‘गेम चेंजर होगा इंडिया-मिडिल ईस्ट कॉरिडोर’, बजट भाषण में बोलीं सीतारमण- दुनिया याद रखेगी यह भारत में शुरू हुआ
Interim Budget: भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को अंतरिम बजट पेश किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत-मिडिल ईस्च-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) देश के लिए रणनीतिक और आर्थिक स्तर पर गेम चेंजर साबित होगा।
वित्त मंत्री ने पीएम मोदी के बयान को दोहराते हुए कहा कि गलियारा बन जाने पर ये सैकड़ों सालों तक विश्व व्यापार का आधार बना रहेगा। सीतारमण ने कहा कि इतिहास याद रखेगा कि इस गलियारे की शुरुआत भारतीय धरती पर हुई थी।

लोकसभा को संबोधित करते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा, कि कोविड महामारी के बाद एक नई विश्व व्यवस्था उभर रही है। जब दुनिया कोरोना से जूझ रही थी ठीक ऐसे वक्त पर भारत ने जी20 की अध्यक्षता संभाली थी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुनिया में महंगाई, ब्याज दरें और कर्ज बढ़ रहा है। वहीं दुनिया के सामने सार्वजनिक ऋण, विकास में कमी और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां भी हैं। कोरोना महामारी की वजह से दुनियाभर में भोजन, उर्वरक, वित्त और कई दूसरी जरूरी चीजों का संकट पैदा कर दिया है। इन सबके दौरान भारत ने दुनिया को आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया और वैश्विक समस्याओं के मुद्दे पर सबके बीच आम सहमति बनाई।
आपको बता दें कि पिछले साल 9-10 सितंबर को G20 समिट के दौरान भारत, यूरोप और मिडिल ईस्ट यानी खाड़ी देशों के बीच कॉरिडोर बनाने को लेकर डील हुई थी। इस डील को चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) और चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) प्रोजेक्ट का जवाब माना जा रहा है।
फिलहाल, भारत, सऊदी अरब, फ्रांस, जर्मनी, इटली, अमेरिका और यूरोपीय संघ के कई देश इस इकोनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा हैं। इस कॉरिडोर को पूरा करने के लिए 10 साल का टारगेट रखा गया है। अनुमान है कि इस पर 20 अरब डॉलर खर्च हो सकते हैं।
इस कॉरिडोर के दो हिस्से होंगे। पहला- ईस्टर्न कॉरिडोर, जो भारत को खाड़ी देशों से जोड़ेगा। दूसरा- नॉर्दर्न कॉरिडोर, जो खाड़ी देशों को यूरोप से जोड़ेगा। इस प्रोजेक्ट का फायदा इजराइल और जॉर्डन को भी मिलेगा। यह कॉरिडोर 6 हजार किमी लंबा होगा। इसमें 3500 किमी समुद्र मार्ग शामिल है।
इस कॉरिडोर में रेलवे लाइन के साथ-साथ इलेक्ट्रिसिटी केबल, हाइड्रोजन पाइपलाइन और एक हाई-स्पीड डेटा केबल भी होगी। कॉरिडोर के बनने के बाद भारत से यूरोप तक सामान पहुंचाने में करीब 40 फीसदी समय की बचत होगी।
अब तक तो आफ समझ ही गए होंगे कि इस कॉरिडोर में रेल नेटवर्क के साथ-साथ शिपिंग नेटवर्क भी होगा। सबसे पहले भारत के मुंबई से लेकर संयुक्त अरब अमीरात तक समुद्री रास्ता होगा। इसके बाद पूरे मिडिल ईस्ट के देशों में रेल नेटवर्क तैयार होगा।
इस रेल नेटवर्क में संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जॉर्डन और इजराइल जोड़े जाएंगे। इसके बाद फिर समुद्री नेटवर्क शुरू होगा। यहां से ये दो भागों में बंट जाएगा। पहला रास्ता इजराइल के बंदरगाह से इटली तक जाएगा। दूसरा रास्ता इजराइल से फ्रांस तक जाएगा।












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