब तक पहुंच गया है।

हीट डोम क्या है ?
अमेरिका के कॉमर्स डिपार्टमेंट के नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) के मुताबिक हीट डोम तब बनता है, जब वायुमंडल गर्म समुद्री हवा को ढक्कन या टोपी की तरह ढंक लेता है। एनओएए के मुताबिक यह घटना तब होती है, जब समुद्र के तापमान में बहुत ज्यादा बदलाव आता है। इसकी वजह से समुद्र की गर्म सतह ज्यादा गर्म हवाओं को ऊपर उठने को मजबूर करती हैं। सामान्य शब्दों में समझें तक वायुमंडल का उच्च दबाव गर्म हवा को नीचे की ओर धकेलता है। इसके चलते गर्म हवा वातावरण में फैलने लगती है, और वह गर्म चैंबर की तरह काम करने लगती है। उच्च दबाव की वजह से बादल भी ढक्कननुमा डोम से दूर धकेल दिए जाते हैं और नीचे हवा सिकुड़ती है और लू चलने लगती है। अभी जो कनाडा और अमेरिका के एक हिस्से में तापमान कहर बरपा रहा है, उसके पीछे एक्सपर्ट आर्कटिक के ऊपर बने उच्च दबाव की वजह से बना वायुमंडलीय विक्षोभ को वजह बता रहे हैं, जिसके चलते तापमान ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

हीट डोम का प्रभाव
हीट डोम की स्थिति में जो लोग बिना एयर कंडिशनर के रहते हैं, उनके लिए अत्यधिक तापमान को झेलना नामुमकिन होने लगता है और अचानक मौतों का सिलसिला शुरू हो जाता है, जैसा कि कनाडा और अमेरिका के कुछ हिस्से में देखने को मिला है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इसके चलते फसल भी बर्बाद हो सकते हैं और हरियाली खत्म हो सकती है, जिससे अकाल की स्थिति पैदा हो सकती है। प्रचंड गर्मी के चलते ऊर्जा की मांग भी बढ़ जाती है। यही नहीं जलवायु की यह घटना जंगल के आग के लिए भी जिम्मेदार हो सकती है, जिसके चलते अमेरिका की काफी हरी जमीन हर साल बर्बाद हो जाती है।
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