अमेरिका के शीर्ष विश्वविद्यालय ने भेदभाव विरोधी नीति में जाति को भी जोड़ा

कैलिफोर्निया, 26 जनवरी। कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी अपनी गैर भेदभाव नीति के तहत जाति को संरक्षित श्रेणी में जोड़ दिया है। जिसके बाद जाति के आधार पर किसी भी तरह का कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता है। बता दें कि कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी सिस्टम अमेरिका में सबसे बड़ी विश्वविद्यालय व्यवस्था में से एक है। यहां कुल 223 से अधिक परिसर, 8 ऑफ कैंपस केंद्र हैं। सभी कैंपस में कुल 4.85 लाख छात्र पढ़ते हैं, 55000 से अधिक स्टाफ हैं। अब विश्वविद्यालय ने अपनी गैर भेदभाव की नीति में जाति और जातीयता के साथ जाति के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करने की नीति को शामिल किया है।

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विश्वविद्याल के चांसलर जोसेफ कास्त्रो ने कहा कि कैलिफ़ोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी एक ऐसा माहौल बनाकर समबको एक साथ लेकर चलने और उच्च मूल्यों को बनाए रखने की इच्छा रखता है जहां हमारे सभी प्रतिभाशाली छात्रों और कर्मचारियों का स्वागत किया जाता है और उन्हें सफल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। मैं छात्रों, कर्मचारियों और अन्य साथियों के बेहतरीन काम और योगदान की सराहना करता हूं, जिन्होंने हमारी नीतियों के साथ आगे चलने का फैसला लिया।

हालांकि विश्वविद्यालय के इस फैसले का 80 संकाय सदस्यों ने विरोध किया है। सैन डियागो राज्य विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग के प्रोफेसर सुनील कुमार का कहना है कि मैं खुद भारतीय संकाय का सदस्य हूं,लिहाजा मुझे यह पता है कि अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के साथ भेदभाव किया जाता है, ऐसे में मौजूदा कानूनों के तहत इस तरह की सभी शिकायतों का निपटारा किया जा सकता है। लेकिन विश्वविद्यालय की नीति में यह बदलाव छात्रों के पक्ष में नहीं है, यह बदलाव बिना किसी वैज्ञानिक डेटा और साक्ष्य के किया गया है। इससे भेदभाव का निपटारा होने की बजाए और अधिक भेदभाव बढ़ेगा।

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