Explainer: कनाडाई चुनाव में चीनी फंडिंग से पॉलिटिकल तूफान, ट्रूडो को PM क्यों बनाना चाहते थे शी जिनपिंग?

Canada Election Chinese Funding: कनाडाई प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो का दावा है, कि 18 नवंबर को सैन फ्रांसिस्को में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) मंच पर, नेताओं की बैठक के दौरान, उन्हें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से "हैलो" के अलावा और भी बहुत कुछ कहना था।

जस्टिन ट्रूडो ने कहा, कि उन्होंने शी जिनपिंग से कहा, कि दोनों देशों को अपनी कम्युनिकेशन लाइनें खुली रखनी चाहिए। उन्होंने कहा, कि यह जरूरी है कि कनाडा और चीन उस चीज़ को बनाने की दिशा में काम करते रहें, जिसे ट्रूडो रचनात्मक संवाद कहते हैं।

ट्रूडो की ये टिप्पणियां कनाडा की घरेलू राजनीति में कथित चीनी हस्तक्षेप से संबंधित कनाडा में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक तूफान के बीच आई हैं, जिसमें कनाडाई प्रधान मंत्री और चीनी राष्ट्रपति, दोनों कनाडा के विपक्षी दलों के निशाने पर हैं।

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कनाडा में चुनावों में चीनी हस्तक्षेप पर विवाद ने बहुत बड़ा तूफान पैदा कर दिया है, क्योंकि खुलासा किया गया है, कि चीन ने कनाडा में साल 2021 में हुए चुनाव के दौरान एक और अल्पसंख्यक सरकार बनवाने के लिए जस्टिन ट्रूडो की लिबरल पार्टी का समर्थन किया था और फंडिंग की थी।

चीन का जस्टिन ट्रूडो की लिबरल पार्टी को फंडिंग करने के पीछे की वजह ये थे, कि कनाडा की कंजर्वेटिव पार्टी चीन के प्रति मित्रवत रवैया नहीं रखती है, लिहाजा चीन ने लिबरल पार्टी को समर्थन कर जस्टिन ट्रूडो की सरकार बनवाई, ताकि जस्टिन ट्रूडो चीन के खिलाफ कोई फैसला ना करें।

कनाडाई नेताओं को चीन से मिले पैसे

खुलासा हुआ है, कि चीनी अधिकारियों ने चुनाव परिणाम को प्रभावित करने के लिए, 2019 के चुनावों में बिचौलियों के माध्यम से 11 उम्मीदवारों के गुप्त नेटवर्क को पैसा भेजा था। इनमें से नौ उम्मीदवार लिबरल पार्टी से थे, जबकि दो कंजर्वेटिव पार्टी से थे, जिन्हें चीनी प्रतिष्ठान का समर्थन प्राप्त था।

चीन का मकसद कनाडा में एक पूर्ण बहुमत की सरकार बनने से रोकना था।

कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (सीएसआईएस) ने बताया, कि टोरंटो में स्थिति चीन के वाणिज्य दूतावास ने, कनाडा इलेक्शन के दौरान कम से कम 11 उम्मीदवारों के चुनाव अभियान को फंड किया था और इसके लिए गुप्त नेटवर्क के जरिए ढाई लाख डॉलर ट्रांसफर किए थे।

कनाडाई एजेंसी का कहना है, कि 2022 में जस्टिन ट्रूडो को चीनी हस्तक्षेप अभियानों के उदाहरणों की जानकारी दी गई थी, लेकिन जस्टिन ट्रूडो ने उन पर कार्रवाई नहीं की। कनाडाई चुनावों में चीनी हस्तक्षेप पर सीएसआईएस रिपोर्ट के संबंध में एक समाचार रिपोर्ट के बाद जस्टिन ट्रूडो ने एक सार्वजनिक बयान दिया।

सीएसआईएस के पूर्व वरिष्ठ विश्लेषक डेनिस मोलिनारो ने पीएमओ को स्पष्ट और बड़ी संख्या में चीनी हस्तक्षेप गतिविधियों की रिपोर्ट प्रदान करने के बावजूद, प्रधान मंत्री द्वारा निर्णायक कार्रवाई की कमी से निराशा के कारण उन्होंने एजेंसी छोड़ दी थी।

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ट्रूडो के फाउंडेशन को डोनेशन

ऐसी रिपोर्टें भी सामने आईं, कि ऐसा मालूम होता है, कि चीन ने 2013 में लिबरल पार्टी के नेता बनने के बाद एक फॉरेन इंन्फ्लुएंस ऑपरेशन के तहत, जस्टिन ट्रूडो को निशाना बनाया था। बीजिंग की योजना में पियरे इलियट ट्रूडो फाउंडेशन को महत्वपूर्ण धन का दान करना शामिल था।

आपको बता दें, कि पियरे इलियट, जस्टिन के पिता और कनाडा के पूर्व प्रधान मंत्री थे।

यानि, चीन ने जस्टिन ट्रूडो के लिबरल पार्टी के नेता बनने के बाद उनके फाउंडेशन को चंदा दिया था, ताकि वो चीन की नीतियों को अपने पिता की तरह आगे बढ़ाए।

एक चीनी राजनयिक ने बीजिंग में सरकार के राजनीतिक सलाहकार, चीनी अरबपति झांग बिन को 2015 के चुनावों से पहले पियरे इलियट ट्रूडो फाउंडेशन को 10 लाख डॉलर का दान देने का निर्देश दिया और संभावना जताई गई, कि लिबरल पार्टी, विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी के स्टीफन हार्पर को चुनाव में शिकस्त देंगे और लिबरल पार्टी की सरकार का गठन करेंगे।

इसके अलावा, एक और अमीर चीनी कारोबारी, निउगेनशेंग को भी पियरे ट्रूडो की "स्मृति और नेतृत्व का सम्मान करने के लिए" 10 लाख डॉलर दान करने के लिए कहा गया था।

आपको बता दें, कि जस्टिन ट्रूडो कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने साल 1970 में चीन के साथ डिप्लोमेटिक संबंधों की शुरूआत की थी।

हालांकि, जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा की घरेलू राजनीति में चीनी हस्तक्षेप के खुलासे को कम करके आंकने की कोशिश की। उन्होंने खुलासे के पहले सप्ताह में ही आरोपों की सार्वजनिक जांच से इनकार कर दिया।

उन्होंने जोर देकर कहा, कि (हाउस ऑफ) कॉमन्स कमेटी ऑन प्रोसीजर एंड हाउस अफेयर्स द्वारा चीनी हस्तक्षेप की चल रही जांच पर्याप्त होगी। उन्होंने यह भी कहा, कि किसी भी चीनी हस्तक्षेप से चुनाव के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

उन्होंने कहा, कि संसद सदस्य जो "विदेशी चुनाव हस्तक्षेप को राजनीतिक मुद्दा देते हैं" चीन को कनाडा के लोगों के लोकतंत्र में विश्वास को कम करने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया में शीर्ष-गुप्त लीक की सटीकता पर सवाल उठाया, जिसमें आरोप लगाया गया था, कि चीन ने 2021 के चुनाव में हस्तक्षेप किया था।

यानि, जिस जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर भारत के साथ संबंधों को खत्म करने से पहले एक बार भी नहीं सोचा, उन्होंने देश के चुनाव में चीनी हस्तक्षेप और फंडिंग को लेकर जांच तक करवाने से इनकार कर दिया।

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