Space Tourism Budget: बजट में स्पेस टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए बड़ा ऐलान, जानिए सरकार का क्या है प्लान?

Space Tourism Budget: भारत की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पेस सेक्टर को बूस्ट देने के लिए भारी पैकेज का ऐलान किया है, जिसका मकसद भारत को स्पेस टूरिज्म सेक्टर में आगे बढ़ाना है, जिसमें दुनिया के कई देश आगे बढ़ रहे हैं और प्राइवेट प्लेयर्स अपना खास रास्ता बना रहे हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है, कि अगले 10 वर्षों में अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को पांच गुना बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जाएगा। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का कैपिटल फंड स्थापित किया जाएगा।

Budget 2024 in Hindi Space economy

स्पेस टूरिज्म के लिए बजट का ऐलान कर निर्मला सीतारमण ने भारत के स्पेस सेक्टर को पंख लगाने की कोशिश की है। इस वक्त एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स के अलावा जेफ बेजोस की कंपनी अमेजन और वर्जिन गैलेक्टिक कंपनी स्पेस टूरिज्म में अपना पांव फैला रही है। ये कंपनियों लोगों को स्पेस में ले जाती है और स्पेस का सैर करवाती है। माना जा रहा है, कि स्पेस टूरिज्म में काफी तेजी से विकास हो रहा है।

वर्जिन गैलेक्टिक ने पिछले साल दावा किया था, कि कम से कम 800 लोगों ने उसके यहां स्पेस में जाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है और कंपनी धीरे धीरे सभी लोगों को अंतरिक्ष की सैर करवाने के लिए तरीकों पर विचार कर रही है।

स्पेस टूरिज्म में आपको कितने रुपये देने होंगे?

अगर वर्जिन गैलेक्टिक कंपनी को आधार बनाया जाए, तो इस कंपनी की स्थापना 2004 में हुई थी और स्थापने के एक साल बाद 2005 से उसने टिकटों की बिक्री शुरू कर दी थी। कंपनी के मुताबिक 2005 से 2014 तक उसने 2 से ढाई लाख डॉलर में टिकट बेचे, जबकि बाद में उसका दाम साढ़े 4 लाख डॉलर कर दिया। भारत के हिसाब से ये राशि 3.28 करोड़ के आसपास बैठती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेस में यात्रा करने वाले लोगों को स्पेशल अंतरिक्ष यान से स्पेस में भेजा जाता है और करीब 90 मिनट तक उन्हें स्पेस में रखा जाता है। वहीं, अब इस प्लान पर काम किया जाता है, कि कैसे अंतरिक्षयात्रियों को ज्यादा से ज्यादा दिनों तक स्पेस में रखा जाए।

स्पेस टूरिज्म के क्या फायदे हैं?

1- स्पेस रिसर्च में फायदे- स्पेस टूरिज्म को बढ़ावा देने से स्पेस रिसर्च में काफी फायदे मिलते हैं और स्पेस टूरिज्म से जो इनकम होगी, उसे स्पेस सेक्टर में रिसर्च करने में लगाया जा सकता है। भारत सरकार की भी यही कोशिश है।

2- इकोनॉमिक फायदे- स्पेस टूरिज्म सेक्टर में निवेश करने से कारोबार का एक नया इको-सिस्टम विकसित होता है, जिससे रोजगार के नये अवसर खुलते हैं। जैसे, नये रॉकेट्स का निर्माण, स्पेस सर्विस और इससे संबंधित कई और सेक्टर्स में रोजगार के मौके बनते हैं।

3- डिप्लोमेटिक संबंध- स्पेस टूरिज्म के लिए अलग अलग देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ संबंध बनाने पड़ते हैं और चूंकी इस वक्त चुनिंदा देश ही स्पेस टूरिज्म में शामिल हैं, लिहाजा कई देशों से डिप्लोमेटिक संबंध बेहतर हो सकते हैं। इसके अलावा, जनरल टूरिज्म में भी इसका असर दिख सकता है।

4- पर्यटन स्थलों का विकास- स्पेस टूरिज्म में अगर विकास होता है, तो भारत आने वाले विदेशी दर्शक सिर्फ स्पेस टूरिज्म तक ही अपनी यात्रा को सीमित नहीं रखेंगे, इससे स्थानीय टूरिज्म का भी विकास होगा। और पर्यटन सेक्टर में नये आयान खुल सकते हैं।

5- ज्ञान का प्रसार- स्पेस टूरिज्म में अगर उछाल आता है, तो लोगों के बीच अंतरिक्ष को और ज्यादा जानने की जिज्ञासा बढ़ेगी, जिससे इस सेक्टर में ज्ञान का विकास होगा।

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ISRO, जो काफी कम कीमत पर सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में स्थापित करती है, वो स्पेस टूरिज्म को सस्ता बनाने के लिए काम कर रही है। जिससे माना जा रहा है, कि भारत अंतरिक्ष सेक्टर में निवेश कर एक नये सेक्टर को खोल सकता है। एक्सपर्ट्स इस बात को लेकर भी उम्मीद रखते हैं, कि जिस तरह से इसरो काफी कम कीमत में अपने मिशनों को अंजाम देता है, उसे देखते हुए भविष्य में आम लोगों के लिए स्पेस टूरिज्म काफी सस्ता हो सकता है और आम लोग भी अंतरिक्ष जा सकते हैं।

इसके साथ ही, स्पेस टूरिज्म को और बढ़ावा देने के लिए और अंतरिक्ष स्टेशनों और स्पेस होटलों के निर्माण का रास्ता भी खुल सकता है, जो एक इको-सिस्टम का निर्माण कर सकता है और एक्सपर्ट्स का मानना है, कि भारत सरकार ने स्पेस टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए बजट का ऐलान कर एक बड़ा कदम उठाया है।

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